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Hindi News ›   Punjab ›   Standoff over appointment of Punjab-Haryana High Court Chief Justice

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट चीफ जस्टिस नियुक्ति पर टकराव: आप ने केंद्र पर बोला हमला, कहा- हमारी राय नहीं ली गई

Sun, 06 Sep 2026 03:58 PM IST
शाहिल शर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर Published by: शाहिल शर्मा Updated Sun, 06 Sep 2026 03:58 PM IST
सार

मंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति संवेदनशील संवैधानिक मामला है। उनके अनुसार, नियुक्ति प्रक्रिया में संबंधित राज्य सरकार के व्यू और सहमति को लेकर निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था। उ

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Standoff over appointment of Punjab-Haryana High Court Chief Justice
हरपाल चीमा, पंजाब के वित्त मंत्री - फोटो : संवाद

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस के रूप में जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति को लेकर पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार और केंद्र के बीच टकराव के संकेत मिले हैं। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने जालंधर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसमें संबंधित राज्य सरकार की राय और सहमति लेने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। 

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हालिया घटनाक्रम में केंद्र सरकार ने 5 सितंबर 2026 को जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में नियुक्ति अधिसूचित की। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 6 अगस्त को उनके नाम की सिफारिश की थी। जस्टिस मिश्रा जून 2026 से हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस के तौर पर कार्यरत थे। चीमा के बयान के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रविवार को शाम 4 बजे कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई है। बैठक में नियुक्ति की प्रक्रिया और राज्य सरकार की भूमिका को लेकर चर्चा किए जाने की बात कही गई है।
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चीमा का दावा-स्टैंडर्ड प्रोसीजर फॉलो नहीं किया गया
मंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति संवेदनशील संवैधानिक मामला है। उनके अनुसार, नियुक्ति प्रक्रिया में संबंधित राज्य सरकार के व्यू और सहमति को लेकर निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति के मामले में इस प्रक्रिया को नजरअंदाज किया गया। चीमा ने इसे पंजाब और पंजाबियों की अनदेखी से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर सवाल उठाए।
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वित्त मंत्री ने जस्टिस जीएस संधावालिया की नियुक्ति का उदाहरण देते हुए केंद्र और मध्य प्रदेश की तत्कालीन भाजपा सरकार की भूमिका पर सवाल उठाया। चीमा के अनुसार, 11 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस जीएस संधावालिया को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश की थी। बाद में सितंबर 2024 में कॉलेजियम ने उनकी नियुक्ति हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में करने की सिफारिश की। उपलब्ध न्यायिक रिपोर्टों के मुताबिक, जुलाई की सिफारिश के बाद कॉलेजियम ने सितंबर में अपनी सिफारिश बदल दी थी। चीमा ने दावा किया कि मध्य प्रदेश में उनकी नियुक्ति को दो महीने से अधिक समय तक मंजूरी नहीं दी गई और इसी तुलना के आधार पर उन्होंने केंद्र सरकार की मौजूदा प्रक्रिया पर सवाल उठाया।

चीमा का आरोप है कि जब पत्रों में राज्य सरकार की राय से जुड़ी प्रक्रिया का उल्लेख था, तो इसके बावजूद जस्टिस मिश्रा की नियुक्ति में राज्य सरकार को विश्वास में नहीं लिया गया। वित्त मंत्री ने कहा कि एक निर्वाचित मुख्यमंत्री, जिसे पंजाब की जनता ने चुना है, उसकी राय और सहमति को नजरअंदाज किया जाना गंभीर विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का रवैया पंजाब के प्रति भेदभावपूर्ण है।

चीमा ने इसे केवल मुख्यमंत्री भगवंत मान का मामला नहीं बताते हुए कहा कि इससे राज्य के अधिकारों और संघीय ढांचे को लेकर बड़ा सवाल खड़ा होता है। उन्होंने संविधान और राज्यों के अधिकारों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार पर हस्तक्षेप का आरोप लगाया।

सिर्फ दो हफ्ते में फैसला
चीमा ने जस्टिस संधावालिया और जस्टिस मिश्रा के मामलों की तुलना करते हुए कहा कि एक ओर संधावालिया की नियुक्ति को लेकर दो महीने से अधिक समय तक निर्णय लंबित रहा, जबकि दूसरी ओर जस्टिस मिश्रा के मामले में कम समय में नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर दी गई। उन्होंने कहा कि इसी अंतर को लेकर पंजाब सरकार सवाल उठा रही है और कैबिनेट की बैठक में पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

पंजाब सरकार के विरोध के बाद यह मामला केवल न्यायिक नियुक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि केंद्र-राज्य संबंध और संघीय ढांचे से जुड़े राजनीतिक विवाद का रूप लेता दिख रहा है। अब सबकी नजर मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक पर है, जहां सरकार आगे की रणनीति पर विचार करेगी। उधर, जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति का घटनाक्रम सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद आगे बढ़ा। वे जून 2026 से पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस के रूप में कार्यरत थे।
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