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Alwar News: आभार यात्रा पर निकले केंद्रीय जलशक्ति मंत्री शेखावत, बोले- पांच साल में पूरी करेंगे ERCP परियोजना

Sat, 24 Feb 2024 06:50 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलवर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Sat, 24 Feb 2024 06:50 PM IST
सार

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री ने 83 में से 48 विधानसभा सीटों पर कमल खिलाने के लिए जनता का धन्यवाद किया। कहा, मोदी जी ने सिखाया है जिस काम का शिलान्यास करो, उसका उद्घाटन भी करो।

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Alwar News: Jal Shakti Minister Shekhawat goes on gratitude tour in the districts of Eastern Rajasthan
मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत। - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत शनिवार को पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरसीपी) आभार यात्रा पर निकले। अलवर, भरतपुर और धौलपुर जिलों में आयोजित सभाओं में शेखावत ने जनता का आभार प्रकट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने सिखाया है कि जिस काम की परिकल्पना और शिलान्यास करो, उसका उद्घाटन भी करो। पांच साल में ईआरसीपी को पूरा कर आपके घरों तक पानी पहुंचाने के लिए हम काम करेंगे। पूर्वी राजस्थान के लिए यह संशोधित पीकेसी-ईआरसीपी परियोजना जीवनदायनी गंगा के रूप में काम करेगी।

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शेखावत ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले मैं आपके बीच में आया था। मैं चाहता था कि जो झूठ का पहाड़ पिछली गहलोत सरकार ने पांच साल में खड़ा किया था, उसे बेनकाब किया जाए। अशोक गहलोत 13 जिलों के 83 विधानसभा क्षेत्रों के साढ़े तीन करोड़ लोगों के प्यासे कंठों पर राजनीति कर रहे थे। मैंने कहा था कि भाजपा सरकार बनने के बाद में एक महीने में ईआरसीपी को धरातल पर लाएंगे। आपने भी 83 में से 48 सीटों पर कमल खिलाकर आशीर्वाद दिया। इसके लिए आप सबका अभिनंदन करता हूं। शेखावत ने कहा कि मुझसे तीन-चार दिन पहले कुछ पत्रकारों ने जयपुर में पूछा था कि ईआरसीपी तो आपने कर दिया, लेकिन यह परियोजना कब पूरी होगी? 
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मैंने उनसे कहा था कि मोदी जी ने हमें यह सिखाया है कि जिस काम की परिकल्पना और शिलान्यास हम करते हैं, उसका उद्घाटन भी हम ही करते हैं। पांच साल में इस परियोजना को पूरा कर हम घरों तक पानी पहुंचाएंगे। इस परियोजना को तत्काल धरातल पर उतारने के लिए केंद्रीय मंत्री शेखावत ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार भी जताया।
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प्रधानमंत्री ने दिखाई राह
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि गहलोत ईआरसीपी को राजनीतिक भस्मासुर की तरह खड़ा कर रहे थे। केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे थे। तब मैं प्रधानमंत्री जी के पास गया। मैंने प्रधानमंत्री जी से निवेदन किया कि तकनीकी कमी राजस्थान पूरा करता नहीं है। बार-बार हमको अपराधी बनाने के लिए झूठ बोलता है। तब प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि कहीं ठहरने की आवश्यकता नहीं है। कुछ नया सोचो और आगे बढ़ो। उन्होंने पीकेसी-ईआरसीपी की राह दिखाई। पीकेसी-ईआरसीपी को कैसे जोड़ सकते हैं? इसको लेकर रुड़की में देश भर के पानी को समझने वाले इंजीनियर को बुलाया। तब यह नया रास्ता निकाला। 

गहलोत के लिए पहले राजनीति थी 
शेखावत ने कहा कि अशोक गहलोत के लिए राजनीति पहले थी। लोगों की प्यास बुझाना उनकी प्राथमिकता नहीं थी। उन्होंने इस दिशा में किसी तरह का प्रयास नहीं किया। हमने दिल्ली में अनेक बार बैठकें आयोजित कीं। उनमें राजस्थान के अधिकारी स्वीकार करते थे कि तकनीकी खामी को यदि दूर कर दिया जाए तो निश्चित रूप से परियोजना सिरे चढ़ सकती है, लेकिन अशोक गहलोत का उद्देश्य लोगों को राहत पहुंचाना नहीं था। उनका उद्देश्य इसको एक राजनीतिक हथियार के रूप में उपयोग करना था। वो या उनके मंत्री कभी किसी भी बैठक में उपस्थित नहीं हुए। तब मैंने संकल्प किया था कि राजस्थान से कांग्रेस के कुराज को उखाड़ फेंकने के बाद एक महीने के भीतर पूर्वी राजस्थान को ईआईसीपी की सौगात देने के लिए काम करूंगा। 

