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निकाय चुनाव के बाद शुरू हुई असल सियासत... कौन किस पाले में, बोर्ड बनाने की जुगत में कहां क्या चल रहा?

Wed, 16 Sep 2026 01:10 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Wed, 16 Sep 2026 01:10 PM IST
सार

राजस्थान निकाय चुनाव के बाद बोर्ड गठन की सियासत तेज है। खैरथल में कांग्रेस के 11 पार्षद भाजपा में शामिल हुए, जबकि कई निकायों में निर्दलीय निर्णायक बने हैं।

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Rajasthan Civic Polls: Political Equations Shift After Results, 11 Congress Councillors Join BJP in Khairthal
राजस्थान निकाय चुनाव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान में निकाय चुनाव के नतीजे आने के बाद अब शहरों की सरकार बनाने की सियासत तेज हो गई है। कई निकायों में भाजपा और कांग्रेस बहुमत से दूर हैं, जबकि निर्दलीय पार्षदों ने कई जगह सत्ता की चाबी अपने हाथ में ले ली है। कुछ जगह चुनाव नतीजों के तुरंत बाद पार्षदों के पाला बदलने से समीकरण बदल गए हैं। भरतपुर और हनुमानगढ़ में निर्दलीय पार्षद अपने दम पर बहुमत के पार हैं, जबकि जोधपुर, अजमेर, पाली, अलवर, दौसा, डीडवाना, पोकरण, खाटूश्यामजी और सलूम्बर में बोर्ड गठन का गणित निर्दलीयों के इर्द-गिर्द घूम रहा है।

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राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस से ज्यादा वार्ड जीते हैं, लेकिन बोर्ड गठन के लिए केवल वार्डों की कुल संख्या काफी नहीं है। कई निकायों में स्थानीय समीकरण, निर्दलीय पार्षद और चुनाव के बाद होने वाले राजनीतिक बदलाव अब निर्णायक भूमिका में हैं।

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खैरथल में 11 पार्षदों के भाजपा के साथ जाने का दावा

खैरथल नगर परिषद के 45 वार्डों में कांग्रेस 20 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। भाजपा को आठ और निर्दलीयों को 17 सीटें मिलीं। बहुमत का आंकड़ा 23 है। ऐसे में किसी भी दल के लिए बोर्ड बनाना आसान नहीं था।

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नतीजों के बाद कांग्रेस नेता विक्रम चौधरी के साथ 11 समर्थक पार्षदों के भाजपा खेमे में जाने की खबर सामने आई। बताया गया कि चौधरी अपने समर्थक पार्षदों के साथ केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर पहुंचे और भाजपा में शामिल हुए। यदि यह संख्या बरकरार रहती है तो भाजपा का आंकड़ा 19 तक पहुंचता है। इसके बावजूद वह बहुमत से चार सीट दूर रहेगी और बोर्ड बनाने के लिए उसे दूसरे पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा।

यानी जिस खैरथल में कांग्रेस 20 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, वहां चुनाव के अगले ही चरण में भाजपा के पक्ष में संख्या बल बदलने की चर्चा ने पूरी तस्वीर उलट दी है।

बूंदी में तीन निर्दलीय भाजपा के साथ, बहुमत का आंकड़ा पार

बूंदी नगर परिषद में भाजपा 29 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। कांग्रेस को 20 और निर्दलीयों को 11 सीटें मिली थीं। 60 सदस्यीय परिषद में बहुमत के लिए 31 पार्षद चाहिए।

नतीजों के कुछ ही घंटे बाद तीन निर्दलीय पार्षद प्रभात देवी, आत्माराम चोपदार और विशाल शर्मा भाजपा खेमे में चले गए। इससे भाजपा का आंकड़ा 32 हो गया और बोर्ड गठन के लिए जरूरी बहुमत उसके पास आ गया। बूंदी का घटनाक्रम इस बात का बड़ा उदाहरण है कि कई निकायों में चुनाव परिणाम आने के बाद भी सत्ता का अंतिम गणित उसी समय तय नहीं हुआ।

भरतपुर में 36 निर्दलीय,  

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में इस बार सबसे अलग तस्वीर सामने आई है। 65 सदस्यीय नगर निगम में निर्दलीयों ने 36 वार्ड जीत लिए। भाजपा को 20 और कांग्रेस को सात सीटें मिलीं। बहुमत का आंकड़ा 33 है। यानी निर्दलीय पार्षद अकेले ही बहुमत से आगे हैं।

यही वजह है कि अब भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजर निर्दलीयों पर है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक दोनों प्रमुख दल निर्दलीयों से संपर्क साध रहे हैं और कुछ निर्दलीय पार्षदों के सार्वजनिक रूप से सामने न आने से सियासी हलचल और बढ़ गई है। भरतपुर में मेयर का चुनाव 21 सितंबर को होना है। भरतपुर का गणित इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां किसी एक बड़े दल को निर्दलीयों के समर्थन के बिना बोर्ड बनाने की स्थिति नहीं है। लेकिन भाजपा ने अपना बोर्ड बनाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।

