खुलासा : पंजाब में हवालातियों से अमानवीय व्यवहार, कैमरे में कैद मोगा पुलिस की कारगुजारी
- सुरक्षा के नाम पर लकड़ी की काठ में फंसाई जा रहीं हवालातियों की टांगें
- सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का खुलेआम किया जा रहा है उल्लंघन
- मोगा पुलिस की कारगुजारी कैमरे में कैद, सोशल मीडिया पर हुई वायरल
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सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद भी पंजाब पुलिस हवालातियों से अमानवीय व्यवहार कर रही है। इन दिनों सोशल मीडिया पर एक फोटो और वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें आरोपियों को थाने लाकर उनके पैर हवालात में रखी लकड़ी की काठ (बेड़ी) में फंसाए हुए हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट की इस बारे में स्पष्ट गाइड लाइन है कि थाने में पूछताछ या अनुसंधान के दौरान किसी भी विचाराधीन कैदी या हवालाती को शारीरिक दंड न दिया जाए। इसके बावजूद पंजाब पुलिस काठ में पैर फंसाकर उन्हें दर्द से तड़पने को मजबूर कर रही है। यह फोटो और वीडियो मोगा पुलिस का बताया जा रहा है।
पूछने पर देते हैं सुरक्षा का हवाला
थाना सिटी वन व थाना सिटी साउथ के प्रभारी से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने सुरक्षा का हवाला देते हुए बताया कि फोर्स कम है और सुरक्षा प्रबंधों के मद्देनजर मजबूरी में ऐसा करना पड़ता है। यानी वे भी मान रहे हैं कि यह फोटो और वीडियो मोगा पुलिस का ही है। जानकारी के अनुसार, मोगा के एक समाजसेवी ने हिम्मत दिखाते हुए थाना सिटी वन में बंद कुछ हवालातियों का अपने मोबाइल से यह वीडियो क्लिप बनाया है और उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया है।
न ढंग का थाना भवन, न हवालात
काबिलेगौर है कि थाना सिटी साउथ पुलिस के पास न अच्छा थाना भवन है, न हवालात। ऐसे में कैदियों की सुरक्षा राम भरोसे हैं। यहां सुरक्षा के मद्देनजर हवालातियों के पैर काठ (बेड़ी) में फंसाना पुलिस की मजबूरी मानी जा सकती है। लेकिन मॉडल सिटी थाना वन में तो सब प्रबंध पुख्ता है। अगर वहां भी हवालातियों के पैर लकड़ी की काठ (बेड़ी) में लॉक किए जा रहे हैं तो यह अमानवीय प्रताड़ना की श्रेणी में आता है, जो सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का खुला उल्लंघन है।
मामला अभी मेरे ध्यान में नहीं आया है। यदि ऐसा है तो जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। - जगतप्रीत सिंह, एसपी (डी) मोगा