{"_id":"5f4035d68ebc3e3cea20297f","slug":"murder-section-to-be-levied-against-former-dgp-in-29-year-old-case-mohali-news-pkl38539665","type":"story","status":"publish","title_hn":"29 साल पुराने मामले में पूर्व डीजीपी के खिलाफ लगेगी हत्या की धारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
29 साल पुराने मामले में पूर्व डीजीपी के खिलाफ लगेगी हत्या की धारा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मोहाली। 29 साल पुराने आईएएस के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी के अपहरण मामले में अब पंजाब पुलिस के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी मुश्किल में आ गए हैं। अदालत ने मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेटिगेशन टीम (एसआईटी) को केस में धारा 302 जोड़ने की अनुमति दे दी है। इससे साफ हो गया है कि अब सैनी व मामले के अन्य पांच आरोपियों पर बलवंत सिंह मुल्तानी को अगवा करने के साथ ही हत्या का केस भी चलेगा।
वहीं, एसआईटी को आदेश दिए गए हैं कि इस संबंध में सैनी व अन्य आरोपियों को गिरफ्तारी से पहले तीन दिन का नोटिस भेजा जाए। इसके बाद ही उनकी गिरफ्तार होगी। एसआईटी ने इस मामले में धारा जोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी है। हालांकि इस मामले में मोहाली पुलिस के सारे सीनियर अधिकारी कुछ भी बोलने से बचते रहे। दूसरी तरफ सैनी पहले ही इस मामले में हाईकोर्ट जा चुके हैं। उन्होंने पंजाब पुलिस की बजाय किसी अन्य एजेंसी से केस की जांच करवाने की मांग की है।
जानकारी के मुताबिक बलवंत सिंह मुल्तानी अपहरण मामले में एसआईटी बड़ी तेजी से जांच कर रही है। इससे पहले सैनी के साथ मामले में नामजद दो आरोपी जागीर सिंह व कुलदीप सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। वह दोनों चंडीगढ़ पुलिस के पूर्व मुलाजिम हैं। दोनों ने अदालत में 164 के बयान दर्ज करवाए हैं। साथ ही सैनी द्वारा बलवंत सिंह मुल्तानी पर किए गए अत्याचार के बारे में बताया। इसके बाद ही साफ हो गया था कि पुलिस इस मामले में सैनी व अन्य आरोपियों पर धारा 302 के तहत केस दर्ज होगा। लेकिन आईपीएस अधिकारी व पंजाब पुलिस के डीजीपी रह चुके व्यक्ति पर हत्या की धारा लगाकर केस चलाने में बाद मेें कोई मुश्किल न आए ऐसे में पुलिस द्वारा पूरी प्लानिंग के तहत अदालत में अर्जी लगाई गई थी। हालांकि अदालत ने कहा है कि इस मामले में पूर्व डीजीपी सैनी को गिरफ्तार करने से पहले उन्हें तीन दिन का नोटिस दिया जाए। जिक्रयोग है कि पूर्व डीजीपी सैनी समेत सात लोगों पर मोहाली के मटौर थाने में कुछ समय पहले बलवंत सिंह मुल्तानी के अपहरण का केस दर्ज हुआ था। फिलहाल डीजीपी जमानत पर चल रहे हैं। वहीं, उन्होंने इस मामले में अब हाईकोर्ट में शरण ली है।
विज्ञापन
इसलिए अदालत में दायर की थी अर्जी