हनुमानगढ़ में भी निर्दलीय बहुमत के पार

भरतपुर अकेला ऐसा निकाय नहीं है जहां निर्दलीयों ने अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा पार किया है। हनुमानगढ़ नगर परिषद के 60 वार्डों में निर्दलीयों ने 32 सीटें जीती हैं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 31 है। भाजपा को 15 और कांग्रेस को 10 सीटें मिलीं। इस तरह हनुमानगढ़ में भी निर्दलीय पार्षद किसी एक दल के समर्थन के मोहताज नहीं हैं और अपने दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति में हैं।

जोधपुर में 44-44 पर भाजपा-कांग्रेस, 10 निर्दलीयों पर निगाह

जोधपुर नगर निगम में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला बराबरी पर अटक गया है। दोनों दलों ने 44-44 वार्ड जीते हैं। 10 सीटें निर्दलीयों के खाते में गई हैं और एक सीट आरएलपी को मिली है। बहुमत के लिए 51 पार्षद चाहिए।

एक वार्ड में ईवीएम तकनीकी खराबी के कारण दोबारा मतदान होना है, इसलिए अंतिम गणित में बदलाव की संभावना भी बनी हुई है। फिलहाल दोनों प्रमुख दल बहुमत से सात सीट दूर हैं और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका यहां सीधे तौर पर निर्णायक है। जोधपुर में अब भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने स्तर पर निर्दलीयों से संपर्क साध रहे हैं। ऐसे में महापौर की कुर्सी का फैसला पार्टी के प्रदर्शन से ज्यादा पोस्ट-पोल समर्थन पर निर्भर हो गया है।

अजमेर में 36 साल बाद कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी, फिर भी बहुमत से दूर

अजमेर नगर निगम में कांग्रेस ने 37 वार्ड जीतकर करीब 36 साल बाद बड़ी वापसी की है। भाजपा को 32 और निर्दलीय/अन्य उम्मीदवारों को 11 सीटें मिली हैं। 80 सदस्यीय निगम में बहुमत के लिए 41 पार्षद चाहिए। कांग्रेस को बहुमत तक पहुंचने के लिए निर्दलीयों का समर्थन चाहिए। ताजा घटनाक्रम में कांग्रेस ने पांच निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया है और उनके साथ तस्वीरें भी सामने आई हैं। भाजपा ने फिलहाल अपने पत्ते सार्वजनिक नहीं किए हैं। यानी अजमेर में चुनाव का पहला चरण कांग्रेस की बढ़त के साथ खत्म हुआ, लेकिन बोर्ड गठन की अंतिम बाजी अभी बाकी है।

पाली में कांग्रेस आगे, लेकिन चाबी निर्दलीयों के हाथ

नई बनी पाली नगर निगम में कांग्रेस 29 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी पार्टी है। भाजपा को 21 और निर्दलीयों को 15 सीटें मिली हैं। बहुमत का आंकड़ा 33 है। कांग्रेस को बहुमत के लिए कम से कम चार पार्षदों का समर्थन चाहिए। इसी बीच मारवाड़ जंक्शन नगरपालिका में चुनाव परिणाम के अगले ही दिन एक निर्दलीय पार्षद अबरार खान मेव की अचानक मौत हो गई। यहां भाजपा और कांग्रेस ने 11-11 वार्ड जीते थे और तीन सीटें निर्दलीयों के खाते में थीं। अबरार खान के निधन के बाद शेष निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से बोर्ड गठन का गणित और महत्वपूर्ण हो गया है। उनके निधन के कारण वार्ड सात में उपचुनाव भी होगा।

अलवर में भी निर्दलीय तय करेंगे बोर्ड का रास्ता

अलवर नगर निगम में भाजपा 28 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है। कांग्रेस के खाते में 23 और निर्दलीयों के खाते में 14 वार्ड गए हैं। 65 सदस्यीय निगम में बहुमत के लिए 33 पार्षद चाहिए। ऐसे में भाजपा को बहुमत के लिए पांच और कांग्रेस को 10 पार्षदों के समर्थन की जरूरत होगी। दोनों दलों के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन इसलिए महत्वपूर्ण है।

