क्या राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव पर लगेगी पूरी रोक?: कॉलेजों में चुनाव के नाम पर फीस वसूली बंद
क्या राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव बंद होने जा रहे हैं? राजस्थान सरकार के कॉलेज आयुक्तालय के एक आदेश के बाद इसे लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। जानिए क्या है यह आदेश और क्यों इसे लेकर हंगामा मचने लगा है?
विस्तार
प्रदेश में छात्र संगठन भले ही छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हों, लेकिन सरकार की मंशा कुछ और संकेत दे रही है। कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय ने सरकारी कॉलेजों को ऐसा आदेश जारी किया है, जिससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या सरकार छात्रसंघ चुनावों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की तैयारी में है।
फीस वसूली पर रोक, पुरानी राशि दूसरे कामों में खर्च होगी
कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय के अतिरिक्त आयुक्त कैलाश चंद यादव की ओर से कॉलेजों को जारी आदेश में कहा गया है कि सरकारी कॉलेजों में पढ़ रहे विद्यार्थियों से अब छात्रसंघ चुनाव मद में फीस नहीं ली जाएगी। अब तक इस मद में जो राशि वसूली जा चुकी है, उसे छात्रहित से जुड़े अन्य कामों पर खर्च करने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें परीक्षाओं का आयोजन, रीडिंग रूम, लाइब्रेरी, किताबों की खरीद और बाइंडिंग, अखबार व पत्रिकाओं की खरीद और खेलों का आयोजन शामिल हैं।
भविष्य में विद्यार्थी निधि के अन्य मदों में ही फीस
आदेश में यह भी कहा गया है कि आगे से छात्रसंघ मद में फीस लेने के बजाय विद्यार्थी निधि के अन्य मदों में फीस ली जाए और उसका उपयोग उन्हीं मदों में किया जाए।
क्यों उठ रहा है सवाल
आयुक्तालय के इस आदेश को छात्रसंघ चुनाव के प्रति सरकार के रुख का संकेत माना जा रहा है। चुनाव कराने के लिए फीस वसूली का प्रावधान ही हटा दिया गया है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि सरकार इस साल चुनाव कराने के मूड में नहीं है। हालांकि आदेश में चुनावों पर रोक का सीधा उल्लेख नहीं है और सरकार की ओर से भी इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
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2019 की अधिसूचना में क्या था प्रावधान
छात्रों से वसूले जाने वाले शुल्क को लेकर 2019 में सरकार ने एक अधिसूचना जारी की थी। इसमें अलग-अलग मदों में ली जाने वाली फीस और उसके उपयोग को निर्धारित किया गया था। इसके अनुसार परीक्षा, रीडिंग रूम और मैगजीन, गेम्स, छात्रसंघ और कॉलेज डवलपमेंट जैसे मदों में फीस ली जा सकती थी, और जिस मद में राशि वसूली जाए, उसे उसी में खर्च करना होता था। छात्रसंघ के नाम से ली जाने वाली फीस छात्रसंघ चुनाव से जुड़ी स्टेशनरी और अन्य खर्चों तथा छात्रसंघ की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में खर्च की जाती थी। अब आयुक्तालय के निर्देशानुसार इस मद में फीस नहीं ली जाएगी।
छात्र संगठनों की मांग बनाम सरकार का रुख
एक ओर छात्र संगठन चुनाव बहाली की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, दूसरी ओर आयुक्तालय का यह आदेश उनकी उम्मीदों को झटका देने वाला माना जा रहा है। अब नजर इस पर है कि सरकार चुनाव को लेकर अपना रुख कब और कैसे स्पष्ट करती है।