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एलबेंडाजोल गोली खाने से छात्रों का पेट दर्द, चक्कर व उल्टियां
संगरूर
Updated Sun, 19 Feb 2017 03:28 PM IST
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सुनाम में बीमार छात्रों के अभिभावकों को समझाते सिविल अस्पताल के डाक्टर।
- फोटो : अमर उजाला
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गांव नंगला के सरकारी स्कूल में पढ़ते विद्यार्थियों में पेट दर्द, चक्कर आने व उल्टी लगने की बीमारी थमने का नाम नहीं ले रही है। अब तक दो दर्जन से ज्यादा छात्र, इन बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं और सुनाम के सरकारी अस्पताल में उपचाराधीन हैं।
एक छात्र सतनाम सिंह की खून की उलटियां लगने से हालात गंभीर हो गई थी। छात्रों व अभिभावकों की शिकायत है कि पेट में कीडे़ मारने के लिए एलबेंडाजोल की गोलियां खाने के बाद ही छात्र बीमार हुए हैं। ऐसे में सरकार व सेहत विभाग के विशेष अभियान पर सवाल उठने लगे हैं। गंभीर पहलू यह भी है कि ज्यादातर छात्राएं ही उक्त बीमारी की चपेट में आ रही हैं।
स्थानीय सिविल अस्पताल में उपचाराधीन छात्र लवप्रीत कौर, कंवलप्रीत कौर, सर्बजीत कौर, अमन, सहज, जशनप्रीत, हरप्रीत, दिलप्रीत, अमनदीप, जसप्रीत, मंजू, कुलजिंदर, अर्शदीप, रमनप्रीत व सहजदीप सिंह आदि ने बताया कि 15 फरवरी को स्कूल में उन्हें एलबेंडाजोल की गोली खिलाई गई थी। गोली खाने के कुछ समय बाद ही उनके पेट में दर्द व चक्कर आने लग गए।
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अभिभावक जगतार सिंह, बघेल सिंह, गुरमीत सिंह, अमरीक सिंह, जरनैल सिंह, जग्गी सिंह, सुखविंदर सिंह, जगतार सिंह, हाकम सिंह आदि ने कहा कि दो दिन तक छात्रों को पेट दर्द की दवा देते रहे, लेकिन जब हालत बिगड़ गई तो बच्चों को सुनाम के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। उन्होंने डाक्टरों से मांग की कि बच्चों की बीमारी की असली वजह बताई जाए।
तर्कशील सोसाइटी के अध्यक्ष व बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट हरिंदर सिंह लाली ने अस्पताल में विद्यार्थियों का हालचाल पूछा व दवा की गुणवत्ता की जांच करने की मांग की। इलाके में सैकड़ों विद्यार्थियों को गोली खाने के बाद पेट दर्द की शिकायत हुई है जबकि गांव नंगला के विद्यार्थियों की हालात गंभीर बन गई। उन्होंने कहा कि इस मामले ने सरकार के अभियान को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
एसएमओ डॉ. बलजीत कौर तथा बच्चों के विशेषज्ञ डाक्टर व मेडिकल अधिकारी मुनीष गुप्ता ने अभिभावकों से बातचीत करके समझाया कि कोई ठोस कारण बताया नहीं जा सकता है। एक या दो फीसदी बच्चों या मरीजों को किसी भी दवा का रिएक्शन होने की संभावना हमेशा रहती है। विद्यार्थियों की हालत स्थिर है, लिहाजा घबराएं नहीं। सेहत विभाग की टीम ने गांव नगंला का दौरा करके हालात का जायजा लिया।
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एक छात्र सतनाम सिंह की खून की उलटियां लगने से हालात गंभीर हो गई थी। छात्रों व अभिभावकों की शिकायत है कि पेट में कीडे़ मारने के लिए एलबेंडाजोल की गोलियां खाने के बाद ही छात्र बीमार हुए हैं। ऐसे में सरकार व सेहत विभाग के विशेष अभियान पर सवाल उठने लगे हैं। गंभीर पहलू यह भी है कि ज्यादातर छात्राएं ही उक्त बीमारी की चपेट में आ रही हैं।
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स्थानीय सिविल अस्पताल में उपचाराधीन छात्र लवप्रीत कौर, कंवलप्रीत कौर, सर्बजीत कौर, अमन, सहज, जशनप्रीत, हरप्रीत, दिलप्रीत, अमनदीप, जसप्रीत, मंजू, कुलजिंदर, अर्शदीप, रमनप्रीत व सहजदीप सिंह आदि ने बताया कि 15 फरवरी को स्कूल में उन्हें एलबेंडाजोल की गोली खिलाई गई थी। गोली खाने के कुछ समय बाद ही उनके पेट में दर्द व चक्कर आने लग गए।
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अभिभावक जगतार सिंह, बघेल सिंह, गुरमीत सिंह, अमरीक सिंह, जरनैल सिंह, जग्गी सिंह, सुखविंदर सिंह, जगतार सिंह, हाकम सिंह आदि ने कहा कि दो दिन तक छात्रों को पेट दर्द की दवा देते रहे, लेकिन जब हालत बिगड़ गई तो बच्चों को सुनाम के सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। उन्होंने डाक्टरों से मांग की कि बच्चों की बीमारी की असली वजह बताई जाए।
तर्कशील सोसाइटी के अध्यक्ष व बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट हरिंदर सिंह लाली ने अस्पताल में विद्यार्थियों का हालचाल पूछा व दवा की गुणवत्ता की जांच करने की मांग की। इलाके में सैकड़ों विद्यार्थियों को गोली खाने के बाद पेट दर्द की शिकायत हुई है जबकि गांव नंगला के विद्यार्थियों की हालात गंभीर बन गई। उन्होंने कहा कि इस मामले ने सरकार के अभियान को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
एसएमओ डॉ. बलजीत कौर तथा बच्चों के विशेषज्ञ डाक्टर व मेडिकल अधिकारी मुनीष गुप्ता ने अभिभावकों से बातचीत करके समझाया कि कोई ठोस कारण बताया नहीं जा सकता है। एक या दो फीसदी बच्चों या मरीजों को किसी भी दवा का रिएक्शन होने की संभावना हमेशा रहती है। विद्यार्थियों की हालत स्थिर है, लिहाजा घबराएं नहीं। सेहत विभाग की टीम ने गांव नगंला का दौरा करके हालात का जायजा लिया।