पंजाब: मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर आम आदमी पार्टी में घमासान शुरू, भगवंत मान गुट ने पार्टी पर दबाव बढ़ाया
रूपिंदर कौर रूबी आम आदमी पार्टी को छोड़ने वाली छठवीं विधायक हैं। इस प्रकार आम आदमी पार्टी जो विधानसभा चुनाव में दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरी थी, अब विधायकों के पार्टी छोड़ते जाने से तीसरे नंबर की पार्टी बनकर रह गई है। आम आदमी पार्टी छोड़कर जगदेव सिंह कमालू, सुखपाल सिंह खैरा और पिरमल सिंह खालसा अब कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पंजाब में कांग्रेस के बाद अब आम आदमी पार्टी में घमासान छिड़ गई है। पार्टी नेता भगवंत सिंह मान काफी समय से खुद को पार्टी का चेहरा घोषित किये जाने का अरमान पाले हुए बैठे हैं, लेकिन चुनाव के करीब आने के बाद भी पार्टी ने अब तक इस मुद्दे पर कोई फैसला नहीं लिया है। इसे भी पार्टी की रणनीति माना जा रहा है, लेकिन पार्टी की यही रणनीति अब उस पर भारी पड़ने लगी है। भगवंत सिंह मान की एक विधायक रूपिंदर कौर रूबी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर और कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करके पार्टी आलाकमान पर दबाव बढ़ा दिया है। मान गुट उन्हें मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश किए जाने की मांग कर रहा है, जबकि सियासी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए पार्टी आलाकमान इस मुद्दे पर अब तक चुप्पी साधे हुए है।
2017 में कई नेताओं ने पेश की थी दावेदारी
दरअसल, 2017 विधानसभा चुनाव में भी आम आदमी पार्टी को पंजाब के प्रमुख दावेदारों के रूप में देखा जा रहा था। लेकिन चुनाव के ठीक पूर्व पार्टी के कई नेताओं में मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर घमासान छिड़ गई थी। भगवंत सिंह मान से लेकर, सुखपाल सिंह खैरा और सरदार छोटे सिंह गुट ने मुख्यमंत्री पद को लेकर अपनी-अपनी दावेदारी पेश की थी। लेकिन इस मुद्दे पर बात न बन पाने के कारण कुछ नेताओं ने पार्टी छोड़ दिया तो कुछ ने पूरी तरह पार्टी को सपोर्ट नहीं किया। इसका परिणाम हुआ कि पार्टी पंजाब की सत्ता में आती-आती रह गई। 2022 के चुनाव के पूर्व ही उसी तरह की स्थिति एक बार फिर बनती दिखाई पड़ रही है।
रूपिंदर कौर रूबी आम आदमी पार्टी को छोड़ने वाली छठवीं विधायक हैं। इस प्रकार आम आदमी पार्टी जो विधानसभा चुनाव में दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरी थी, अब विधायकों के पार्टी छोड़ते जाने से तीसरे नंबर की पार्टी बनकर रह गई है। आम आदमी पार्टी छोड़कर जगदेव सिंह कमालू, सुखपाल सिंह खैरा और पिरमल सिंह खालसा अब कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। माना जा रहा है कि यदि आम आदमी पार्टी आलाकमान से भगवंत मान की मुख्यमंत्री पद के मुद्दे पर बात नहीं बनी, तो इससे पार्टी की स्थिति कमजोर हो सकती है। मान की करीबी रहीं रूपिंदर कौर रूबी का कांग्रेस में जाने को इसी से जोड़ कर देखा जा रहा है। रूपिंदर कौर ने बुधवार को कांग्रेस पार्टी में शामिल होते वक्त अरविंद केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा और कहा कि उनकी पंजाब के लोगों की सेवा करने में कोई रूचि नहीं है।
कांग्रेस करेगी वापसी
कांग्रेस नेता रितु चौधरी ने अमर उजाला से कहा कि आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल अब तक किसी भी बड़े नेता को अपने साथ लेकर चलने में नाकाम साबित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल अपने सामने अपनी ही पार्टी में किसी दूसरे नेता को उभरने नहीं देना चाहते। यही कारण है कि कुमार विश्वास, आशुतोष, प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव जैसे उनके सभी साथी एक-एक कर उनसे दूर होते चले गए। अब पंजाब में भी यही स्थिति आ गई है और उनके साथियों ने उनका साथ छोड़ना शुरू कर दिया है।
रितु चौधरी ने कहा कि पंजाब में कांग्रेस मजबूत स्थिति में है। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पूरी मजबूती के साथ सरकार चला रहे हैं और लगातार जनता के हक में फैसले ले रहे हैं। यही कारण है कि कांग्रेस ने पंजाब के किसानों और आम आदमी के दिल में अपनी जगह बना ली है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में पार्टी दोबारा सरकार बनाने जा रही है। यही कारण है कि अब आम आदमी पार्टी के विधायक अपनी पार्टी छोड़कर कांग्रेस के साथ आ रहे हैं।
आम आदमी पार्टी हुई मजबूत
वहीं, आम आदमी पार्टी ने पंजाब में अपनी स्थिति को मजबूत बताया है। पंजाब इकाई से जुड़े पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में अपना दिल्ली मॉडल पेश करने का वादा कर लोगों में उम्मीदें पैदा कर दी हैं। 300 यूनिट मुफ्त बिजली और किसानों को योजनाओं की घोषणा ने पार्टी की स्थिति मजबूत कर दी है। पार्टी की पंजाब में मजबूत स्थिति को देखते हुए ही यहां दावेदारों की संख्या बढ़ने लगी है। नेता के मुताबिक, सही समय पर पार्टी एक मजबूत चेहरे को सामने रख चुनाव लड़ेगी और जीतेगी।