जानकारी के मुताबिक सरकारी पक्ष की तरफ से अदालत में एक अर्जी दायर की गई थी। इसमें बताया गया था कि मुल्तानी अगवा केस में छह मई 2020 को आईपीसी की धारा 364, 201, 334, 330, 219, 120 बी के तहत केस दर्ज किया गया था। एफआईआर में सैनी के अलावा चंडीगढ़ पुलिस के पूर्व अधिकारी जागरी सिंह, कुलदीप सिंह, हरसहाय शर्मा को मिलाकर कुल सात लोग शामिल थे। इस संबंधी सरकारी पक्ष ने अदालत में कहा कि जमानत पर चल रहे मुलाजिमों के खिलाफ केस में धारा की बढ़ोतरी करने से पहले अदालत से मंजूरी लेनी जरूरी थी। इसलिए अदालत की तरफ से इस संबंध में आदेश जारी किए गए।
दोनों सरकारी गवाहों ने बताई है यह कहानी
जागीर सिंह ने अदालत में दिए बयान में कहा है कि 1991 में सुमेध सिंह सैनी जब चंडीगढ़ के एसएसपी थे। उस समय उनपर आतंकी हमला हुआ था। हमले में तीन लोगों की मौत हो गई थी। जबकि सैनी का बचाव हो गया था। वह बंब धमाके के बाद सेक्टर-17 के थाने में गया। जहां पर सुमेध सिंह सैनी व अन्य अफसर बैठे हुए थे। वहीं, बलवंत सिंह मुल्लानी को बलास्ट केस में उठाकर लाए थे। उससे पूछताछ की जा रही थी। उसने कहा कि सुमेध सिंह सैनी के कहने पर बलवंत सिंह मुल्तानी को यातना दी थी जिससे वह जख्मी हो गया। वह अगले दिन सेक्टर-17 के थाने गया। जहां पर मुल्तानी फर्श पर पड़ा हुआ तड़प रहा था। बाद में सुमेध सिंह सैनी ने उसे थाने बुलाया साथ ही कहा कि बलवंत सिंह मुल्तानी की मौत हो गई है। वह इस मामले को खुुर्द बुर्द कर दे। जागीर सिंह ने कहा कि वह टीम को लेकर थाना कादियां गया। जहां पर बलवंत सिंह मुल्लानी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे भगोड़ा दिखा दिया।
कुलदीप सिंह ने यह सच बताया था
इसी तरह पूर्व थानेदार कुलदीप सिंह ने अदालत को बताया कि सुमेध सिंह सैनी ने इस मामले में एक जांच टीम गठित की थी। ताकि मुल्तानी की लाश को खुर्द बुर्द कर केस दर्ज किया जा सके। वह जागीर सिंह, अनोख सिंह व अन्य कादियां थाने में गए। जहां पर मुल्लानी के खिलाफ केस दर्ज करवाकर उसे भगोड़ा करार दे दिया गया।
विज्ञापन
वहीं, एसआईटी को आदेश दिए गए हैं कि इस संबंध में सैनी व अन्य आरोपियों को गिरफ्तारी से पहले तीन दिन का नोटिस भेजा जाए। इसके बाद ही उनकी गिरफ्तार होगी। एसआईटी ने इस मामले में धारा जोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी है। हालांकि इस मामले में मोहाली पुलिस के सारे सीनियर अधिकारी कुछ भी बोलने से बचते रहे। दूसरी तरफ सैनी पहले ही इस मामले में हाईकोर्ट जा चुके हैं। उन्होंने पंजाब पुलिस की बजाय किसी अन्य एजेंसी से केस की जांच करवाने की मांग की है।
विज्ञापन
