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बढ़ी हलचल: कैप्टन और सिद्धू की सरगर्मियों से पटियाला एक बार फिर बना पंजाब की राजनीति का केंद्र

Sun, 19 Dec 2021 03:13 PM IST
निवेदिता वर्मा रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sun, 19 Dec 2021 03:13 PM IST
सार

कैप्टन के चुनाव लड़ने की घोषणा ने पटियाला सीट को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है क्योंकि इस चौथे फ्रंट में अब तक कैप्टन को सीएम पद का दावेदार माना जा रहा है। वहीं नवजोत सिंह सिद्धू पटियाला से चुनाव नहीं लड़ेंगे लेकिन वे कैप्टन के खिलाफ वह पटियाला से ताल ठोक रहे हैं।

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Patiala once again became center of Punjab politics due to enthusiasm of Captain Amarinder Singh and Navjot Sidhu
कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिद्धू। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कैप्टन अमरिंदर सिंह के कांग्रेस में रहते कहा जाता था कि पंजाब की राजनीति मोती महल से चलती है। कैप्टन के इस्तीफा देने के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि अब पंजाब की राजनीति करवट लेगी। लेकिन पटियाला एक बार फिर राजनीति का केंद्र बन गया है। भाजपा और टकसाली अकालियों के साथ कैप्टन द्वारा चौथा फ्रंट बनाते ही पटियाला में हलचल बढ़ गई। पटियाला को सरगर्मियों का केंद्र बनाने में कांग्रेस के पार्टी प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। सिद्धू चुनाव भले ही पटियाला से न लड़ें लेकिन कैप्टन के सामने ताल ठोकने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी है। कुल मिलाकर दो सियासी परिवारों की रणनीति पर पटियाला की जनता टकटकी लगाए है। 

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कैप्टन के यहां से चुनाव लड़ने की घोषणा ने पटियाला सीट को बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है क्योंकि इस चौथे फ्रंट में अब तक कैप्टन को सीएम पद का दावेदार माना जा रहा है। यही वजह है कि कैप्टन के व्यस्त शेड्यूल के चलते उनकी बेटी जयइंद्र कौर पटियाला में अपने पिता की तरफ से चुनाव प्रचार में कूद पड़ी हैं। 

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79 साल के कैप्टन पंजाब की राजनीति में रखते दम

कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब की राजनीति में अच्छा खासा दम रखते हैं। यही वजह है कि कांग्रेस से इस्तीफे के तुरंत बाद भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सीधे तौर पर मीडिया में आकर कैप्टन को उनके साथ आकर चुनाव लड़ने के आमंत्रण देना शुरू कर दिया था। कैप्टन ही हैं, जिन्होंने 2014 में जब पूरे देश में मोदी लहर पूरे जोर पर थी, भाजपा के दिग्गज नेता अरुण जेटली को अमृतसर सीट से एक लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से हरा दिया था। साल 2017 में पंजाब में कांग्रेस के 117 सीटों में से 77 जीतने का श्रेय कैप्टन को ही मिला था। उस समय कांग्रेस का स्लोगन था चाहुंदा है पंजाब कैप्टन दी सरकार। 

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2022 में सरकार बनाने में अहम रोल निभा सकता है चौथा फ्रंट-प्रोफेसर वालिया 

राजनीतिक मामलों के माहिर एवं पंजाबी यूनिवर्सिटी से रिटायर प्रोफेसर हरजिंदर पाल सिंह वालिया के मुताबिक कैप्टन का चौथा फ्रंट 2022 में पंजाब में सरकार बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। क्योंकि एक तरफ जहां भाजपा ने मनजिंदर सिंह सिरसा को अपने साथ लाकर सिख वोटरों को लुभाने का काम किया है। वहीं आने वाले दिनों में टिकट न मिलने से नाराज कई कांग्रेसी नेता भी कैप्टन खेमे के साथ जुड़ सकते हैं। ऐसे में पंजाब की राजनीति में कैप्टन एक बार फिर से ऊपर उभर कर आ सकते हैं। 

पटियाला सीट पर हमेशा से रहा है दबदबा

कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके परिवार का हमेशा से पटियाला में दबदबा रहा है। उनकी पत्नी परनीत कौर इस समय पटियाला से सांसद हैं। 1980 में कैप्टन अकाली दल के बड़े नेता एसजीपीसी के पूर्व प्रधान पंथ रत्न जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहड़ा को हराकर पटियाला से सांसद बने थे। वह चार बार पटियाला सीट से विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। साल 2002, 2007, 2012 और 2017 में उन्होंने हर बार अपने विरोधियों को बड़े अंतर से हराया है।

सियासी सफर 

1963 से लेकर 1966 तक कैप्टन भारतीय फौज में रहे। उन्होंने अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत साल 1977 में कांग्रेस से अपनी मां सांसद मोहिंदर कौर की अनुमति से की। 1984 में कैप्टन ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में कांग्रेस को छोड़ दिया और अकाली दल ज्वाइन कर लिया। कैप्टन सुरजीत सिंह बरनाला की सरकार में कृषि मंत्री भी रहे। कैप्टन की साल 1998 में कांग्रेस में दोबारा वापसी हुई और इसमें पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल ने भूमिका निभाई। कैप्टन 1999 से लेकर 2002 तक पंजाब कांग्रेस प्रधान रहे। जबकि 2002 से लेकर 2007 तक पंजाब के मुख्यमंत्री रहे। वह 44 साल कांग्रेस में रहे।

कैप्टन के सामने पटियाला से सिद्धू भी ठोक रहे हैं ताल

नवजोत सिंह सिद्धू ने भले ही पटियाला से चुनाव लड़ने का एलान न किया हो, लेकिन कैप्टन के खिलाफ वह पटियाला से ताल ठोक रहे हैं। सिद्धू पटियाला के ही रहने वाले हैं और कैप्टन के शाही परिवार से संबंधित प्रतिष्ठित यादविंद्रा पब्लिक स्कूल से वह पढ़े हैं। यहां उनकी कोठी हैं, जहां पर सिद्धू ने अपनी पत्नी पूर्व विधायक नवजोत कौर सिद्धू के साथ पंजाब कांग्रेस का प्रधान बनने के पहले ही डेरा जमा लिया था। यहां से लगातार दो-तीन बार मीडिया से मुखातिब होकर सिद्धू ने कैप्टन पर खूब हमले बोले। उन्होंने इस दौरान पार्टी हाईकमान को तीखे तेवरों से साफ संदेश दे दिया था। इसके बाद सिद्धू की पत्नी ने शहर में जाट महासभा के बैनर तले कई प्रोग्राम करके तत्कालीन कैप्टन सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। 



इसके साथ ही सिद्धू ने जब किसानों के हक में लोगों से घरों पर काले झंडे लगाने का आह्वान किया था। उसके तहत भी सिद्धू ने पटियाला स्थित अपने घर पर ही काला झंडा फहराया था, जबकि बेटी ने अमृतसर स्थित घर में फहराया था। इसके बाद कैप्टन व उनकी पत्नी सांसद परनीत कौर ने सिद्धू के पटियाला रहने का विरोध किया था और कहा था कि वह जाकर अपने अमृतसर हलके को देखें। अब कैप्टन के कांग्रेस छोड़ने व पटियाला से ही चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद भी सिद्धू खेमे की पटियाला में काफी सक्रियता देखी जा रही है। सिद्धू के खास शैरी रियाड़ अपने समर्थकों साथ यहां डटे हुए हैं।

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