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अच्छी खबर: अलवर-भरतपुर में शुरू होगा समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, तीन साल तक के बच्चों पर विशेष फोकस
Sun, 30 Aug 2026 03:27 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Sun, 30 Aug 2026 03:27 PM IST
सार
राजस्थान में समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम अलवर और भरतपुर में पायलट आधार पर शुरू होगा। जन्म से तीन साल तक बच्चों की सेहत, पोषण और विकास की निगरानी होगी। जोखिम वाले बच्चों की पहचान कर घर पर फॉलोअप और जरूरत पर इलाज कराया जाएगा।
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सांकेतिक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान में छोटे बच्चों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने और उनके स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने के लिए समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। भारत सरकार की पहल के तहत इस कार्यक्रम को शुरुआती तौर पर अलवर और भरतपुर जिलों में पायलट आधार पर लागू किया जाएगा।
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प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि कार्यक्रम के तहत जन्म से तीन साल तक के सभी बच्चों की सेहत, पोषण और विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बच्चों की नियमित निगरानी की जाएगी और ऐसे बच्चों की समय रहते पहचान की जाएगी, जिन्हें सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक देखभाल या इलाज की जरूरत है।
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उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के तहत बच्चों को उनकी स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर जोखिम वाले और सामान्य श्रेणी में चिन्हित किया जाएगा। जोखिम वाले बच्चों का घर पर नियमित फॉलोअप किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या बड़े अस्पताल में इलाज के लिए रेफर किया जाएगा।
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गायत्री राठौड़ ने बताया कि इस पहल से बच्चों की तबीयत ज्यादा बिगड़ने से पहले ही उनकी पहचान की जा सकेगी और समय पर इलाज शुरू किया जा सकेगा। कार्यक्रम का उद्देश्य पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर को कम करने में भी मदद करना है।
बच्चों की जांच और उनकी स्थिति की नियमित निगरानी के लिए आशा कार्यकर्ताओं को ‘शैशव ऐप’ की सुविधा दी जाएगी। ऐप के माध्यम से आशा कार्यकर्ता बच्चों की जानकारी दर्ज कर सकेंगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस बच्चे को अधिक देखभाल या इलाज की जरूरत है। बच्चे को अस्पताल भेजे जाने के बाद भी उसका फॉलोअप किया जा सकेगा। जरूरत पड़ने पर ऐप के माध्यम से स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को समय पर सूचना और अलर्ट भी मिल सकेंगे।
इधर, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से महाराष्ट्र में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में एसएसबीएसके की पायलट कार्ययोजना, उसके आकलन तथा केंद्र, राज्य और सहयोगी संस्थाओं की भूमिका पर चर्चा की गई। राजस्थान की ओर से परियोजना निदेशक, बाल स्वास्थ्य डॉ. प्रदीप चौधरी ने पायलट इम्प्लीमेंटेशन प्लान और पार्टनर्स एंगेजमेंट से संबंधित पैनल चर्चा में भाग लिया तथा राजस्थान की कार्ययोजना का प्रस्तुतीकरण किया।