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Punjab: बेसहारा पशुओं की बढ़ती संख्या ले रही जान, बाइक पशु से टकराई, सवार की मौत
Sun, 01 Sep 2024 05:11 PM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, अबोहर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, अबोहर (पंजाब)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sun, 01 Sep 2024 05:11 PM IST
सार
घटना की सूचना मिलते ही सड़क सुरक्षा फोर्स के एएसआई कृष्ण लाल मौके पर पहुंचे और प्राथमिक उपचार देते हुए उसे सरकारी अस्पताल दाखिल करवाया, जहां डाॅक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पंजाब के अबोहर क्षेत्र में बेसहारा पशुओं की बढ़ती संख्या अब जानलेवा होने लगी है। शनिवार की रात अबोहर के गांव दुतारांवाली निवासी एक व्यक्ति की पशु की टक्कर से मौत हो गई। जिसके शव को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल में रखवाया गया।
जानकारी के अनुसार गांव दुतारांवाली निवासी रामकमल (43) बाइक पर सवार होकर शहर से गांव की ओर जा रहा था। जब वह गांव के पास पहुंचा तो सड़क पर अचानक आए पशु से उसके बाइक की टक्कर हो गई, जिससे वह सड़क पर गिरकर बुरी तरह से घायल हो गया। उसे सरकारी अस्पताल दाखिल करवाया, जहां डाॅक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पता चला है कि मृतक दो बच्चों का पिता था और अब परिवार में बूढे मां-बाप के अलावा कोई कमाने वाला नहीं रहा। इस दौरान घटना स्थल पर पहुंचे लोगों का कहना था कि इन दिनों गांवों में सड़कों पर मंडराने वाले पशुओं संख्या विकराल हो चुकी है। लेकिन प्रशासन हाथ पर हाथ धरे हुए बैठा है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष ही काउ सैस के नाम से प्रशासन के पास करोड़ों रुपये जमा होते हैं। जिन्हें दूसरे कार्यों पर खर्च करते हुए इन बेसहारा पशुओं का कोई प्रबंध नहीं किया जाता।
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जानकारी के अनुसार गांव दुतारांवाली निवासी रामकमल (43) बाइक पर सवार होकर शहर से गांव की ओर जा रहा था। जब वह गांव के पास पहुंचा तो सड़क पर अचानक आए पशु से उसके बाइक की टक्कर हो गई, जिससे वह सड़क पर गिरकर बुरी तरह से घायल हो गया। उसे सरकारी अस्पताल दाखिल करवाया, जहां डाॅक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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पता चला है कि मृतक दो बच्चों का पिता था और अब परिवार में बूढे मां-बाप के अलावा कोई कमाने वाला नहीं रहा। इस दौरान घटना स्थल पर पहुंचे लोगों का कहना था कि इन दिनों गांवों में सड़कों पर मंडराने वाले पशुओं संख्या विकराल हो चुकी है। लेकिन प्रशासन हाथ पर हाथ धरे हुए बैठा है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष ही काउ सैस के नाम से प्रशासन के पास करोड़ों रुपये जमा होते हैं। जिन्हें दूसरे कार्यों पर खर्च करते हुए इन बेसहारा पशुओं का कोई प्रबंध नहीं किया जाता।
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