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Rajasthan: पाकिस्तान में धर्म और बेटियां असुरक्षित, टूरिस्ट वीजा पर भारत आए 41 हिंदू अब लौटना नहीं चाहते

Tue, 10 Jan 2023 06:49 PM IST
Ashish Kulshrestha आशीष कुलश्रेष्ठ
Updated Tue, 10 Jan 2023 06:49 PM IST
सार

पाकिस्तान से टूरिस्ट वीजा पर आए 41 हिंदू अब यहीं बसना चाहते हैं। उनका आरोप है कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत में उन्हें न तो सुरक्षा मिली है और न ही अधिकार। बेटियां और धर्म वहां सुरक्षित नहीं हैं।

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41 Hindus who came to India on tourist visa now do not want return Pakistan Rajasthan News
जयपुर की संस्था निमितेकम सोसाइटी कर रही परिवारों की मदद। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान में पाकिस्तान के सिंध प्रांत से 41 हिंदू भारत आए हैं। आए तो हैं टूरिस्ट वीजा पर, लेकिन अब लौटना नहीं चाहते। उनका कहना है कि पाकिस्तान में न तो उनका धर्म सुरक्षित है और न ही बेटियां। अब भारत सरकार से नागरिकता और रोजगार की मांग कर रहे हैं। ताकि वह बिना किसी डर के जीवनयापन कर सके। 

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जो हिंदू आए हैं, उनमें से ज्यादातर सिंध प्रांत के हैं। पाकिस्तान के सक्खर और हैदराबाद जिलों से हैं। ज्यादातर की कहानी एक-सी है। सबको अपने भविष्य की चिंता है, जो उन्हें खींचकर भारत ले आई है। अमर उजाला ने इन हिंदुओं से बातचीत की और जाना कि उन्होंने यह कदम क्यों उठाया है। पाकिस्तान के सक्खर जिले से आए ईश्वर लाल ने बताया कि वहां कुछ भी नहीं है। बच्चियों के लिए शिक्षा है ही नहीं। अगर कोई पढ़ने जाता है तो उसे कलमा पढ़ना पड़ता है। 15 साल की बच्ची अगर घर से निकलती है तो उसके घर लौटने की कोई गारंटी नहीं होती।
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इतना ही नहीं लड़के भी सुरक्षित नहीं हैं। उन्हें मार दिया जाता है और लड़कों को उठा लिया जाता है। हिंदुओं के साथ बुरा व्यवहार होता है। पुलिस-प्रशासन भी सुनवाई नहीं करता। मुस्लिमों को सब छूट है, लेकिन हमारे साथ भेदभाव होता है। 14 साल की चंदा थी तो उसे उठा लिया था। मुस्लिमों को वहां सब छूट है। हमारे लिए पानी के बर्तन नहीं होते। हाथ से पानी पीना पड़ता है। चाय के बर्तन अलग होते हैं। नाई भी हमारे बाल-दाढ़ी नहीं काटता। वहां हमें प्लॉट खरीदने की इजाजत है, पर कोई कब्जा कर लेता है। हम कुछ नहीं कर पाते। 

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मुश्किल से जान बचाकर आए हैं 
जो लौटे हैं, उनमें से ज्यादातर सिंधी बोलते हैं। ईश्वर लाल मिट्टी का काम करते हैं और गंगा का मार्ग बनाने में भागीरथ के लिए भी काम इनके ही पूर्वजों ने किया था। एक और पाकिस्तानी रायचंद ने बताया कि बड़ी मुश्किल से इज्जत बचाकर आए हैं। 16 साल का प्रकाश कहता है कि धर्म के नाम पर गाली-गलौज होती है। मारते हैं। स्कूल में टीचर कहता था कि मुसलमान नहीं बने तो पिटाई होगी। स्कूल में टॉयलेट सिर्फ हिंदुओं से साफ कराते थे। गंदे कपड़े साफ करवाते थे। 



महिलाओं की स्थिति और भी बदतर
इन 41 हिंदुओं में कई महिलाएं और बच्चियां हैं। राजपूत समाज से ताल्लुक रखने वाली अमीरा ने कहा कि वहां मजदूरी सिर्फ हिंदू महिलाओं से कराते थे। बच्ची अगर बाहर जाएगी तो उठा ले जाएंगे। न पुलिस सुनती है और न ही कोर्ट। प्रिया सात साल की थी, आज तक नहीं लौटी। लड़कियों को न पढ़ने का अधिकार है और न ही बाहर निकलने की इजाजत। हिंदुओं के लिए न कोई पुलिस है और न ही कानून। सपना और काजल नाम की लड़कियों ने भी बताया कि वहां तो घर से बाहर नहीं निकलने देते थे। 

निमितेकम सोसाइटी कर रही है मदद
इन 41 हिंदुओं को जयपुर की संस्था निमितेकम सोसाइटी मदद कर रही है। उनके रहने-खाने की व्यवस्था सोसाइटी ने ही की है। सोसाइटी के जय आहूजा ने बताया कि संस्था अब तक 12 हजार प्रवासियों की मदद की है। इनमें से पांच हजार को भारत की नागरिकता दिलवा चुके हैं।

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