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विदेशी दुल्हों की सताई लड़कियों के मामले चुनौती बने: रेखा शर्मा

Fri, 27 Sep 2019 10:18 PM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 27 Sep 2019 10:18 PM IST
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NRI Froud with indian bride
राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने कहा कि विदेशी दूल्हों की सताई लड़कियों के मामले एक बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। वह शुक्रवार को नेशनल कमीशन फार वुमैन की तरफ से पंजाबी यूनिवर्सिटी के पंजाब स्कूल आफ लॉ और वुमेन स्टडी सेंटर के सहयोग से एनआरआई विवाह से संबंधित मसलों बारे कराए गए एक राष्ट्रीय सेमिनार में मुख्य मेहमान के तौर पर संबोधित कर रही थीं।
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रेखा शर्मा ने बताया कि एनआरआई विवाह से संबंधित मामलों में घरेलू हिंसा, छोड़ देना, वापस भेज देना या विदेशी दूल्हों की तरफ से लड़कियों को अपने साथ न ले जाना आदि केस ज्यादा हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन मामलों पर रोक लगाने के लिए एनआरआई कानून बनना चाहिए जिससे ऐसा करने वालों की जायदाद अटैच की जा सके। बताया कि एनआरआई शादियों से संबंधित मामलों में हर वर्ष इजाफा हो रहा है और यह संख्या अब हर साल 100 से बढ़कर 800 तक पहुंच गई है। पिछले साल राष्ट्रीय कमीशन के पास 780 मामले आए थे, जबकि इस साल अब तक 558 ऐसे मामले सुनवाई के लिए पहुंचे हैं। उन्होंने मां बाप को सलाह दी कि वे लड़कियों के एनआरआई विवाह को केवल विदेश जाने वाला एजेंडा ही न बनाएं। बल्कि जांच पड़ताल करके पूरे समाज के सामने रीति-रिवाजों के साथ ही विदेशी दूल्हों के साथ अपनी लड़की का विवाह करें। क्योंकि इस समय धोखाधड़ी करने वाले विदेशी दूल्हों को वापस बुलाना भी एक बड़ी चुनौती है।
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रेखा शर्मा ने कहा कि एनआरआई विवाह की समस्याओं के पीछे जागरूकता की कमी सामने आई है। जिसके लिए कमीशन ने विदेशी दुल्हे के साथ शादी बारे लोगों को जागरूक करने के लिए सेमिनार करवाने का सिलसिला शुरू किया है और अमृतसर, जालंधर, चंडीगढ़ और पटियाला में राष्ट्रीय सेमिनार करवाए गए हैं।
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पंजाबी यूनिवर्सिटी के वीसी डा. बीएस घुम्मन ने कहा कि इस समस्या के हल के लिए सही नीति बनाने और बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। उन्होंने पीड़ित बच्चियों के साथ डटने को एक सामाजिक और सामूहिक जिम्मेदारी बताते कहा कि पंजाब, आज इस पेचीदा और गंभीर समस्या का एक ध्रुव बन चुका है, जिसके हल के लिए सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं सहित सरकारें, कमीशन और अदालतों को मिलकर प्रयास करना पड़ेगा।

डा. घुम्मण ने इस मकसद के लिए थिएटर, संगीत, नृत्य और अन्य कलाओं की मदद लेने और लड़कियों के साथ धोखा करने वालों के सामाजिक बायकाट करने सहित लड़कियों को आत्मनिर्भर करने और अपने फैसले आप लेने के लिए ऊंची शिक्षा प्रदान करने का भी आह्वान दिया। सेमिनार के तकनीकी सत्रों में पंजाब एनआरआई कमीशन के चेयरमैन जस्टिस आरके गर्ग, पंजाब कानूनी सेवाएं अथारिटी के मेंबर सचिव रुपिंदरजीत चहल, अतिरिक्त सचिव डा. मनदीप मित्तल, जिला और सैशन जज पटियाला रजिंदर अग्रवाल, पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर आफ एमरिटस डा. पाम राजपूत भी मौजूद रहे।
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