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भाई की बीमारी बनी तबादला रद्द होने की वजह: हाईकोर्ट ने बैंक को लगाई फटकार; कहा- नीति का पालन जरूरी

Wed, 07 Oct 2026 03:26 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: हिमांशु सिंह बघेल Updated Wed, 07 Oct 2026 03:26 PM IST
सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने थैलसीमिया से पीड़ित 75 प्रतिशत दिव्यांग भाई की देखभाल करने वाले यूको बैंक प्रबंधक का करीब 1,000 किलोमीटर दूर किया गया तबादला रद्द कर दिया। अदालत ने इसे मनमाना और अमानवीय बताते हुए कहा कि ऐसा निर्णय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन है।

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Brother Illness Justifies Transfer Cancellation High Court Rips Into Bank Rules Policy Compliance Is Mandatory
राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

राजस्थान उच्च न्यायालय ने थैलसीमिया से पीड़ित और 75 प्रतिशत स्थायी रूप से दिव्यांग भाई की देखभाल करने वाले यूको बैंक के प्रबंधक के तबादले को रद्द कर दिया है। अदालत ने बैंक की ओर से प्रबंधक को करीब 1,000 किलोमीटर दूर भेजने के आदेश को मनमाना और अमानवीय करार दिया। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बैंक कर्मचारियों की विशेष नीति और उनके आश्रितों की देखभाल के प्रावधानों की अनदेखी करके ऐसा कोई निर्णय लागू नहीं कर सकता।
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मौलिक अधिकारों का उल्लंघन
न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढंड की पीठ ने यूको बैंक के प्रबंधक राहुल अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए 16 मई को जारी तबादला आदेश को खारिज कर दिया। राहुल का स्थानांतरण जयपुर क्षेत्र की बानेटी शाखा से अहमदाबाद क्षेत्र की एक शाखा में किया गया था। अदालत ने कहा कि थैलसीमिया से पीड़ित व्यक्ति को हर 15 से 20 दिन में रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। ऐसे में देखभाल करने वाले व्यक्ति को बिना किसी उचित विचार के इतनी दूर भेजना, जहां कोई पारिवारिक सहायता या चिकित्सा सुविधा उपलब्ध न हो, अमानवीय है। यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार का उल्लंघन करता है।
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बैंक नीति के पालन की बाध्यता
अदालत के अनुसार, यूको बैंक की वर्ष 2024-27 की 'समान अवसर नीति' कोई दान नहीं, बल्कि वैधानिक दायित्व है। बैंक केवल प्रदर्शन के लिए नीति बनाकर उसके विपरीत आचरण नहीं कर सकता। इस नीति में दिव्यांगजनों और उनके देखभालकर्ताओं को नियमित या चक्रीय तबादले से छूट देने का प्रावधान है। राहुल के छोटे भाई आशीष कुमार अग्रवाल थैलसीमिया से पीड़ित हैं और 75 प्रतिशत स्थायी रूप से दिव्यांग हैं। राजस्थान सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने 19 अप्रैल 2022 को उनका दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी किया था। आशीष इलाज, दवा और वित्तीय सहायता के लिए पूरी तरह राहुल पर निर्भर हैं। बैंक ने 8 सितंबर को राहुल का अभ्यावेदन बिना ठोस कारण बताए खारिज कर दिया था, जिसे अदालत ने मनमाना और भेदभावपूर्ण माना।
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प्रशासनिक बाधाओं की सीमा
सुनवाई के दौरान यूको बैंक ने दलील दी कि 1 अप्रैल 2026 को स्केल-1 से स्केल-2 में पदोन्नति के बाद तबादला अनिवार्य था। बैंक ने यह भी कहा कि राहुल जनवरी 2018 से जयपुर क्षेत्र की बानेटी शाखा में पदस्थ हैं और लगभग आठ वर्ष बिता चुके हैं। अदालत ने कहा कि प्रशासनिक आवश्यकता का यांत्रिक बहाना बनाकर सुरक्षात्मक नीति के उद्देश्य को समाप्त नहीं किया जा सकता। उच्च न्यायालय ने 16 मई का स्थानांतरण आदेश रद्द करते हुए बैंक को निर्देश दिया कि वह राहुल को वर्तमान स्थान पर ही काम करने दे। जब तक बैंक विशेष नीति के तहत मामले पर पुनर्विचार नहीं कर लेता, तब तक राहुल बानेटी शाखा में ही तैनात रहेंगे।
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