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Jaipur : हैरिटेज महापौर के फिर से एक्टिव, क्या ठंडे बस्ते में चले गए हैं मुनेश पर लगे सारे आरोप?

Fri, 02 Aug 2024 11:32 AM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Fri, 02 Aug 2024 11:32 AM IST
सार

जयपुर हैरिटेज महापौर के फिर से एक्टिव मोड में आने से महापौर को हटाए जाने की बातें ठंडी पड़ती नजर आ रही हैं। प्रश्न यह है कि क्या महापौर को हटाने की मांग पर अड़े पार्षदों में चल रहा गतिरोध खत्म हो गया है? या फिर मामला कुछ और है।

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Jaipur: Heritage Mayor active again, have all the allegations against Munesh gone to the back burner?
राजस्थान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जयपुर हैरिटेज की महापौर आज फिर से एक्टिव नजर आई हैं। इससे महापौर को हटाए जाने को लेकर लंबे समय से चल रहा गतिरोध थमता नजर आ रहा है, लेकिन वास्तविकता क्या है यह एक बड़ा प्रश्न है।
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जानकारों की मानें तो महापौर मुनेश गुर्जर को भाजपा के दो विधायकों का संरक्षण मिला हुआ था, जिसके चलते महापौर के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति नहीं मिली और ना वो अपने पद से हटाई गईं। 
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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार महापौर की मुलाकात भाजपा के मंत्रियों से भी हुई थी, जहां से उन्हें अभयदान मिला लेकिन साथ ही उन्हें मीडिया और सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहने के निर्देश भी दिए गए थे, यही कारण था कि महापौर ने मीडिया से दूरी बना रखी थी। परंतु बरसात के चलते जब जयपुर ग्रेटर की महापौर सौम्या गुर्जर सड़कों पर उतरीं तो हैरिटेज की महापौर कैसे पीछे रहतीं, वो भी आज से सड़कों पर स्थिति का जायजा लेते नजर आईं और अधिकारियों को निर्देश देते हुए जांच की भी बात कही। इसी के चलते सवाल उठ रहा है कि क्या महापौर के खिलाफ चल रहा विरोध थम गया है?
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दरअसल नगर निगम हैरिटेज की मेयर मुनेश गुर्जर को रिश्वतखोरी के एक प्रकरण में एसीबी ने आरोपी माना था। उन पर आरोप थे कि पट्टे जारी करने की एवज में उन्होंने लाखों रुपये की रिश्वत ली थी। लगभग 9 महीने पुराने इस प्रकरण में एसीबी ने मेयर मुनेश गुर्जर को आरोपी माना और अब मुनेश के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार से अभियोजन स्वीकृति की मांग की थी। मेयर के घर से तलाशी में एसीबी को पट्टे की फाइल मिली थी, साथ ही 40 लाख रुपये भी मिले थे।


जिसके बाद से भाजपा और कांग्रेस के पार्षद लगातार मेयर को हटाने की मांग करते रहे हैं। दोनों पार्टियों के पार्षद बीजेपी के नेताओं से मिले पर कोई नतीजा नहीं निकला। इस घटनाक्रम के चलते मेयर ने मीडिया और कामकाज से दूरी बना रखी थी, परंतु आज मेयर द्वारा क्षेत्र का दौरा करके अधिकारियों को निर्देश देने और घोषणाएं करने से सवाल यह खड़ा होता है कि क्या महापौर और सरकार के बीच सबकुछ ठीक हो चुका है? क्या पार्षदों की मांग को नजरअंदाज कर दिया गया है और मुनेश गुर्जर शेष समय तक अपनी कुर्सी पर बनी रहेंगी?
 
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