जानकारी के मुताबिक बलवंत सिंह मुल्तानी अपहरण मामले में एसआईटी बड़ी तेजी से जांच कर रही है। इससे पहले सैनी के साथ मामले में नामजद दो आरोपी जागीर सिंह व कुलदीप सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। वह दोनों चंडीगढ़ पुलिस के पूर्व मुलाजिम हैं। दोनों ने अदालत में 164 के बयान दर्ज करवाए हैं। साथ ही सैनी द्वारा बलवंत सिंह मुल्तानी पर किए गए अत्याचार के बारे में बताया। इसके बाद ही साफ हो गया था कि पुलिस इस मामले में सैनी व अन्य आरोपियों पर धारा 302 के तहत केस दर्ज होगा। लेकिन आईपीएस अधिकारी व पंजाब पुलिस के डीजीपी रह चुके व्यक्ति पर हत्या की धारा लगाकर केस चलाने में बाद मेें कोई मुश्किल न आए ऐसे में पुलिस द्वारा पूरी प्लानिंग के तहत अदालत में अर्जी लगाई गई थी। हालांकि अदालत ने कहा है कि इस मामले में पूर्व डीजीपी सैनी को गिरफ्तार करने से पहले उन्हें तीन दिन का नोटिस दिया जाए। जिक्रयोग है कि पूर्व डीजीपी सैनी समेत सात लोगों पर मोहाली के मटौर थाने में कुछ समय पहले बलवंत सिंह मुल्तानी के अपहरण का केस दर्ज हुआ था। फिलहाल डीजीपी जमानत पर चल रहे हैं। वहीं, उन्होंने इस मामले में अब हाईकोर्ट में शरण ली है।
विज्ञापन
इसलिए अदालत में दायर की थी अर्जी
जानकारी के मुताबिक सरकारी पक्ष की तरफ से अदालत में एक अर्जी दायर की गई थी। इसमें बताया गया था कि मुल्तानी अगवा केस में छह मई 2020 को आईपीसी की धारा 364, 201, 334, 330, 219, 120 बी के तहत केस दर्ज किया गया था। एफआईआर में सैनी के अलावा चंडीगढ़ पुलिस के पूर्व अधिकारी जागरी सिंह, कुलदीप सिंह, हरसहाय शर्मा को मिलाकर कुल सात लोग शामिल थे। इस संबंधी सरकारी पक्ष ने अदालत में कहा कि जमानत पर चल रहे मुलाजिमों के खिलाफ केस में धारा की बढ़ोतरी करने से पहले अदालत से मंजूरी लेनी जरूरी थी। इसलिए अदालत की तरफ से इस संबंध में आदेश जारी किए गए।
दोनों सरकारी गवाहों ने बताई है यह कहानी
जागीर सिंह ने अदालत में दिए बयान में कहा है कि 1991 में सुमेध सिंह सैनी जब चंडीगढ़ के एसएसपी थे। उस समय उनपर आतंकी हमला हुआ था। हमले में तीन लोगों की मौत हो गई थी। जबकि सैनी का बचाव हो गया था। वह बंब धमाके के बाद सेक्टर-17 के थाने में गया। जहां पर सुमेध सिंह सैनी व अन्य अफसर बैठे हुए थे। वहीं, बलवंत सिंह मुल्लानी को बलास्ट केस में उठाकर लाए थे। उससे पूछताछ की जा रही थी। उसने कहा कि सुमेध सिंह सैनी के कहने पर बलवंत सिंह मुल्तानी को यातना दी थी जिससे वह जख्मी हो गया। वह अगले दिन सेक्टर-17 के थाने गया। जहां पर मुल्तानी फर्श पर पड़ा हुआ तड़प रहा था। बाद में सुमेध सिंह सैनी ने उसे थाने बुलाया साथ ही कहा कि बलवंत सिंह मुल्तानी की मौत हो गई है। वह इस मामले को खुुर्द बुर्द कर दे। जागीर सिंह ने कहा कि वह टीम को लेकर थाना कादियां गया। जहां पर बलवंत सिंह मुल्लानी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उसे भगोड़ा दिखा दिया।
कुलदीप सिंह ने यह सच बताया था
इसी तरह पूर्व थानेदार कुलदीप सिंह ने अदालत को बताया कि सुमेध सिंह सैनी ने इस मामले में एक जांच टीम गठित की थी। ताकि मुल्तानी की लाश को खुर्द बुर्द कर केस दर्ज किया जा सके। वह जागीर सिंह, अनोख सिंह व अन्य कादियां थाने में गए। जहां पर मुल्लानी के खिलाफ केस दर्ज करवाकर उसे भगोड़ा करार दे दिया गया।