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ट्यूबवेलों के पानी को जांचेगा खेतीबाड़ी विभाग
Patiala
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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पटियाला। अब खेतीबाड़ी के लिए अयोग्य पानी से फसलों को कोई नुकसान नहीं होगा। खेतीबाड़ी विभाग ने गांव-गांव जाकर खेती ट्यूबवेलों के पानी की मुफ्त जांच करने का फैसला लिया है। इसके लिए टीमों का गठन कर दिया गया है, जो मौके पर ही पानी के सैंपल की जांच करके रिपोर्ट किसान को बताएंगी। पानी फसलों के लिए अयोग्य पाए जाने पर किसानों को इसका उचित हल भी बताया जाएगा।
जिले के विभिन्न ब्लाकों में ट्यूबवेलों के पानी में नमक और सोडियम काफी पाया जाता है। अक्सर किसान अज्ञानतावश इस पानी को खेतीबाड़ी के लिए इस्तेमाल कर लेते हैं, जिससे फसलों को काफी नुकसान पहुंचता है और किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। इसलिए खेतीबाड़ी विभाग 27 नवंबर से खास तौर से गेहूं सीजन के लिए टीमें बनाकर गांव-गांव जाकर खेतीबाड़ी ट्यूबवेलों के पानी की मुफ्त जांच का काम शुरू करने जा रहा है। इस दौरान मौके पर ही पानी के सैंपल की जांच करके बताया जाएगा कि पानी में कहीं ज्यादा नमक और सोडियम तो नहीं है। इस तरह का पानी फसलों को नुकसान पहुंचाता है।
मुख्य खेतीबाड़ी अफसर बलविंदर सिंह सोहल ने बताया कि नमक और सोडियम वाले पानी से फसलों की सिंचाई करने से पौधे की जड़ में नमक व सोडियम जमा हो जाते हैं। जिससे पौधों को न तो पानी और न ही खाद मिल पाती है, इससे पौधे मर जाते हैं। टीमों की ओर से जांच के बाद प्रभावित किसानों को नमक व सोडियम का प्रभाव खत्म करने के लिए खेतों में जिप्सम डालने और हरी खाद बीजने की सलाह दी जाएगी। साथ ही किसानों को ट्यूबवेलों के साथ-साथ नहरी पानी का प्रयोग करने को भी कहा जाएगा।
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सरसों का रकबा हुआ दोगुना
जिले में सरसों का रकबा पिछले साल की तुलना में इस बार दोगुना हो गया है। खेतीबाड़ी विभाग की ओर से किसानों को धान व गेहूं के परंपरागत फसली चक्र से निकालने के लिए किसानों को एक एकड़ के बीज पर 100 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। साथ ही किसानों को धान व गेहूं के अलावा अन्य फसलें लगाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। जिसके नतीजे में सरसों का रकबा 1000 हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल यह रकबा 500 हेक्टेयर था।
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जिले के विभिन्न ब्लाकों में ट्यूबवेलों के पानी में नमक और सोडियम काफी पाया जाता है। अक्सर किसान अज्ञानतावश इस पानी को खेतीबाड़ी के लिए इस्तेमाल कर लेते हैं, जिससे फसलों को काफी नुकसान पहुंचता है और किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। इसलिए खेतीबाड़ी विभाग 27 नवंबर से खास तौर से गेहूं सीजन के लिए टीमें बनाकर गांव-गांव जाकर खेतीबाड़ी ट्यूबवेलों के पानी की मुफ्त जांच का काम शुरू करने जा रहा है। इस दौरान मौके पर ही पानी के सैंपल की जांच करके बताया जाएगा कि पानी में कहीं ज्यादा नमक और सोडियम तो नहीं है। इस तरह का पानी फसलों को नुकसान पहुंचाता है।
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मुख्य खेतीबाड़ी अफसर बलविंदर सिंह सोहल ने बताया कि नमक और सोडियम वाले पानी से फसलों की सिंचाई करने से पौधे की जड़ में नमक व सोडियम जमा हो जाते हैं। जिससे पौधों को न तो पानी और न ही खाद मिल पाती है, इससे पौधे मर जाते हैं। टीमों की ओर से जांच के बाद प्रभावित किसानों को नमक व सोडियम का प्रभाव खत्म करने के लिए खेतों में जिप्सम डालने और हरी खाद बीजने की सलाह दी जाएगी। साथ ही किसानों को ट्यूबवेलों के साथ-साथ नहरी पानी का प्रयोग करने को भी कहा जाएगा।
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सरसों का रकबा हुआ दोगुना
जिले में सरसों का रकबा पिछले साल की तुलना में इस बार दोगुना हो गया है। खेतीबाड़ी विभाग की ओर से किसानों को धान व गेहूं के परंपरागत फसली चक्र से निकालने के लिए किसानों को एक एकड़ के बीज पर 100 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। साथ ही किसानों को धान व गेहूं के अलावा अन्य फसलें लगाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। जिसके नतीजे में सरसों का रकबा 1000 हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले साल यह रकबा 500 हेक्टेयर था।