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पंजाब में बढ़ी बिजली की मांग: 2173 मेगावाट उत्पादन ठप, मानसून की बेरुखी से बांधों में घटा जलस्तर

Mon, 14 Sep 2026 08:56 AM IST
Nivedita रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला Published by: Nivedita Updated Mon, 14 Sep 2026 08:56 AM IST
सार

पंजाब में इस बार मानसून की बारिश सामान्य से 40 फीसदी कम रही है। 402.9 एमएम के मुकाबले 243.5 एमएम बारिश हुई। सितंबर में अब तक सामान्य 34.5 एमएम के मुकाबले केवल 12.9 एमएम बारिश हुई है जो 63 फीसदी कम है।

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Rising electricity demand in Punjab 2173 MW generation halted dam water levels drop due to deficient monsoon
पंजाब में बिजली संकट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब में बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। थर्मल प्लांटों में कोयले की कमी और यूनिटों में तकनीकी खराबी से उत्पादन प्रभावित है। मानसून की बारिश कम होने से खेतों में ट्यूबवेल पर निर्भरता बढ़ी है। 

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उमस भरी गर्मी के कारण घरेलू बिजली की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर है। मांग और उपलब्धता में बड़े अंतर के कारण उद्योगों से लेकर खेतीबाड़ी क्षेत्र और शहरों व गांवों में लंबे कट लगाए जा रहे हैं। इससे उद्योगपतियों किसानों और आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
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सितंबर में लगातार 16 हजार मेगावाट से ज्यादा मांग
छह सितंबर को छोड़कर सितंबर में बिजली की मांग लगातार 16 हजार मेगावाट से अधिक रही। एक सितंबर को 16116 मेगावाट, दो को 16530, तीन को 16485, चार को 16182, पांच को 16254, सात को 16219, आठ और नौ को 16505, 10 को 16432, 11 को 16619 और 12 सितंबर को 16519 मेगावाट मांग रही। शनिवार को 16519 मेगावाट की रिकॉर्ड मांग के मुकाबले पावरकाम को सभी स्रोतों से केवल 4503 मेगावाट बिजली उपलब्ध हुई। करीब 2173 मेगावाट उत्पादन प्रभावित रहा।
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तकनीकी खराबी से राजपुरा का 700 मेगावाट का एक नंबर और तलवंडी साबो का 660 मेगावाट का दो नंबर यूनिट बंद रहा। 840 मेगावाट क्षमता वाले रोपड़ थर्मल से केवल 488 मेगावाट बिजली मिली। 920 मेगावाट क्षमता वाले लहरा मुहब्बत प्लांट से 804 मेगावाट उत्पादन हुआ। पावरकाम अधिकारियों के अनुसार सर्दियों में रोपड़ और लहरा मुहब्बत थर्मलों का सालाना रखरखाव नहीं हुआ था। अब तकनीकी खराबी के कारण यूनिट पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहे। बांधों में पानी की कमी से रणजीत सागर के 300 मेगावाट के दो और यूबीडीसी के 45 मेगावाट के तीन यूनिट बंद हैं।

चार थर्मलों में चार से 16 दिन का कोयला
पंजाब के पांच थर्मल प्लांटों में से चार में केवल चार से 16 दिनों का कोयला बचा है। तलवंडी साबो में चार दिन राजपुरा में सात दिन लहरा मुहब्बत में 11 दिन और गोइंदवाल में 16 दिनों का स्टॉक है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के नियमों के अनुसार 1000 किलोमीटर से अधिक दूर स्थित कोयला खदानों वाले राज्यों के थर्मलों में 30 दिनों का स्टॉक होना चाहिए। पंजाब को कोयला देने वाली खदानें 1300 से 1900 किलोमीटर दूर हैं। मानसून से पहले ऐसे थर्मलों में 21 दिनों का स्टॉक जरूरी माना जाता है। ओडिशा झारखंड और छत्तीसगढ़ में भारी बारिश से खनन और परिवहन प्रभावित होने की बात सामने आई है।

मानसून की बारिश 40 फीसदी कम
पंजाब में इस बार मानसून की बारिश सामान्य से 40 फीसदी कम रही है। 402.9 एमएम के मुकाबले 243.5 एमएम बारिश हुई। सितंबर में अब तक सामान्य 34.5 एमएम के मुकाबले केवल 12.9 एमएम बारिश हुई है जो 63 फीसदी कम है। अमृतसर में 92 फीसदी बरनाला में 89 बठिंडा में 81 फरीदकोट में 97 फतेहगढ़ साहिब में 74 फिरोजपुर में 96 जालंधर में 84 लुधियाना में 82 मुक्तसर में 83 पटियाला में 70 मोहाली में 72 एसबीएस नगर में 64 और संगरूर में 62 फीसदी बारिश कम हुई। सितंबर में मोगा फाजिल्का मानसा तरनतारन और कपूरथला पूरी तरह सूखे रहे। जुलाई में 26 और अगस्त में 35 फीसदी बारिश कम हुई थी।

