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स्टाफ सिलेक्शन कमीशन फर्जी भर्ती मामला: 22 साल बाद दो आरोपी बरी

Sat, 25 Jul 2026 02:06 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2026 02:06 AM IST
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Staff Selection Commission fake recruitment case: Two accused acquitted after 22 years
मोहाली। स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (एसएससी) की कथित फर्जी भर्ती से जुड़े करीब 22 साल पुराने मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने दो आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया।
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मामले में जरनैल सिंह, पूर्व वरिष्ठ कर सहायक, और जरनैल सिंह, निवासी सिरसा, हरियाणा, आरोपी थे। इन पर आयकर विभाग में फर्जी नामांकन पत्रों के आधार पर नियुक्तियां हासिल करने का आरोप था। सीबीआई ने 31 मार्च 2004 को एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि वर्ष 1990 से 1992 के दौरान फर्जी नामांकन पत्रों का उपयोग किया गया। ये नियुक्तियां आयकर विभाग (उत्तर-पश्चिम क्षेत्र चंडीगढ़) में स्टेनो, यूडीसी, एलडीसी और इंस्पेक्टर के पदों पर हुई थीं। जांच में सामने आया था कि 25 उम्मीदवारों के रोल नंबर एसएससी के घोषित परिणामों में नहीं थे। आरोप था कि इन उम्मीदवारों ने अज्ञात अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी नियुक्तियां प्राप्त कीं। वे एफआईआर दर्ज होने तक सेवा में बने रहे। अदालत ने अपने फैसले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 23 मई 2022 के एक निर्णय का भी उल्लेख किया। उस निर्णय में इसी मामले के सह-आरोपी लखवीर सिंह और अशोक कुमार सहित अन्य बरी हुए थे।
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अभियोजन पक्ष की विफलताएं

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज होने का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सका। कथित फर्जी डोजियर और नियुक्ति पत्रों के मूल दस्तावेज भी पेश नहीं किए गए। यह भी साबित नहीं हो सका कि फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए थे। द्वितीयक साक्ष्य पेश करने की अनुमति नहीं ली गई और न ही विशेषज्ञ गवाह से जांच कराई गई। ऐसे में उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्य आरोपियों का अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
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दर्ज की गई धाराएं

सीबीआई ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। इनमें धारा 120-बी, 420, 467, 468 और 471 शामिल थीं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1) एवं 13(2) भी लगाई गई थी। ये धाराएं आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार से संबंधित थीं।
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