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नए सेशन से स्कूल प्रबंधकों के चेहरों पर आई मुस्कान

Mon, 14 Mar 2022 02:02 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Mon, 14 Mar 2022 02:02 AM IST
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The new session brought a smile on the faces of the school managers
मोहाली। करीब दो साल बाद अप्रैल में शुरू होने वाले नए सेशन ने स्कूल प्रबंधकों के चेहरों पर मुस्कान ला दी है। इसके साथ ही नए सेशन में दाखिले को लेकर स्कूल में आने वाले परिजनों के लिए प्रबंधकों की ओर से तैयारियां जोरों से चल रही है, जिससे अधिक से अधिक बच्चों का दाखिल किया जा सके। जबकि पिछले दो साल के दौरान विद्यार्थी घर में बैठकर ऑनलाइन क्लासेज ले रहे हैं। इससे विद्यार्थयों का मानसिक विकास तो रहा है, लेकिन शारीरिक रूप से विद्यार्थी कमजोर हो रहे हैं।
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जानकारी के मुताबिक कोरोना महामारी ने मार्च 2020 में देश में अपनी दस्तक दी थी और इस भयंकर महामारी ने उद्योग जगत ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों पर अपना सबसे ज्यादा असर डाला है। दरअसल कोरोना महामारी के प्रकोप से लोगों को बचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से शैक्षणिक संस्थान पूर्ण रूप से बंद कर दिए, जिसका असर यह हुआ है कि अधिकतर बच्चों के परिजनों ने मासिक फीस की अदायगी बंद कर दी, जबकि कुछ परिजन ऐसे थे, जिन्होंने अपने बच्चों का नाम स्कूल से कटवाकर सरकारी स्कूल में दाखिला करवा दिया। दूसरी ओर, परिजनों की ओर से मासिक फीस की अदायगी न होने से प्रबंधकों को स्टाफ के सदस्यों को वेतन सहित अन्य खर्चों में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
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उम्मीद है हालात सामान्य हो जाएंगे
कोरोना महामारी की सबसे ज्यादा मार हम स्कूल प्रबंधकों पर पड़ी हैं और हालत ऐसी हो गई है कि स्टाफ को वेतन तक देने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जबकि स्कूल बस के ड्राइवर को अन्य काम करके गुजारा करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उम्मीद करते हैं कि अब लोगों के अंदर कोरोना महामारी का खतरा पहले जैसा नहीं होने से हालात सामान्य हों जाएं। इसलिए हमारी ओर से आने वाले नए दाखिले को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। -सौरभ अग्निहोत्री, डायरेक्टर, एसी नेशनल स्कूल।
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सैलरी में करनी पड़ी कटौती
कोरोना महामारी का असर यह हुआ है कि अधिकतर परिजनों ने फीस तक जमा नहीं की और कुछ लोगों ने फीस की अदायगी किए बिना ही बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में करवा दिया। लेकिन प्रबंधकों के लिए स्टाफ की सैलरी और अन्य खर्चों का बोझ पहले की तरह ही चलता रहा और मजबूरी में स्टाफ की सैलरी में भी कटौती करनी पड़ी।
-जगतार सिंह सोढ़ी, चेयरमैन, जीएस मेमोरियल स्कूल।
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