Anta Bypoll:बिछ गई जातियों की जाजम; भाजपा ने मीणा, माली और धाकड़ समाज के कार्यकर्ताओं को प्रदेशभर से बुलाया
11 नवंबर को होने वाले चुनाव में भाजपा ने मीणा, माली और धाकड़ समाज के कार्यकर्ताओं को प्रदेशभर से बुलाया। कांग्रेस भी 150 नेताओं के साथ सक्रिय।
विस्तार
राजस्थान की एक मात्र उपचुनाव वाली सीट अंता में सियसी घमासान चरम पर है। आगामी 11 नवंबर को मतदान होगा। भाजपा और कांग्रेस चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक चुके हैं। दोनों पार्टियों के संगठन सीट के माइक्रो मैनेजमेंट को लेकर अपनी-अपनी रणनीति के पैंतरे आजमा रहे हैं। लेकिन अब यहां प्रत्याशी और पार्टियों के आगे जातियों की जाजम बिछ गई है। बीजेपी ने ने मीणा, माली और धाकड़ समाज के कार्यकर्ताओं को प्रदेशभर से बुलाया है। वहीं कांग्रेस ने भी नामांकन रैली में अपनी ताकत दिखाते हुए इस बात के संकेत पहले ही दे दिए हैं कि इस सीट को जीतने के लिए वह हर दांव आजमाएगी।
त्रिकोणीय मुकाबले के संकेत
भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधे मुकाबले के बीच अब निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा के उतरने से यह चुनाव त्रिकोणीय हो गया है। जातीय समीकरणों के साथ उनके साथ जुड़ी युवाओं की बड़ी टीम दोनों दलों की रणनीतियों को चुनौती दे सकती है। ऐसे में वोटों के बंटवारे की संभावना भी बढ़ गई है।
कांग्रेस की रणनीति: संगठन और जातीय संतुलन पर फोकस
(साभार: कांग्रेस सोशल मीडिया)
कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार के समर्थन में प्रदेश स्तर से लेकर ब्लॉक स्तर तक नेताओं और कार्यकर्ताओं की सूची तैयार की है। पार्टी ने करीब 150 नेताओं और कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारने की तैयारी कर ली है।
- नेताओं की तैनाती: 25 अक्टूबर के बाद कांग्रेस के प्रदेश संगठन से बड़े नेता, पदाधिकारी और वॉर रूम टीम अंता पहुंचेंगे।
- जातीय समीकरण: पार्टी विभिन्न जातियों के नेताओं को उन क्षेत्रों में भेजेगी जहां उनके समुदाय का प्रभाव अधिक है, ताकि वोटों का ध्रुवीकरण अपने पक्ष में किया जा सके।
- मैनेजमेंट प्लान: कांग्रेस ने बूथ स्तर तक एक समानांतर वॉर रूम तैयार किया है, जो प्रत्याशी के स्थानीय मैनेजमेंट के साथ मिलकर काम करेगा।
भाजपा की रणनीति: बूथ से सोशल मीडिया तक फुल कंट्रोल
(साभार: बीजेपी सोशल मीडिया)
भाजपा ने भी अंता उपचुनाव के लिए अपना बूथ मैनेजमेंट और डिजिटल कैंपेन पूरी तरह सक्रिय कर दिया है।
- ऑनलाइन मीटिंग्स: प्रदेश अध्यक्ष द्वारा अंता के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ कई ऑनलाइन मीटिंग्स हो चुकी हैं। हर बूथ की स्थिति का विश्लेषण किया गया है ताकि कोई भी बूथ ‘कमजोर’ न रहे।
-आईटी और सोशल मीडिया टीम: पार्टी की आईटी सेल लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय है। भाजपा का मकसद है कि अपने प्रत्याशी को अग्रिम पंक्ति में दिखाया जाए और विपक्ष की गतिविधियों पर नजर रखी जाए।
- जातीय मैनेजमेंट: भाजपा ने मीणा, माली और धाकड़ समाज के कार्यकर्ताओं को प्रदेशभर से बुलाया है। इन्हें अंता में अपने समुदायों के बीच प्रचार के लिए भेजा जा रहा है।
11 नवंबर को वोटों का घमासान तय
दोनों प्रमुख दलों के साथ निर्दलीय उम्मीदवार के उतरने से अंता सीट का चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया है। भाजपा और कांग्रेस ने अपने शीर्ष नेताओं को मैदान में उतारने की तैयारियां तेज कर दी हैं, जबकि निर्दलीय नरेश मीणा की सक्रियता ने मुकाबले को और रोमांचक बना दिया है।
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