पत्रकार बनकर समाज में बढ़ते भ्रष्टाचार को रोकने के लिए काम करना चाहती है हश्मिता

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Updated Tue, 18 Jul 2017 10:03 PM IST

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‘भ्रष्टाचार से लड़ना चाहती है हश्मिता’
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हश्मिता की शिकायत पर राजघाट समाधि समिति ने पीएमओ की हिदायतों पर सारा स्टाफ बदला था
विदेशी सैलानियों से जूता रखने को लिए जा रहे थे 100 रुपये प्रति व्यक्ति शुल्क
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला।
कसबा सन्नौर की रहने वाली सातवीं क्लास की छात्रा हश्मिता भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ना चाहती है। यह हश्मिता वही है, जिसकी शिकायत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के समाधि स्थल राजघाट का सारा स्टाफ बदल दिया था। हश्मिता ने अमर उजाला को बताया कि स्कूल में उसने एक्सट्रा एक्टिविटी के तौर पर जर्नलिज्म विषय लिया हुआ है। वह पत्रकार बनकर समाज में फैली बुराइयों व भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए सक्रियता से काम करना चाहती है।
राजघाट समाधि समिति से आए लैटर को दिखाते हुए हश्मिता व उसके पिता अमरदीप सिंह काफी खुश थे। हश्मिता ने बताया कि वह पिछले साल दिसंबर की छुट्टियों में पूरे परिवार के साथ दिल्ली घूमने गई थी। जब वह लोग राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के समाधि स्थल राजघाट पहुंचे। समाधि पर नमन करने के बाद जब वह बाहर आए, तो उनसे वहां जूता रखने के लिए 10 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से शुल्क मांगा गया। जबकि असल में शुल्क प्रति व्यक्ति एक रुपये है। विदेशी सैलानियों से तो वहां का स्टाफ 50 रुपये से लेकर 100 रुपये तक प्रति व्यक्ति वसूल कर रहा था। यह सरासर लूट थी। पटियाला लौटने के कई दिनों के बाद जनवरी 2017 के अंत में हश्मिता ने जिद कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पत्र लिखा, जिसमें उसने समाधि स्थल राजघाट पर विदेशी सैलानियों के साथ हो रही लूट खसोट के बारे में शिकायत की।

इंडस्ट्री विभाग में सरकारी नौकरी कर रहे पिता अमरदीप सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले राजघाट समाधि समिति का लैटर उन्हें मिला है, जिसमें उन्होंने कहा है कि पीएमओ से मिली सख्त हिदायतों पर उन्होंने जांच के बाद सारे स्टाफ को बदल दिया है। अब ईमानदार स्टाफ को रखा गया है। साथ ही अब भविष्य में ऐसा न हो, इसके लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगा दिए गए हैं। साथ ही शू रैक के नजदीक सीआईएसएफ का एक जवान भी लगा दिया है। पहले वहां कोई सिक्योरिटी का इंतजाम नहीं था। अमरदीप सिंहने बताया कि हश्मिता पीएम मोदी की नीतियों की काफी फैन है। खास तौर से उनके बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान से प्रभावित है। साथ ही हश्मिता अकसर गरीबों की मदद करना पसंद करती है। वह दिव्यांगों के प्रति हमदर्दी नहीं, बल्कि प्रेम की भावना के साथ पेश आती है।

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