पंजाब चुनाव: ऐसी है केजरीवाल की मालवा क्षेत्र में किलेबंदी, यहां मिली कामयाबी तो आसान होगी सत्ता की दहलीज
आम आदमी पार्टी के पंजाब यूनिट से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने अमर उजाला से कहा कि हमारी पार्टी ने इस इलाके में एक साल पहले से ही काम करना शुरू कर दिया है। लगातार आप प्रमुख और अन्य बड़े नेता इस इलाके में प्रचार से लेकर कैंपेन की मॉनिटरिंग भी कर रहे हैं। पार्टी जल्द ही डोर टू डोर कैंपेन भी शुरू करने जा रही है, ताकि दूसरे दलों से चुनाव प्रचार में हम आगे निकल सकें...
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पंजाब विधानसभा चुनाव में पूरे दम खम के साथ आम आदमी पार्टी ने भी मोर्चा संभाल रखा है। इन विधानसभा चुनावों में आप का पूरा जोर पंजाब के मालवा इलाके पर होगा। पार्टी इस इलाके की सीटों पर ज्यादा फोकस कर रही है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि मालवा में जीत दर्ज करने वाली पार्टी प्रदेश में सरकार बना सकती है। इसी सपने के साथ पार्टी मालावा के मैदान में जोर आजमाइश कर रही है।
ऐसे समझें मालवा का चुनावी गणित
पंजाब राज्य में विधानसभा की कुल 117 विधानसभा सीटें हैं। अकेले मालवा क्षेत्र में ही कुल 69 विधानसभा सीटें हैं। इसलिए ये कहा जाता है कि जिस पार्टी की इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा सीटें आती हैं, वह पंजाब की सत्ता पर काबिज होती है। 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने यहां से 40 सीटों पर जीत हासिल की थी। मालावा के बाद पंजाब में अहम क्षेत्र माझा और दोआब को माना जाता है। माझा क्षेत्र में 25 विधानसभा सीटें आती हैं, तो दोआब में 23 विधानसभा सीटें। कांग्रेस ने पिछले चुनाव में माझा की 22 सीटों और दोआब की 15 सीटों पर कब्जा किया था। जबकि 2012 के विधानसभा चुनाव में अकाली ने मालवा की 33 सीटें जीती थीं। इसलिए राज्य में उनकी सरकार भी बनी थी। लेकिन 2017 के चुनावों में अकाली-भाजपा गठबंधन को महज आठ सीटें मिली थीं और वह दस साल बाद राज्य की सत्ता से बाहर हो गई थी।
ऐसी है आम आदमी पार्टी की किलेबंदी
2017 के चुनावों में आम आदमी पार्टी को अधिकांश सीटें मालवा से मिली थीं। इसलिए मालवा को लेकर आम आदमी पार्टी फिर से किलेबंदी में जुट गई है और केजरीवाल इस क्षेत्र का दौरा कर मुफ्त बिजली सहित कई घोषणाओं की बात कर आए हैं। मालवा में पंजाब से केजरीवाल या उनकी पत्नी को चुनाव लड़ाने की मांग भी हुई है। आम आदमी पार्टी में सुगबुगाहट है कि यदि खुद केजरीवाल या उनकी पत्नी चुनाव में पंजाब आ गए तो फिर कांग्रेस को कड़ी टक्कर मिल जाएगी। फिरोजपुर, फरीदकोट, अबोहर, फाजिल्का और बठिंडा में आम आदमी पार्टी का काफी प्रभाव देखने को मिल रहा है। अब तक मालवा के अबोहर, लुधियाना देहात और कई इलाकों में अकाली दल भाजपा के साथ रहकर मजबूत रहा, लेकिन अब अकाली दल के लिए यहां पहली मुश्किल आम आदमी पार्टी खड़ी कर रही है। अकालियों के वोट आप ने तोड़े हैं जिससे अकालियों को चुनौती मिल रही है।
आम आदमी पार्टी के पंजाब यूनिट से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने अमर उजाला से कहा कि हमारी पार्टी ने इस इलाके में एक साल पहले से ही काम करना शुरू कर दिया है। लगातार आप प्रमुख और अन्य बड़े नेता इस इलाके में प्रचार से लेकर कैंपेन की मॉनिटरिंग भी कर रहे हैं। पार्टी जल्द ही डोर टू डोर कैंपेन भी शुरू करने जा रही है, ताकि दूसरे दलों से चुनाव प्रचार में हम आगे निकल सकें। वहीं जल्द ही इस क्षेत्र में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत अन्य स्टार प्रचारक रैलियां और प्रचार करते हुए नजर आएंगे।
चुनाव पूर्व हुए ओपिनियन पोल में भी आम आदमी पार्टी को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। हाल ही में एक निजी चैनल द्वारा करवाए गए पोल में सामने आया था कि मालवा क्षेत्र की 38 से 39 सीटों पर आप को बढ़त मिलती दिख रही है। वहीं, कांग्रेस के खाते में 15 से 16 सीटें आती दिख रही हैं। जबकि सर्वे में अकाली को 12 से 13 सीटों पर जीत मिलने का अनुमान जताया गया है वहीं, भाजपा को एक और अन्य के खाते में एक सीट दिखाई गई है।
मालवा में आम आदमी पार्टी को 41.01 फीसदी वोट मिलने का अनुमान लगाया गया है। यहां दूसरे नंबर पर रही कांग्रेस को 31.48 फीसदी वोट मिलने के आसार हैं। अकाली के पक्ष में 20.58 फीसदी, भाजपा को 3.2 फीसदी और अन्य को 3.73 फीसदी वोट मिल सकता है। सर्वे में पंजाब की 117 सीटों पर लोगों के रुझान लिए गए थे। इसमें पाया गया कि इस बार लोगों की पहली पसंद आम आदमी पार्टी बनने वाली है। पार्टी को 53 से 57 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को 41 से 45 सीटों पर जीत मिलती दिख रही है।