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राष्ट्रीय खेल दिवस: राजस्थान में प्रतिभाओं की भरमार, 1700 कोच चाहिए, खेल सिखाने को सिर्फ 50

Sat, 29 Aug 2026 04:34 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Sat, 29 Aug 2026 04:34 PM IST
सार

राष्ट्रीय खेल दिवस पर राजस्थान के खेल ढांचे की तस्वीर सामने आई। करीब 1700 कोचों की जरूरत के मुकाबले 50 उपलब्ध हैं। खेल मैदान, प्रशिक्षण और संसाधनों की कमी चुनौती बनी है।

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National Sports Day: Rajasthan Has Talent in Abundance but a Coaching Crunch, Needs 1,700 Coaches, Has Only 50
एसएमएस स्टेडियम राजस्थान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। गांव-कस्बों से लेकर शहरों तक युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का सपना देखते हैं, लेकिन प्रतिभा और पदक के बीच सबसे बड़ी बाधा प्रशिक्षण व्यवस्था बनती जा रही है। राष्ट्रीय खेल दिवस पर राजस्थान के खेल ढांचे की जमीनी तस्वीर देखें तो प्रशिक्षित कोच, खेल मैदान और नियमित प्रशिक्षण सुविधाओं की कमी कई सवाल खड़े करती है।

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राजस्थान बास्केटबॉल टीम के पूर्व कप्तान दानवीर भाटी के मुताबिक प्रदेश में करीब 40 खेल राजस्थान स्पोर्ट्स काउंसिल में रजिस्टर्ड हैं, लेकिन इन खेलों में खिलाड़ियों को नियमित और विशेषज्ञ प्रशिक्षण देने के लिए पर्याप्त कोच उपलब्ध नहीं हैं। उनका कहना है कि प्रदेश में करीब 1700 प्रशिक्षित कोचों की जरूरत है, जबकि फिलहाल खेल प्रशिक्षण के लिए 50 के आसपास कोच ही उपलब्ध हैं। यानी आवश्यकता और उपलब्धता के बीच बहुत बड़ा अंतर है।

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कई खेलों के लिए पूरे राजस्थान में सिर्फ एक कोच

राजस्थान के खेल ढांचे की चुनौती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई खेलों के लिए प्रदेशभर में पर्याप्त प्रशिक्षक तक उपलब्ध नहीं हैं।

भाटी के अनुसार बॉक्सिंग, साइकिलिंग और बैडमिंटन जैसे खेलों में पूरे प्रदेश में सिर्फ एक-एक कोच उपलब्ध है। ऐसे में अलग-अलग जिलों और कस्बों से आने वाले खिलाड़ियों को नियमित विशेषज्ञ प्रशिक्षण मिलना मुश्किल हो जाता है।

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खिलाड़ी तैयार करने के लिए सिर्फ मैदान और खेल सामग्री उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं है। तकनीक, फिटनेस, रणनीति और मानसिक मजबूती के लिए विशेषज्ञ कोच की जरूरत होती है। खासकर शुरुआती उम्र में सही प्रशिक्षण नहीं मिलने पर प्रतिभावान खिलाड़ी आगे की प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकते हैं।


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‘द्रोणाचार्य नहीं होंगे तो अर्जुन कैसे तैयार होंगे?’

दानवीर भाटी का कहना है कि राजस्थान में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें सही दिशा देने वाले विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की कमी लगातार बनी हुई है। ‘द्रोणाचार्य नहीं होंगे तो अर्जुन की कल्पना व्यर्थ है।’ उनका कहना है कि एक खिलाड़ी को राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में कोच की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। खिलाड़ी की तकनीक सुधारने से लेकर फिटनेस, रणनीति और मानसिक तैयारी तक हर स्तर पर लंबे समय तक विशेषज्ञ मार्गदर्शन की जरूरत होती है। यही वजह है कि कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी शुरुआती स्तर पर बेहतर प्रशिक्षण नहीं मिलने के कारण दूसरे राज्यों का रुख करने को मजबूर हो जाते हैं।

खेल मैदान भी बड़ी चुनौती

राजस्थान में सिर्फ कोच की कमी ही समस्या नहीं है। खेल मैदानों और अभ्यास की सुविधाओं का अभाव भी खिलाड़ियों के सामने बड़ी चुनौती है। कई जिलों में खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास के लिए पर्याप्त और मानक मैदान उपलब्ध नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण है। स्कूल और स्थानीय स्तर पर खेल सुविधाएं सीमित होने के कारण प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें शुरुआती प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। खिलाड़ियों का कहना है कि अगर स्कूल स्तर पर ही बेहतर मैदान, प्रशिक्षण और डाइट की व्यवस्था हो तो बड़ी संख्या में प्रतिभाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है।

 

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