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पंजाब में फिर जलने लगे खेत: दो फीसदी ही हुई है कटाई, खराब श्रेणी में पहुंचा AQI; जून में होगी माॅनिटरिंग
Thu, 10 Apr 2025 10:09 AM IST
निवेदिता वर्मा
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 10 Apr 2025 10:09 AM IST
सार
पराली जलने से रूपनगर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) खराब श्रेणी में पहुंच गया है, जो 254 दर्ज किया गया है। वहीं पंजाब के बाकी प्रमुख शहरों का एक्यूआई यलो जोन में पहुंच गया है। डाॅक्टरों के मुताबिक खराब श्रेणी वाले एक्यूआई में ज्यादा देर तक बाहर रहने से व्यक्ति को सांस संबंधी दिक्कत हो सकती है।
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पंजाब में जलने लगी पराली
- फोटो : ANI/File
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विस्तार
पंजाब में अभी केवल दो फीसदी ही गेहूं की कटाई हुई है, लेकिन खेतों में आग लगाने का सिलसिला शुरू हो गया है। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक पंजाब में गेहूं की नाड़ में आग लगाने के 9 मामले सामने आए हैं, जिनमें से सबसे अधिक 3 होशियारपुर से हैं।
इससे पंजाब के शहरों में प्रदूषण स्तर बढ़ने लगा है।
साल 2024 में इस अवधि के दौरान पंजाब में गेहूं की नाड़ में आग लगाने के 34 और 2023 में 10 मामले हुए थे। इससे पंजाब के शहरों का एक्यूआई स्तर बढ़ने लगा है। अमृतसर का एक्यूआई 125, बठिंडा का 110, चंडीगढ़ का 148, जालंधर का 130, खन्ना का 129, लुधियाना का 182 और पटियाला का 144 दर्ज किया गया, जो यलो जोन में रहा। पंजाब में गेहूं की नाड़ को आग लगाने के मामलों की माॅनिटरिंग जून माह तक की जाएगी।
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भाकियू एकता डकौंदा के किसान नेता जगमोहन सिंह ने कहा कि एक रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में पशुओं की संख्या में बड़ी कमी दर्ज की गई है। ऐसे में आशंका है कि इस बार किसान गेहूं की नाड़ से तूड़ी बनाने के बजाय इसमें आग लगाएंगे। वे किसानों को अपील करते हैं कि पर्यावरण की रक्षा के लिए नाड़ में आग न लगाएं।
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इससे पंजाब के शहरों में प्रदूषण स्तर बढ़ने लगा है।
प्रदूषण के कई कारण हैं
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन आदर्श पाल विग का कहना है कि शहरों में प्रदूषण स्तर बढ़ने का कारण केवल गेहूं की नाड़ में आग लगाना नहीं बल्कि वाहनों व उद्योगों का धुआं, निर्माण कार्यों से धूल व मलबा और अंधड़ चलना भी है। पंजाब में 1 से सात अप्रैल तक गेहूं की नाड़ में आग लगाने के 9 मामले हुए हैं, जिनमें तीन होशियारपुर, दो पटियाला, एक तरनतारन, एक जालंधर, एक गुरदासपुर और एक अमृतसर में हुआ है।
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साल 2024 में इस अवधि के दौरान पंजाब में गेहूं की नाड़ में आग लगाने के 34 और 2023 में 10 मामले हुए थे। इससे पंजाब के शहरों का एक्यूआई स्तर बढ़ने लगा है। अमृतसर का एक्यूआई 125, बठिंडा का 110, चंडीगढ़ का 148, जालंधर का 130, खन्ना का 129, लुधियाना का 182 और पटियाला का 144 दर्ज किया गया, जो यलो जोन में रहा। पंजाब में गेहूं की नाड़ को आग लगाने के मामलों की माॅनिटरिंग जून माह तक की जाएगी।
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भाकियू एकता डकौंदा के किसान नेता जगमोहन सिंह ने कहा कि एक रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में पशुओं की संख्या में बड़ी कमी दर्ज की गई है। ऐसे में आशंका है कि इस बार किसान गेहूं की नाड़ से तूड़ी बनाने के बजाय इसमें आग लगाएंगे। वे किसानों को अपील करते हैं कि पर्यावरण की रक्षा के लिए नाड़ में आग न लगाएं।