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पीयू में पंजाब इतिहास अध्यनन विभाग व इतिहास विभाग के मर्जर का विरोध शुरू-- विभिन्न सियासी दलों ने दुर्भाग्यपूर्ण बताते फैसला र
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पटियाला। पंजाबी यूनिवर्सिटी में पंजाब इतिहास अध्ययन और इतिहास विभाग का मर्जर करके एक नया विभाग बनाए जाने का विरोध शुरू हो गया है। विभिन्न सियासी दलों ने इस फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते इसे रद्द करने की मांग कर डाली है।
नाभा इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन एवं वरिष्ठ भाजपा नेता गुरतेज सिंह ढिल्लों ने कहा कि यूनिवर्सिटी ने महान इतिहासकार डा. गंडा सिंह वाले पंजाब इतिहास अध्ययन विभाग को आगे बढ़ाने की बजाय अन्य विभाग में इसका मर्जर कर दिया है, जो निंदनीय है। उन्होंने कहा कि इस कदम से पंजाब का इतिहास खतरे में पड़ गया है। पंजाब का इतिहास, सभ्याचार आदि अपने आप में एक विलक्षण पहचान रखता है, लेकिन आने वाली पीढ़ी इस ज्ञान से वंचित रह जाएगी। मर्ज किए दोनों विभागों की महत्ता अलग-अलग है। उन्होंने कहा कि इस संबंधी पंजाब के राज्यपाल को पत्र लिखकर रोष जाहिर किया है। साथ ही फैसले को रद्द करने के लिए वीसी प्रोफेसर अरविंद को आदेश जारी करने की मांग की है।
उधर, पूर्व अकाली सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि यह फैसला यूनिवर्सिटी की मर्यादा के खिलाफ है। इससे पीयू में इतिहास संबंधी होने वाले शोध कार्य प्रभावित होंगे। इसलिए यूनिवर्सिटी को अपने फैसले की समीक्षा करके इसे वापस लेना चाहिए। यूनिवर्सिटी को आज के समय की जरूरत के अनुसार नए कोर्स शुरू करके अपने स्थापित कालेजों में सुधार लाना चाहिए। कांग्रेसी विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने भी ट्वीट करके पीयू के इस फैसले की निंदा की है। उन्होंने कहा कि पंजाब के इतिहास, विरासत व शोध को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इस फैसले को पंजाब के साथ नाइंसाफी करार देते इसे तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की।
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नाभा इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन एवं वरिष्ठ भाजपा नेता गुरतेज सिंह ढिल्लों ने कहा कि यूनिवर्सिटी ने महान इतिहासकार डा. गंडा सिंह वाले पंजाब इतिहास अध्ययन विभाग को आगे बढ़ाने की बजाय अन्य विभाग में इसका मर्जर कर दिया है, जो निंदनीय है। उन्होंने कहा कि इस कदम से पंजाब का इतिहास खतरे में पड़ गया है। पंजाब का इतिहास, सभ्याचार आदि अपने आप में एक विलक्षण पहचान रखता है, लेकिन आने वाली पीढ़ी इस ज्ञान से वंचित रह जाएगी। मर्ज किए दोनों विभागों की महत्ता अलग-अलग है। उन्होंने कहा कि इस संबंधी पंजाब के राज्यपाल को पत्र लिखकर रोष जाहिर किया है। साथ ही फैसले को रद्द करने के लिए वीसी प्रोफेसर अरविंद को आदेश जारी करने की मांग की है।
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उधर, पूर्व अकाली सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि यह फैसला यूनिवर्सिटी की मर्यादा के खिलाफ है। इससे पीयू में इतिहास संबंधी होने वाले शोध कार्य प्रभावित होंगे। इसलिए यूनिवर्सिटी को अपने फैसले की समीक्षा करके इसे वापस लेना चाहिए। यूनिवर्सिटी को आज के समय की जरूरत के अनुसार नए कोर्स शुरू करके अपने स्थापित कालेजों में सुधार लाना चाहिए। कांग्रेसी विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने भी ट्वीट करके पीयू के इस फैसले की निंदा की है। उन्होंने कहा कि पंजाब के इतिहास, विरासत व शोध को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इस फैसले को पंजाब के साथ नाइंसाफी करार देते इसे तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की।
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