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परमवीर चक्र अवार्डों के लिए ग्रांट दो करोड़ करने पर कैप्टन ने ली चुटकी
ब्यूरो/अमर उजाला, पटियाला
Updated Mon, 27 Jul 2015 10:26 PM IST
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मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की ओर से परमवीर चक्र अवार्डों के लिए नगद
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ग्रांट दो करोड़ का ऐलान किए जाने पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चुटकी ली है।
कैप्टन ने कहा कि बादल को पता होना चाहिए कि पीवीसी युद्ध के समय दिया जाने वाला अवार्ड है और पिछले 16 वर्षों से हमने कोई जंग नहीं लड़ी। यहां जारी बयान में कैप्टन ने कहा कि या तो बादल को यह नहीं पता कि 1999 में कारगिल के बाद हमने कोई जंग नहीं लड़ी और इस कारण कोई पीवीसी विजेता नहीं है। क्योंकि यह जंग के समय दिया जाने वाला अवार्ड है। या फिर उन्होंने जानबूझ कर यह ऐलान किया है कि चाहे ग्रांट में जितना मर्जी बढ़ोतरी कर दो, उनको किसी को राशि नहीं देनी पड़ेगी।
कैप्टन ने कहा कि हम प्रार्थना करते हैं कि कोई युद्ध न हो, लेकिन हमें यह भी समझना चाहिए कि हमारी फौजें अप्रत्यक्ष तौर पर लड़ाई लड़ रही हैं। इस दौरान बहुत सारी कीमती जानें गई हैं और हमारे जवानों ने कई बार अपनी जानों की कुर्बानियां देकर अपनी वीरता का प्रदर्शन किया है। जिस कारण उनको सबसे बड़ा शांति का पुरस्कार अशोक चक्र भी मिला है।
कैप्टन ने कहा कि बादल साफ करें कि जम्मू-कश्मीर व कुछ उत्तर-पूर्वी राज्यों में बगावत के खिलाफ लड़ने वाले फौजियों, जिनको अशोक चक्र जैसे शांति के वीरता पुरस्कार दिए गए हैं, उन्हें भी शामिल किया जाएगा। या फिर हमें युद्ध का इंतजार करवाना चाहते हैं। कैप्टन ने शांति के लिए वीरता पुरस्कार के लिए नगद ग्रांट बढ़ाए जाने पर जोर दिया।
कैप्टन ने कहा कि बादल को पता होना चाहिए कि पीवीसी युद्ध के समय दिया जाने वाला अवार्ड है और पिछले 16 वर्षों से हमने कोई जंग नहीं लड़ी। यहां जारी बयान में कैप्टन ने कहा कि या तो बादल को यह नहीं पता कि 1999 में कारगिल के बाद हमने कोई जंग नहीं लड़ी और इस कारण कोई पीवीसी विजेता नहीं है। क्योंकि यह जंग के समय दिया जाने वाला अवार्ड है। या फिर उन्होंने जानबूझ कर यह ऐलान किया है कि चाहे ग्रांट में जितना मर्जी बढ़ोतरी कर दो, उनको किसी को राशि नहीं देनी पड़ेगी।
कैप्टन ने कहा कि हम प्रार्थना करते हैं कि कोई युद्ध न हो, लेकिन हमें यह भी समझना चाहिए कि हमारी फौजें अप्रत्यक्ष तौर पर लड़ाई लड़ रही हैं। इस दौरान बहुत सारी कीमती जानें गई हैं और हमारे जवानों ने कई बार अपनी जानों की कुर्बानियां देकर अपनी वीरता का प्रदर्शन किया है। जिस कारण उनको सबसे बड़ा शांति का पुरस्कार अशोक चक्र भी मिला है।
कैप्टन ने कहा कि बादल साफ करें कि जम्मू-कश्मीर व कुछ उत्तर-पूर्वी राज्यों में बगावत के खिलाफ लड़ने वाले फौजियों, जिनको अशोक चक्र जैसे शांति के वीरता पुरस्कार दिए गए हैं, उन्हें भी शामिल किया जाएगा। या फिर हमें युद्ध का इंतजार करवाना चाहते हैं। कैप्टन ने शांति के लिए वीरता पुरस्कार के लिए नगद ग्रांट बढ़ाए जाने पर जोर दिया।