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Mohali News: सिल्क पेंटिंग से बना दिया दुनिया को दीवाना
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मोहाली। पहले इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग फिर जीएनडीयू से इंग्लिश में मास्टर डिग्री और इसके बाद बीएड। इतनी सारी डिग्री लेने के बाद भी कंवलदीप कौर का नाम बनाया उनके बचपन के शौक ने। उनका यह खास शौक है पेंटिंग का। अब उनकी सिल्क पेंटिंग की दीवानी दुनिया है।बचपन में वह एक्रेलिक कलर्स से पेंटिंग करती थीं, पर जब उन्होंने सिल्क पेंटिंग की शुरुआत की तो सभी ने दांतों तले अंगुलियां दबा ली। अब उनके द्वारा सिल्क पेंट किए हुए स्कार्फ, साड़ियां और दुपट्टा यूएस, कनाडा, उजबेकिस्तान, कजाकिस्तान तक जाते हैं। कंवलदीप कौर अकेले ही काम करती हैं। वह बताती हैं कि जब एकबार काम शुरू हो जाता है तो फिर रुकता नहीं। चाहे कितना भी समय लग जाए।
कंवलदीप कौर ने बताया कि उनको बचपन से पेंटिंग का शौक था। पहले वह एक्रेलिक कलर्स से पेंटिंग करती थीं। मेहर चंद पाॅलिटेक्निकल जालंधर से इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया, फिर कन्या महाविद्यालय जालंधर से ग्रेजुएशन की। इसके बाद जीएनडीयू अमृतसर से इंग्लिश में मास्टर डिग्री की और फिर मोंगा से बीएड भी कर डाली। लेकिन उनका पेंटिंग का शौक कभी नहीं छूटा था। जब भी मौका मिलता तो पेंटिंग करने बैठ जाती थीं।उन्होंने बताया कि सिल्क पेंटिंग में चैलेंज लगा। फिर खुद ही उसको सीखना शुरू किया। उन्होंने बताया कि सिल्क पेंटिंग को वास्तव में गुट्टा सेरती कहा जाता है। यह एक फ्रेंच शब्द है। जिसमें गुट्टा एक मैटीरियल है जो कि इंडोनेशिया से आता है। सेरती पेंटिंग की एक तकनीक है। यह पेंटिंग आमतौर पर सफेद कपड़े पर ही करते हैं। इसमें सिल्क की डाई और सिल्क पेंट लगाते हैं। उन्होंने बताया कि पेंट करने के बाद उसको फिक्स करना काफी ज्यादा जरूरी होता है। इसी वजह से सिल्क डाइज को डेढ़ घंटा तक स्टीम करते हैं।
उन्होंने कहा कि जब सीख रहीं थीं तो कई प्रयोग किए और प्रयोग करते करते उनको यह कला बेहतरीन ढंग से आ गईं। अब कुछ आनलाइन क्लासेस में वह इसके संबंध में जानकारी भी देती हैं। उन्होंने बताया कि उनके पति कर्नल जगदीप भोगल उनको काफी सपोर्ट करते हैं।
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गिफ्ट कर देती थीं स्कार्फ
कंवलदीप कौर ने बताया कि वह सिल्क पेंट किए हुए स्कार्फ अपनी सहेलियों को गिफ्ट कर देती थीं। एक दिन आर्मी में सीनियर अधिकारी रहीं रेखा कपूर ने उनको कहा कि आप अपनी कला को फ्री में मत दिया करें। इसके साथ ही रेखा कपूर ने उनको पांच सौ रुपये दिए और दुपट्टा लिया।
एक दुपट्टा एक दिन में पेंट
कंवलदीप कौर ने बताया कि एक दुपट्टे को सिल्क पेंट करना हो तो कम से कम तीन दिन लगते हैं। उन्होंने बताया कि यदि पत्ती बनानी है तो पहले उसकी किनारी बनाई जाती है जिससे कि कलर्स बाहर न जाएं, उसके साथ ही बैकग्राउंड किया जाता है। बैकग्राउंड करने में सावधानी यह बरती जाती है कि जल्द कर दिया जाए, जिससे स्पाट न पड़े।
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कंवलदीप कौर ने बताया कि उनको बचपन से पेंटिंग का शौक था। पहले वह एक्रेलिक कलर्स से पेंटिंग करती थीं। मेहर चंद पाॅलिटेक्निकल जालंधर से इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया, फिर कन्या महाविद्यालय जालंधर से ग्रेजुएशन की। इसके बाद जीएनडीयू अमृतसर से इंग्लिश में मास्टर डिग्री की और फिर मोंगा से बीएड भी कर डाली। लेकिन उनका पेंटिंग का शौक कभी नहीं छूटा था। जब भी मौका मिलता तो पेंटिंग करने बैठ जाती थीं।उन्होंने बताया कि सिल्क पेंटिंग में चैलेंज लगा। फिर खुद ही उसको सीखना शुरू किया। उन्होंने बताया कि सिल्क पेंटिंग को वास्तव में गुट्टा सेरती कहा जाता है। यह एक फ्रेंच शब्द है। जिसमें गुट्टा एक मैटीरियल है जो कि इंडोनेशिया से आता है। सेरती पेंटिंग की एक तकनीक है। यह पेंटिंग आमतौर पर सफेद कपड़े पर ही करते हैं। इसमें सिल्क की डाई और सिल्क पेंट लगाते हैं। उन्होंने बताया कि पेंट करने के बाद उसको फिक्स करना काफी ज्यादा जरूरी होता है। इसी वजह से सिल्क डाइज को डेढ़ घंटा तक स्टीम करते हैं।
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उन्होंने कहा कि जब सीख रहीं थीं तो कई प्रयोग किए और प्रयोग करते करते उनको यह कला बेहतरीन ढंग से आ गईं। अब कुछ आनलाइन क्लासेस में वह इसके संबंध में जानकारी भी देती हैं। उन्होंने बताया कि उनके पति कर्नल जगदीप भोगल उनको काफी सपोर्ट करते हैं।
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गिफ्ट कर देती थीं स्कार्फ
कंवलदीप कौर ने बताया कि वह सिल्क पेंट किए हुए स्कार्फ अपनी सहेलियों को गिफ्ट कर देती थीं। एक दिन आर्मी में सीनियर अधिकारी रहीं रेखा कपूर ने उनको कहा कि आप अपनी कला को फ्री में मत दिया करें। इसके साथ ही रेखा कपूर ने उनको पांच सौ रुपये दिए और दुपट्टा लिया।
एक दुपट्टा एक दिन में पेंट
कंवलदीप कौर ने बताया कि एक दुपट्टे को सिल्क पेंट करना हो तो कम से कम तीन दिन लगते हैं। उन्होंने बताया कि यदि पत्ती बनानी है तो पहले उसकी किनारी बनाई जाती है जिससे कि कलर्स बाहर न जाएं, उसके साथ ही बैकग्राउंड किया जाता है। बैकग्राउंड करने में सावधानी यह बरती जाती है कि जल्द कर दिया जाए, जिससे स्पाट न पड़े।