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Rajasthan: पाबू पाठशाला का विलय होने से 61 दिव्यांग छात्रों के भविष्य पर खतरा, निदेशालय में गूंजा विरोध

Tue, 21 Jan 2025 07:41 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर Published by: अरविंद कुमार Updated Tue, 21 Jan 2025 07:41 PM IST
सार

राजस्थान के बीकानेर जिले में दिव्यांग बच्चों की शिक्षा पर संकट मंडरा रहा है। निदेशालय में अभिभावकों ने गुहार लगाई है। दरअसल, पाबू पाठशाला का विलय होने से 61 दिव्यांग छात्रों के भविष्य पर खतरा बढ़ गया है।

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Rajasthan merger of Pabu Pathshala in Bikaner threatens future of 61 disabled students
दिव्यांग बच्चे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों के लिए संचालित पाबू पाठशाला को आर्य समाज स्कूल में मर्ज करने के फैसले ने 61 दिव्यांग छात्रों के भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है। इस फैसले से चिंतित अभिभावक सोमवार को अपने बच्चों को लेकर प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय पहुंचे। जहां उन्होंने स्कूल को यथावत रखने की मांग की। लेकिन अधिकारियों के अनुपस्थित रहने के कारण वे निराश लौटने को मजबूर हो गए।

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अभिभावकों का कहना है कि दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष सुविधाओं और अनुकूल वातावरण से युक्त इस स्कूल का विलय उनके बच्चों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। इनमें से कई बच्चे ऐसी विशेष आवश्यकताओं वाले हैं, जिन्हें सामान्य स्कूलों में पढ़ाई करने में कठिनाई होगी। अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि इस फैसले को वापस लिया जाए और पाबू पाठशाला को उसकी वर्तमान स्थिति में बनाए रखा जाए। उनका कहना है कि यदि यह फैसला जल्द नहीं बदला गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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अभिभावकों का कहना था कि विशेष बच्चों को लेकर सरकारी स्कूल का रवैया भी ठीक नहीं है। वह ऐसे बच्चों को देखकर इसी स्कूल में विशेष योग्यजन बच्चों का प्रवेश करवाने को कहते हैं। यहां ध्यान देने योग्य यह बात है कि शिक्षा विभाग ने आदेश से पहले स्कूल की जमीनी हकीकत भी नहीं देखी, जिस जगह स्कूल का एकीकरण किया है। वहां रेंप शाहिद विशेष योग्यजन छात्र-छात्राओं के लिए कोई भी आधारभूत सुविधा तक नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि शिक्षा विभाग ने बिना हकीकत जान इस स्कूल का एकीकरण कर दिया।
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इसे विडंबना ही कहेंगे कि 62 छात्र-छात्राओं को लेकर ज्ञापन देने पहुंचे अभिभावकों को प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में कोई भी अधिकारी नहीं मिला, जिसके चलते इन अभिभावकों को बेरंग ही लौटना पड़ा। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस गंभीर मुद्दे पर क्या निर्णय लेता है और क्या इन दिव्यांग बच्चों को शिक्षा का अधिकार मिल पाएगा या नहीं। अब दिव्यांग बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहेगा या नहीं।

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