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Alwar News: सरिस्का की 'राजमाता' ST-2 बाघिन का स्टेच्यू जल्द बनेगा, सात लाख रुपये की आएगी लागत; जानें
Wed, 19 Mar 2025 02:27 PM IST
अलवर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
Published by: अलवर ब्यूरो
Updated Wed, 19 Mar 2025 02:27 PM IST
सार
Alwar: सरिस्का प्रशासन के अनुसार, ST-2 के योगदान को अमर बनाने के लिए यहां उसका स्टेच्यू लगाया जाएगा। डीएफओ अभिमन्यु सहारण ने बताया कि स्टेच्यू के निर्माण में करीब 7 लाख रुपये की लागत आएगी और यह मार्च के अंत तक तैयार हो जाएगा।
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राजमाता का स्टेच्यू लगेगा अब सरिस्का में
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार
अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व को फिर से बाघों से आबाद करने वाली बाघिन ST-2 की स्मृति में यहां एक भव्य स्टेच्यू स्थापित किया जाएगा। यह स्टेच्यू जयपुर में तैयार किया जा रहा है और इसके निर्माण में करीब 7 लाख रुपये खर्च होंगे। संभावना है कि यह मार्च के अंत तक बनकर तैयार हो जाएगा। इस प्रतिमा के निर्माण में बांसवाड़ा का सफेद संगमरमर और जैसलमेर का लाल पत्थर लगाया जा रहा है, जिससे यह अपनी तरह का पहला स्टेच्यू होगा।
ST-2: सरिस्का की राजमाता
बाघिन ST-2 का सरिस्का टाइगर रिजर्व में विशेष योगदान रहा है। वर्ष 2004-05 में जब सरिस्का से बाघ विलुप्त हो गए थे, तब यहां बाघों को दोबारा बसाने की योजना बनाई गई। 4 जुलाई 2008 को रणथंभौर टाइगर रिजर्व से बाघ ST-1 और बाघिन ST-2 को सरिस्का लाया गया। उस समय ST-2 की उम्र मात्र दो वर्ष थी। इसके आने के बाद धीरे-धीरे सरिस्का में बाघों की संख्या बढ़ती गई।
करीब 10 साल पहले सरिस्का प्रशासन ने ST-2 को 'राजमाता' का दर्जा दिया था। इसका कारण यह था कि बाघिन ने यहां 2010 और 2014 में कुल चार शावकों को जन्म दिया, जिनमें तीन बाघिन— ST-7, ST-8 और ST-14 तथा एक बाघ ST-13 शामिल हैं। वर्तमान में सरिस्का में 42 बाघ हैं, जिनमें से 18 बाघ-बाघिन ST-2 के परिवार से हैं।
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पढ़ें: सोए फिर सोते रह गए: बीकानेर के CRPF जवान की अजमेर में मौत, तीन महीने पहले हुए थे भर्ती; परिजन हुए बेसुध
ST-2 का निधन और अंतिम विदाई
राजमाता ST-2 का 9 जनवरी 2024 को 19 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उसकी पूंछ में संक्रमण हो गया था, जिसके चलते उसे नया पानी करनाकाबास एनक्लोजर में लाया गया और विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया। राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा भी उसके निधन पर सरिस्का पहुंचे और उन्होंने बाघिन के अंतिम दर्शन कर उसे श्रद्धांजलि अर्पित की।
ST-2 की विरासत को संजोएगा स्टेच्यू
सरिस्का प्रशासन के अनुसार, ST-2 के योगदान को अमर बनाने के लिए यहां उसका स्टेच्यू लगाया जाएगा। डीएफओ अभिमन्यु सहारण ने बताया कि स्टेच्यू के निर्माण में करीब 7 लाख रुपये की लागत आएगी और यह मार्च के अंत तक तैयार हो जाएगा। यह प्रतिमा सरिस्का के गौरवशाली इतिहास और बाघ संरक्षण की दिशा में किए गए प्रयासों की याद दिलाएगी।
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ST-2: सरिस्का की राजमाता
बाघिन ST-2 का सरिस्का टाइगर रिजर्व में विशेष योगदान रहा है। वर्ष 2004-05 में जब सरिस्का से बाघ विलुप्त हो गए थे, तब यहां बाघों को दोबारा बसाने की योजना बनाई गई। 4 जुलाई 2008 को रणथंभौर टाइगर रिजर्व से बाघ ST-1 और बाघिन ST-2 को सरिस्का लाया गया। उस समय ST-2 की उम्र मात्र दो वर्ष थी। इसके आने के बाद धीरे-धीरे सरिस्का में बाघों की संख्या बढ़ती गई।
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करीब 10 साल पहले सरिस्का प्रशासन ने ST-2 को 'राजमाता' का दर्जा दिया था। इसका कारण यह था कि बाघिन ने यहां 2010 और 2014 में कुल चार शावकों को जन्म दिया, जिनमें तीन बाघिन— ST-7, ST-8 और ST-14 तथा एक बाघ ST-13 शामिल हैं। वर्तमान में सरिस्का में 42 बाघ हैं, जिनमें से 18 बाघ-बाघिन ST-2 के परिवार से हैं।
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ST-2 का निधन और अंतिम विदाई
राजमाता ST-2 का 9 जनवरी 2024 को 19 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उसकी पूंछ में संक्रमण हो गया था, जिसके चलते उसे नया पानी करनाकाबास एनक्लोजर में लाया गया और विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया। राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा भी उसके निधन पर सरिस्का पहुंचे और उन्होंने बाघिन के अंतिम दर्शन कर उसे श्रद्धांजलि अर्पित की।
ST-2 की विरासत को संजोएगा स्टेच्यू
सरिस्का प्रशासन के अनुसार, ST-2 के योगदान को अमर बनाने के लिए यहां उसका स्टेच्यू लगाया जाएगा। डीएफओ अभिमन्यु सहारण ने बताया कि स्टेच्यू के निर्माण में करीब 7 लाख रुपये की लागत आएगी और यह मार्च के अंत तक तैयार हो जाएगा। यह प्रतिमा सरिस्का के गौरवशाली इतिहास और बाघ संरक्षण की दिशा में किए गए प्रयासों की याद दिलाएगी।