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Rajasthan Bypoll: 'भावनाओं को समझो' खींवसर जीत जाओगे...हनुमान, ज्योति, रेवतराम में कुछ अलग है इस बार मुकाबला
Mon, 04 Nov 2024 01:27 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Mon, 04 Nov 2024 01:27 PM IST
सार
हनुमान बेनीवाल, ज्योति मिर्धा और रिछपाल मिर्धा से लेकर रेवतराम डांगा तक सभी वोटरों की सहानुभूति मांग रहे हैं। इधर, बीजेपी ने अपने कैंपेन में सेंधमारी का तड़का भी लगा दिया है।
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खींवसर उपचुनाव 2024
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
त्योहारी सीजन के बाद आज से राजस्थान में फिर से उपचुनावों की रंगत नजर आने लगी है। स्थानीय भाषा में इसे चुनाव मढ़ना कहा जाता है। सबसे रोचक चुनाव इस वक्त खींवसर सीट पर हो रहा है। जाट हार्टलैंड की यह सीट नेताओं की आक्रामक शैली के लिए जानी जाती है। लेकिन इस बार सभी नेता यहां रिक्वेस्टिंग मोड में हैं। वोटर कह रहे हैं कि ऐसा चुनाव यहां पहली बार देखने को मिल रहा है।
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खींवसर की जमीन पर अभी वे सभी नेता चुनावी दंगल में हैं, जो अपनी फायर ब्रांड शैली के लिए जाने जाते हैं। लेकिन इस बार यहां का पूरा चुनाव ही बेहद अलग अंदाज में नजर आ रहा है। आरोप-प्रत्यारोप से इतर यहां सियासी तंज और भावुक अपीलें हो रही हैं। हनुमान बेनीवाल, ज्योति मिर्धा और रिछपाल मिर्धा से लेकर रेवतराम डांगा तक सभी वोटरों की सहानुभूति मांग रहे हैं। इधर, बीजेपी ने अपने कैंपेन में सेंधमारी का तड़का भी लगा दिया है। खींवसर विधानसभा उपचुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी को लगा झटका देते हुए नागौर के कांग्रेस जिलाध्यक्ष रह चुके सुखबीर सिंह चौधरी को भाजपा ज्वाइन करवाई।
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भावुक अपील से क्या किला बचा पाएंगे हनुमान
खींवसर हनुमान के लिए सिर्फ विधानसभा सीट भर नहीं राजस्थान में उनके सियासी अस्तित्व के लिए यह सबसे जरूरी है। इस बार खींवसर से उनकी पत्नी कनिका बेनीवाल मैदान में हैं। हनुमान बेनीवाल ने प्रचार के दौरान कहा कि बीजेपी चुनाव जीतती है या हारती है तो इससे उस पर कोई फर्क नहीं आएगा। लेकिन इस बार अगर RLP खींवसर से चुनाव हार गई तो मेरा 20 साल का संघर्ष खत्म हो जाएगा।
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उन्होंने आगे कहा, अगर RLP विधानसभा में नहीं रही, तो मेरा 20 साल का संघर्ष चला जाएगा। लोग कहेंगे कि हनुमान 20 साल लड़ा और अंत में खींवसर की सीट भी चली गई। इसलिए आप लोग यह सुनिश्चित कर लो कि राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की जीत हो और मैं चार साल राजस्थान की सड़कों पर बजरी माफियाओं के खिलाफ लड़ता रहूं'। 47 साल पुरानी विरासत हनुमान बेनीवाल राजनीतिक घराने से आते हैं और उनकी यह विरासत 47 साल पुरानी है। बेनीवाल के पिता रामदेव बेनीवाल दो बार विधायक रहे हैं।
ज्योति का तंज: भाभी विधानसभा चली गई तो भतीजे...
बीजेपी नेता ज्योति मिर्धा भी इस बार चुनाव में अलग अंदाज में नजर आ रही हैं। एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जब मैं लोकसभा चुनाव लड़ रही थी तो हनुमान बेनीवाल ने कहा था, बाई ने फेरूं हरियाणा भेज दो म्हारा फूफोसा के फलका का फोड़ा पड़े (ज्योति मिर्धा को उनके ससुराल हरियाणा भेजने के लिए कहा कि यदि वे यहां रह गईं तो उनके पति के लिए खाना कौन बनाएगा)। ज्योति ने हनुमान के इस भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि आज बहन भी अपने भाई (हनुमान) की चिंता करती है…भाभी विधानसभा चली गई और आप लोकसभा में रह गए तो मेरे भतीजे-भतीजी का देखभाल कौन करेगा। इसलिए मैं आप लोगों से अपील करती हूं कि हनुमान तो सांसद बने हुए हैं, इसलिए विधानसभा में रेवतराम डांगा जी को भेजो।
दिव्या बोलीं- मुझे हराने की बात करते थे क्या गलती थी मेरी?
वहीं, कांग्रेस नेता दिव्या मदेरणा ने भी हनुमान बेनीवाल पर निशाना साध रखा है। दिव्या मदेरणा ने लोहावट में एक कार्यक्रम के दौरान बिना नाम लिए हनुमान बेनीवाल पर बड़ा तंज कसते हुए खींवसर की जनता को बड़ा मैसेज भी दे दिया है। मदेरणा ने कहा कि मुझे हराने की बात करते थे। सवाल पूछते हुए दिव्या मदेरणा ने कहा कि क्या मैं समाज की बेटी नहीं हूं, क्या गुनाह था मेरा, क्या गलती थी मेरी? मदेरणा ने कहा कि आज क्या हालत हैं खींवसर में? सुनने में आ रहा है कि हालत टाइट है। उन्होंने कहा कि रात के चार-चार बजे घूमकर लोगों के पैर पकड़ रहे हैं।