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पटियाला: किसान आंदोलन में अपनों को खोने वालों का दर्द...काश पहले वापस हो जाते कृषि कानून
Sun, 21 Nov 2021 11:36 AM IST
निवेदिता वर्मा
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sun, 21 Nov 2021 11:36 AM IST
सार
मृतक किसानों के परिजनों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खेती कानून वापस लेने के एलान से उन्हें खुशी है। साथ ही एक सुकून भी मिला है।
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पटियाला में किसान की मौत के बाद शोक संतप्त परिवार।
- फोटो : फाइल
विस्तार
जे मोदी पहलां कानून वापस ले लेंदा, तां साडे बंदे अज साडे विच हुंदे... आज चाहे कृषि कानून वापस हो गए हैं, लेकिन जो जख्म मिला है वह जिंदगी भर रहेगा। पटियाला के गांव तुंगा के बख्शीश सिंह ने नम आंखों से बताया कि इसी साल जनवरी महीने में उनके ताया धन्ना सिंह (63) की टिकरी बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी। अभी परिवार पूरी तरह से इस मौत के सदमे से निकला भी नहीं था कि पांच दिन पहले 15 नवंबर को उनके भाई गुरप्रीत सिंह काला (45) की भी किसान आंदोलन में तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई।
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बख्शीश सिंह ने कहा कि जनवरी महीने में ताया की मौत के बाद भी उनके परिवार ने किसान आंदोलन के प्रति अपने कर्तव्य को नहीं भुलाया। साथ के साथ उसका भाई गुरप्रीत सिंह उर्फ काला टिकरी बॉर्डर चला गया। तब से वह एक दिन के लिए भी वापस घर नहीं आया था। तबीयत बिगड़ने पर ही 14 नवंबर 2021 को घर लाया गया था, लेकिन अगले दिन ही अस्पताल में मौत हो गई। बॉर्डर पर पीने का पानी साफ न होने कारण उसे काला पीलिया हो गया था। घर में इस समय मातम का माहौल है।
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ताया और भाई की आत्माओं को मिलेगी शांति
बख्शीश सिंह का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खेती कानून वापस लेने के एलान से खुशी है। साथ ही सुकून भी मिला है कि शायद अब उसके ताया व भाई की आत्माओं को शांति मिल सकेगी। किसान बख्शीश सिंह ने कहा कि किसानी आंदोलन अभी और चलेगा। जरूरत पड़ी तो परिवार के और सदस्य भी वहां जाएंगे। न वह पहले डरे हैं और न ही आगे डरेंगे। हर कुर्बानी के लिए तैयार हैं।
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