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लापरवाही की हद.. कैसे जीतेंगे कोरोना से जंग, बिना टीकाकरण जारी कर दिया प्रमाण पत्र
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पत्नी के साथ अनिल अग्रवाल।
- फोटो : MOHALI
मोहाली। कोरोना के बढ़ते प्रकोप से लोग डरे हुए हैं। बचाव के लिए टीकाकरण से उम्मीद है, लेकिन टीकाकरण में ही जब गड़बड़ी होने लगे तो लोग क्या करें। मोहाली में एक ऐसा ही मामला सामने आया है। जिसमें टीकाकरण के बिना ही प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। यह कारनामा वीआईपी सिटी के एक नामी निजी अस्पताल ने किया है। मामला उठाए जाने पर सेहत विभाग ने जांच शुरू कर दी है।
मोहाली के फेज-2 में अनिल अग्रवाल अपने परिवार के साथ रहते हैं। अनिल ने टीकाकरण का तीसरा चरण शुरू होते ही एक अप्रैल को वैक्सीन की पहली डोज ली। इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी सपना अग्रवाल और अपने ससुर के टीकाकरण के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करवाया। उन्होंने एप के जरिये करवाए पंजीकरण में टीकाकरण के लिए शहर के नामी निजी अस्पताल को चुना। टीकाकरण के लिए 3 अप्रैल का दिन निर्धारित हुआ। अनिल बताते हैं कि निर्धारित दिन उनकी पत्नी व ससुर वैक्सीन लगवाने के लिए नहीं जा सके। अस्पताल से संपर्क करने पर उनके रजिस्ट्रेशन को रीशैड्यूल करने की बात कही गई। लेकिन अगले ही दिन यानी रविवार को उनके फोन पर एक मैसेज आया। जिसमें बताया गया कि उनका टीकाकरण हो गया है। साथ ही ऑनलाइन प्रमाण पत्र भी जारी हो गया। जिसमें टीकाकरण का समय दोपहर एक बजकर 33 मिनट बताया गया और साथ ही वैक्सीन देने वाला का नाम भी प्रमाण पत्र में अंकित है। शहर के इस नामी निजी अस्पताल ने बिना वैक्सीन दिए ही दोनों लोगों को वैक्सीन दिया जाना रिकार्ड में दर्ज कर दिया। इससे जहां वैक्सीनेशन ड्राइव पर सवाल खड़े हुए हैं, वहीं इन लोगों के सामने अब वैक्सीन की डोज लेने की समस्या भी पैदा हो गई है। क्योंकि सरकारी रिकार्ड में इन दोनों का टीकाकरण हो चुका है। अनिल ने पूरे मामले की शिकायत हेल्पलाइन पर की। मामला सिविल सर्जन के पास भी पहुंचा। जिसके बाद जांच का आदेश दे दिया है।
लापरवाही का जिम्मेदार कौन
वकील अनिल अग्रवाल कहते हैं कि इस मामले ने टीकाकरण के सरकारी आंकड़ों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि जब टीकाकरण हुआ ही नहीं, तो फिर रिकार्ड में उसे दर्ज कैसे कर दिया गया। टीकाकरण अभियान चूंकि आधार नंबर से जुड़ा है, ऐसे में अब अगर उनकी पत्नी व ससुर वैक्सीन लेने के लिए जाते हैं तो रिकार्ड में उन्हें वैक्सीन की पहली डोज मिल चुकी है। जो दोबारा नहीं दी जा सकती। इस तरह उनकी पत्नी व ससुर वैक्सीन की डोज लेने से वंचित रह जाएंगे। अनिल कहते हैं कि उन्होंने सुविधा के लिहाज से शहर के नामी निजी अस्पताल का चयन किया था। वहीं इस तरह की लापरवाही बरती जा रही है तो इसका जिम्मेदार कौन है।
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बिना टीकाकरण प्रमाण पत्र जारी होने का मामला सामने आया है। यह गंभीर विषय है। हमने इसकी जांच शुरू कर दी है। जांच में जिसकी गलती पाई जाएगी उस पर कार्रवाई होगी। - डॉ. आदर्शपाल कौर, सिविल सर्जन मोहाली
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मोहाली के फेज-2 में अनिल अग्रवाल अपने परिवार के साथ रहते हैं। अनिल ने टीकाकरण का तीसरा चरण शुरू होते ही एक अप्रैल को वैक्सीन की पहली डोज ली। इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी सपना अग्रवाल और अपने ससुर के टीकाकरण के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करवाया। उन्होंने एप के जरिये करवाए पंजीकरण में टीकाकरण के लिए शहर के नामी निजी अस्पताल को चुना। टीकाकरण के लिए 3 अप्रैल का दिन निर्धारित हुआ। अनिल बताते हैं कि निर्धारित दिन उनकी पत्नी व ससुर वैक्सीन लगवाने के लिए नहीं जा सके। अस्पताल से संपर्क करने पर उनके रजिस्ट्रेशन को रीशैड्यूल करने की बात कही गई। लेकिन अगले ही दिन यानी रविवार को उनके फोन पर एक मैसेज आया। जिसमें बताया गया कि उनका टीकाकरण हो गया है। साथ ही ऑनलाइन प्रमाण पत्र भी जारी हो गया। जिसमें टीकाकरण का समय दोपहर एक बजकर 33 मिनट बताया गया और साथ ही वैक्सीन देने वाला का नाम भी प्रमाण पत्र में अंकित है। शहर के इस नामी निजी अस्पताल ने बिना वैक्सीन दिए ही दोनों लोगों को वैक्सीन दिया जाना रिकार्ड में दर्ज कर दिया। इससे जहां वैक्सीनेशन ड्राइव पर सवाल खड़े हुए हैं, वहीं इन लोगों के सामने अब वैक्सीन की डोज लेने की समस्या भी पैदा हो गई है। क्योंकि सरकारी रिकार्ड में इन दोनों का टीकाकरण हो चुका है। अनिल ने पूरे मामले की शिकायत हेल्पलाइन पर की। मामला सिविल सर्जन के पास भी पहुंचा। जिसके बाद जांच का आदेश दे दिया है।
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लापरवाही का जिम्मेदार कौन
वकील अनिल अग्रवाल कहते हैं कि इस मामले ने टीकाकरण के सरकारी आंकड़ों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि जब टीकाकरण हुआ ही नहीं, तो फिर रिकार्ड में उसे दर्ज कैसे कर दिया गया। टीकाकरण अभियान चूंकि आधार नंबर से जुड़ा है, ऐसे में अब अगर उनकी पत्नी व ससुर वैक्सीन लेने के लिए जाते हैं तो रिकार्ड में उन्हें वैक्सीन की पहली डोज मिल चुकी है। जो दोबारा नहीं दी जा सकती। इस तरह उनकी पत्नी व ससुर वैक्सीन की डोज लेने से वंचित रह जाएंगे। अनिल कहते हैं कि उन्होंने सुविधा के लिहाज से शहर के नामी निजी अस्पताल का चयन किया था। वहीं इस तरह की लापरवाही बरती जा रही है तो इसका जिम्मेदार कौन है।
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बिना टीकाकरण प्रमाण पत्र जारी होने का मामला सामने आया है। यह गंभीर विषय है। हमने इसकी जांच शुरू कर दी है। जांच में जिसकी गलती पाई जाएगी उस पर कार्रवाई होगी। - डॉ. आदर्शपाल कौर, सिविल सर्जन मोहाली