कुर्सी पर बैठते ही शुरू कर दिए थे प्रयास
शेखावत ने कहा कि वर्ष 2019 में आपने दोबारा नरेंद्र मोदी जी को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने का आशीर्वाद प्रदान किया। आपकी शुभकामनाओं और आशीर्वाद से राजस्थान के बेटे को केंद्रीय जलशक्ति मंत्री बनने का सौभाग्यपूर्ण अवसर मोदी जी ने दिया। मेरे मन में एक कल्पना थी कि पूर्वी राजस्थान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण ईआरसीपी को बनाकर इन 13 जिलों के लोगों का भला किया जा सकता है। उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सकता है। यहां से पलायन को रोका जा सकता है। मैंने कुर्सी पर बैठने के साथ इस दिशा में प्रयास किया। 

भूजल स्तर फिर सुधर जाएगा
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि संशोधित पीकेसी-ईआरसीपी लिंक प्रोजेक्ट पर राजस्थान में 45,000 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 13 जिलों (नए 21 जिले) के साढ़े तीन करोड़ लोगों के घरों तक अगले 40-50 साल तक पीने का पानी निर्बाध रूप से पहुंचे, इसको हम सुनिश्चित करेंगे। इस क्षेत्र में 2.8 लाख हेक्टेयर की सिंचाई का रकबा सिंचित होगा। लगभग 30 से ज्यादा छोटे-बड़े तालाब और बांध भरेंगे। मैं वो दिन देख रहा हूं कि 5 साल में जब यह परियोजना पूरी होगी, इन सारे 13 जिलों में जमीन का पानी वापस उसे स्तर पर आ जाएगा, जो आज से 20-30 साल के स्तर पर था। 

पहले से ज्यादा मिलेगा पानी
शेखावत ने कहा कि अशोक गहलोत बार-बार कह रहे थे कि केंद्र सरकार जैसी योजना की बात कर रही है, इसमें पानी कम हो जाएगा, लेकिन मैं आपको बता दूं, जिस ईआरसीपी की परिकल्पना वसुंधरा जी ने की थी, उसमें राजस्थान को लगभग 3600 एमसीएम पानी मिलता, अब यह जो परियोजना हमने बनाई है, इसमें 3700 एमसीएम पानी मिलेगा। इसके अलावा, बाढ़ के समय में 3000 एमसीएम अतिरिक्त पानी और आ जाएगा। 13 जिलों में एक भी बांध और तालाब खाली नहीं रहेगा। 

बदल जाएगी राजस्थान की सूरत
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि मोदी जी का संकल्प है कि देश के गरीब के घर में परिवर्तन होना चाहिए। उसके घर में खुशहाली आनी चाहिए। प्रधानमंत्री जी ने जिन योजनाओं को प्रारंभ किया, आज उनका प्रभाव हमको धरातल पर दिखाई दे रहा है। पिछले 10 साल में मोदी जी के राज में 25 करोड़ लोग गरीबों के रेखा से बाहर आ गए हैं। मैं प्रधानमंत्री जी की तरफ से आप सबको भरोसा और विश्वास दिलाता हूं कि भारत सरकार किसी भी तरह की कोई कमी इसमें नहीं छोड़ेगी। प्रधानमंत्री जी के आशीर्वाद में पीकेसी-ईआरसीपी परियोजना का 90 प्रतिशत पैसा भारत सरकार देगी। केवल 10 प्रतिशत पैसा राजस्थान की सरकार को वहन करना पड़ेगा। अगले 5 साल में राजस्थान और पूर्वी राजस्थान की सूरत बदल जाएगी।


भजनलाल जी का पगफेरा अच्छा
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि राजस्थान में कहते हैं कि शादी के बाद दुल्हन का पगफेरा अच्छा हो तो परिवार में खुशियां रहती हैं। ऐसे ही राजस्थान के लिए भजनलाल शर्मा का पगफेरा अच्छा है। जिस ईआरसीपी को कांग्रेस ने लटकाकर रखा गया, भजनलाल जी के आते ही उसे लेकर राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार बीच एमओयू हो गया और हरी झंडी मिल गई। शेखावत ने कहा कि सिंचाई और पेयजल के लिए ईआरसीपी देश दूसरा बड़ा प्रोजेक्ट सिद्ध हुआ है। पहली योजना उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में केन और बेतवा पर तैयार हो रही योजना है। दोनों के हिस्से में आने वाले बुंदेलखंड में राजस्थान की तरह ही पानी की भीषण कमी है। उन्होंने कहा कि मैं झांसी में शिलान्यास कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के साथ गया था। वहां के सांसद ने कहा था कि वहां महिलाओं में एक कहावत है, कसम मर जाईया पर गगरी न फूटे, मतलब पति मर जाए, तब भी पानी का घड़ा नहीं फूटना चाहिए। वहां पानी सुहाग से ज्यादा कीमती है।

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