बांधों में घटा जलस्तर
कम बारिश से प्रमुख बांधों में जलस्तर भी तेजी से घटा है। भाखड़ा में पिछले साल के मुकाबले 32.91 फुट कमी है। 2025 में इसी दिन जलस्तर 1676.89 फुट था जो अब 1643.98 फुट है। पानी की आवक 46708 से घटकर 30199 क्यूसिक रह गई। पौंग में जलस्तर 17.91 फुट कम होकर 1372.24 फुट रह गया है। आवक 34737 से घटकर 10751 क्यूसिक है। रणजीत सागर बांध में जलस्तर 13.05 मीटर घटकर 511.48 मीटर रह गया है। पानी की आवक 18411 से घटकर 5181 क्यूसिक है। इससे हाइडल बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

उद्योगों में 10 घंटे तक कट
आपूर्ति में कमी के कारण उद्योगों में 10 घंटे तक के कट लग रहे हैं। जिला मुख्यालयों में चार घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में एक घंटे के कट हैं। खेतीबाड़ी क्षेत्र को तीन से साढ़े चार घंटे बिजली मिल पा रही है। किसान संगठनों ने आंदोलन का एलान किया है। विपक्षी दल भी सरकार को घेर रहे हैं। राज्य सरकार का कहना है कि केंद्र से कोयले की सप्लाई कम हो रही है और पंजाब को केंद्रीय पूल से 1051 मेगावाट कम बिजली मिल रही है।

पावरकाम पर आर्थिक दबाव
पंजाब सरकार और उसके विभागों पर पावरकाम का करीब 9650 करोड़ रुपये बकाया है। इसमें 7550 करोड़ सब्सिडी और 2100 करोड़ सरकारी विभागों के बिल हैं। सब्सिडी में 4000 करोड़ पिछले दो वित्तीय वर्षों का ब्याज समेत बकाया है जबकि 3550 करोड़ चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 का है। जलापूर्ति एवं स्वच्छता विभाग पर करीब 1000 करोड़ स्थानीय निकाय विभाग पर 850 करोड़ ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग पर 380 करोड़ और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग पर 125 करोड़ रुपये बकाया हैं। सरकारी विभागों और जरूरी सेवाओं के कनेक्शन काटना आसान नहीं होने से पावरकाम पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

10 हजार करोड़ का कर्ज लेने की तैयारी
बिजली और कोयला खरीद मरम्मत के स्पेयर पार्ट्स तथा वेतन और अन्य खर्चों के भुगतान में दिक्कत के बीच पावरकाम बाजार से करीब 10 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए गैर परिवर्तनीय डिबेंचर और बॉन्ड जारी करने की योजना है। मर्चेंट बैंकरों से ऑनलाइन बोलियां मांगी गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कर्ज और ब्याज का बोझ करदाताओं और बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। पावरकाम पर पहले से करीब 18000 करोड़ रुपये की देनदारियां हैं।

इंजीनियर्स एसोसिएशन ने बताया 7800 करोड़ के घाटे का खतरा
पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव इंजीनियर अजयपाल सिंह अटवाल के अनुसार बिजली दरों में कटौती से सालाना सब्सिडी बिल 20500 करोड़ से घटकर करीब 15200 करोड़ रुपये रह गया है। इसके बावजूद सब्सिडी समय पर नहीं मिल रही। उनका कहना है कि हाल के एआरआर में खर्च का अनुमान कम आंका गया जिससे दरें कम तय हुईं। इससे चालू वित्तीय वर्ष में पावरकाम को वास्तविक जरूरत के मुकाबले करीब 7800 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का सामना करना पड़ सकता है।

उत्पादन बढ़ाने की मांग
एसोसिएशन ने रोपड़ में 800-800 मेगावाट के तीन सुपर क्रिटिकल थर्मल यूनिट लगाने और बठिंडा में 250 मेगावाट का सोलर प्लांट स्थापित करने की मांग की है। एसोसिएशन के अनुसार 2020 में ही सरकार को वित्तीय वर्ष 2021-22 में बिजली कमी की आशंका बता दी गई थी। 2022 में मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने भी उत्पादन बढ़ाने की मांग रखी गई लेकिन अभी तक इस दिशा में कदम नहीं उठाया गया।

पावरकाम बोला- जल्द दूर होगी कमी
पावरकाम के डायरेक्टर जनरेशन पीएस बराड़ का कहना है कि कम बारिश के कारण खेतीबाड़ी से घरेलू क्षेत्र तक बिजली की मांग बढ़ी है। कोयले की सप्लाई तेज करने के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को पत्र लिखा गया है। कोयला उत्पादक राज्यों में भारी बारिश से खनन प्रभावित हुआ है। जरूरी मरम्मत के बाद बंद यूनिट जल्द चालू किए जाएंगे जिससे बिजली की कमी काफी हद तक दूर होने की उम्मीद है।
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