{"_id":"67d9da93d513d99eef097798","slug":"information-given-on-domestic-violence-cruelty-and-sexual-harassment-at-workplace-mohali-news-c-71-1-mli1005-126735-2025-03-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mohali News: घरेलू हिंसा, क्रूरता और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की दी जानकारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mohali News: घरेलू हिंसा, क्रूरता और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की दी जानकारी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मोहाली। घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न/मृत्यु, पोश अधिनियम और पीड़ित मुआवजा योजनाओं के मामलों में कानूनी पहलुओं पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चंडीगढ़ में केंद्रीय जासूसी प्रशिक्षण संस्थान द्वारा आयोजित किया गया। इसमें दहेज उत्पीड़न/मृत्यु, क्रूरता और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की व्याख्या कर विस्तृत जानकारी दी गई। इस मौके पर सीजेएम एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एसएएस नगर की सह-सचिव सुरभि पराशर ने सभा को संबोधित किया।
उन्होंने लोक अभियोजकों को दहेज निषेध अधिनियम (1961 का अधिनियम 28), दहेज निषेध (संशोधन) अधिनियम, 1984 तथा बीएनएस-2023 के तहत दहेज उत्पीड़न/मृत्यु के मामलों के तहत विभिन्न प्रावधानों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि दहेज निषेध (संशोधन) अधिनियम, 1986 के अनुसार दहेज हत्याओं की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए धारा-80 बीएनएस, 2023 में प्रावधान है कि जहां किसी महिला की मृत्यु जलने या शारीरिक चोट लगने से होती है, या शादी के सात साल के भीतर सामान्य परिस्थितियों से अलग होती है।
उसमें यह दर्शाया जाता है कि महिला की मृत्यु से ठीक पहले उसके पति या उसके रिश्तेदारों ने उसे दहेज की मांग के लिए या उसके संबंध में क्रूरता या उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। ऐसी मृत्यु को दहेज मृत्यु कहा जाएगा और पति या रिश्तेदारों को उसकी मृत्यु का कारण माना जाएगा। उन्होंने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए उठाए जाने वाले कदमों के बारे में विस्तार से बताया।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने लोक अभियोजकों को दहेज निषेध अधिनियम (1961 का अधिनियम 28), दहेज निषेध (संशोधन) अधिनियम, 1984 तथा बीएनएस-2023 के तहत दहेज उत्पीड़न/मृत्यु के मामलों के तहत विभिन्न प्रावधानों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि दहेज निषेध (संशोधन) अधिनियम, 1986 के अनुसार दहेज हत्याओं की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए धारा-80 बीएनएस, 2023 में प्रावधान है कि जहां किसी महिला की मृत्यु जलने या शारीरिक चोट लगने से होती है, या शादी के सात साल के भीतर सामान्य परिस्थितियों से अलग होती है।
विज्ञापन
उसमें यह दर्शाया जाता है कि महिला की मृत्यु से ठीक पहले उसके पति या उसके रिश्तेदारों ने उसे दहेज की मांग के लिए या उसके संबंध में क्रूरता या उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। ऐसी मृत्यु को दहेज मृत्यु कहा जाएगा और पति या रिश्तेदारों को उसकी मृत्यु का कारण माना जाएगा। उन्होंने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए उठाए जाने वाले कदमों के बारे में विस्तार से बताया।
विज्ञापन