दौसा और डीडवाना में भी जोड़तोड़ की गुंजाइश

दौसा में कांग्रेस ने 24 वार्ड जीते, भाजपा के खाते में 17 और निर्दलीयों के खाते में 14 सीटें आईं। 55 सदस्यीय निकाय में बहुमत का आंकड़ा 29 है। कांग्रेस को बहुमत के लिए पांच पार्षदों का समर्थन चाहिए। डीडवाना में कांग्रेस 16 सीटों के साथ आगे है, निर्दलीयों ने 14 और भाजपा ने नौ सीटें जीती हैं। यहां 21 का बहुमत आंकड़ा है। कांग्रेस को पांच अतिरिक्त पार्षदों की जरूरत होगी। दोनों जगह निर्दलीयों का रुख बोर्ड गठन के लिए महत्वपूर्ण है।

पोकरण और खाटूश्यामजी में भी फंसा गणित

पोकरण नगरपालिका में कांग्रेस को 12 और भाजपा को 11 वार्ड मिले हैं। दो सीटों पर निर्दलीय जीते हैं। 25 सदस्यीय निकाय में बहुमत के लिए 13 सीटें चाहिए। ऐसे में एक निर्दलीय का समर्थन भी समीकरण बदल सकता है। खाटूश्यामजी नगरपालिका में भाजपा और कांग्रेस को आठ-आठ सीटें मिली हैं। तीन निर्दलीय और एक अन्य दल का पार्षद शेष सीटों पर हैं। यहां भी बोर्ड गठन के लिए दोनों प्रमुख दलों को दूसरे पार्षदों का साथ चाहिए।

सलूम्बर में भाजपा आगे, लेकिन बहुमत नहीं

सलूम्बर नगर परिषद में भाजपा ने 12 और कांग्रेस ने 11 वार्ड जीते हैं। एक सीट निर्दलीय और एक अन्य दल के खाते में गई है। 25 सदस्यीय परिषद में भाजपा को बहुमत के लिए 13 पार्षद चाहिए। यानी यहां भी एक अतिरिक्त समर्थन बोर्ड गठन की तस्वीर बदल सकता है।

बाड़मेर में भाजपा को बहुमत, दो निर्दलीयों का समर्थन

पश्चिमी राजस्थान में कई निकायों में तस्वीर अपेक्षाकृत साफ है। बाड़मेर नगर परिषद के 55 वार्डों में भाजपा ने 29 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया है। दो निर्दलीयों ने भी भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की है। चौहटन में भाजपा ने 20 में से 11 वार्ड जीते, जबकि नौ निर्दलीय जीते। बालोतरा जिले के सात निकायों में भाजपा ने कुल 185 में से 105 वार्ड जीते हैं। जैसलमेर नगर परिषद में भी भाजपा ने 45 में से 25 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल किया। हालांकि पोकरण में मुकाबला बेहद करीबी रहा।

नीमराणा में हिरासत पर हंगामा, विधायक ने उठाए सवाल

बहरोड़ जिले के नीमराणा में बोर्ड गठन से पहले ही सियासी तनाव बढ़ गया। प्रतापसिंहपुरा वार्ड नंबर पांच से निर्वाचित पार्षद सुमन देवी के प्रतिनिधि चंदन सैनी को पुलिस ने हाईवे स्थित आयुष होटल से हिरासत में लिया। पुलिस के मुताबिक उसे सूचना मिली थी कि होटल में हरियाणा नंबर की गाड़ी से रुपये लाकर प्रत्याशियों के बीच बांटे जाने की बात है। पुलिस ने होटल पहुंचकर जांच शुरू की और सीसीटीवी फुटेज खंगाले। रुपये बांटे जाने की बात की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

हिरासत की खबर फैलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण नीमराणा थाने पहुंच गए और पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। मामले में मुंडावर विधायक ललित यादव भी थाने पहुंचे। उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया। पुलिस की जांच और विधायक के आरोप दोनों को फिलहाल अलग-अलग दावों के तौर पर देखा जा रहा है।

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सिर्फ निर्दलीय ही नहीं, पाला बदलने वालों पर भी नजर

इन चुनावों में सबसे बड़ा पैटर्न यह सामने आया है कि बोर्ड गठन का खेल कई जगह चुनाव परिणाम घोषित होते ही शुरू हो गया। बूंदी में तीन निर्दलीयों के भाजपा के साथ आने से बहुमत का आंकड़ा पार हो गया। खैरथल में कांग्रेस के 11 पार्षदों के भाजपा के साथ जाने की खबर ने भी यही संकेत दिया है कि कई निकायों में चुनाव परिणाम और बोर्ड गठन के बीच राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल सकते हैं।

भाजपा ने चुनाव परिणाम से पहले ही कई जगह अपने उम्मीदवारों को कैंप में रखने की रणनीति अपनाई थी। पार्टी ने इसे प्रशिक्षण और एकजुट रखने की कवायद बताया था, जबकि राजनीतिक तौर पर इसे चुनाव के बाद होने वाले संभावित क्रॉस-वोटिंग और पाला बदलने से जोड़कर देखा गया।

 

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