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अमर उजाला अभियान शिक्षा: पहले संगीत की बारी... ताकि किताबें न लगें भारी

Wed, 30 Mar 2022 01:45 AM IST
मोहाली ब्‍यूरो अमर उजाला नेटवर्क, मोहाली
अमर उजाला नेटवर्क, मोहाली Published by: मोहाली ब्‍यूरो Updated Wed, 30 Mar 2022 01:45 AM IST
सार

जैसे ही कक्षाएं शुरू हुई हुई तो विद्यार्थियों की किताबों में रुचि पैैदा करने के लिए कई स्कूलों में पहला पीरियड संगीत और कुछ जगह कंप्यूटर का लगाया गया ताकि धीरे-धीरे वे स्कूल में रम सकें।

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First period of music in school
अमर उजाला शिक्षा अभियान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना की तीसरी लहर के कमजोर पड़ने के साथ ही इलाके में स्कूल खुल गए हैं। विद्यार्थी रोजाना स्कूलों में आकर पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन लंबे अंतराल के बाद स्कूल आने के चलते अभी उनका मन नहीं लग रहा है। पढ़ाई में एकाग्रता कम हो गई है। ऑनलाइन पढ़ाई करने के कारण उनके शारीरिक एवं मानसिक विकास प्रभावित हुआ है। अमर उजाला की टीम ने मंगलवार को नयागांव के कुछ स्कूलों में जाकर स्थिति को समझा।
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इस दौरान देखा गया कि सभी स्कूलों में सुबह प्रार्थना सभा के साथ खेल-कूद पर जोर दिया गया है, ताकि विद्यार्थियों में फुर्ती आए। इसके बाद जैसे ही कक्षाएं शुरू हुई हुई तो विद्यार्थियों की किताबों में रुचि पैैदा करने के लिए कई स्कूलों में पहला पीरियड संगीत और कुछ जगह कंप्यूटर का लगाया गया ताकि धीरे-धीरे वे स्कूल में रम सकें। वहीं कई स्कूल में बच्चों लिखने का अभ्यास करवाया जा रहा है।
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क्या कहते हैं शिक्षक
बच्चों के व्यवहार में काफी बदलाव आ गया है। ऑनलाइन कक्षाएं लगाने के कारण बच्चे शिक्षक को जवाब नहीं दे पा रहे हैं। धीरे-धीरे कोशिश की जा रही है कि बच्चों को ऑफलाइन सिस्टम में लाया जाए।
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-मंजुला देवी, अध्यापिका सेंचरी पब्लिक स्कूल, नयागांव

छोटे बच्चों की कक्षा में लगातार बैठने की आदत ही खत्म हो गई है। धीरे-धीरे उन्हें कक्षा में बैठ कर पढ़ाई करने की आदत डाली जा रही है ताकि कोरोना के दौरान जितना वे पिछड़ चुके हैं, उनका विकास हो सके।
-करमजीत सिंह सेंटर हेड टीचर, प्राइमरी स्कूल, नयागांव

सुबह की प्रार्थना सभा के साथ ही बच्चों को खेलकूद की गतिविधियों में लगाया जाता है जिसमें बच्चों को योग भी सिखाया जाता है ताकि बच्चों की स्कूल आने में रुचि बन सके।
-मनजीत सिंह, अध्यापक काने का बाड़ा

दो साल तक बच्चों ने फोन एवं लैपटॉप के सामने बैठ कर पढ़ाई की है। अब बच्चों को अध्यापक के सामने बैठकर जवाब देने में दिक्कत आती है। ऐसे में बच्चे स्कूल आने में झिझक रहे हैं। बच्चों को खेलकूद एवं संगीत के माध्यम से स्कूल के साथ जोड़ा जा रहा है।
-अंजू महाजन, अध्यापक, सरकारी सेकेंडरी स्कूल नयागांव

स्कूल आने में अच्छा लग रहा है। स्कूल में अपने दोस्तों के साथ मिलकर पढ़ने एवं खेलने में मजा आता है । स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद भी कराया जा रहा है।
-अंकित, दसवीं

काफी दिनों के बाद स्कूल में आकर पढ़ने को मिला है। स्कूल आने के लिए मन में एक उत्सुकता थी। कई बच्चों को लिखने में समस्या आ रही है। उसके लिए शिक्षक अतिरिक्त समय दे रहे हैं। -ममता, छात्रा दसवीं

कोरोना की वजह से सबसे ज्यादा बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। अब स्कूल खुलने के बाद थोड़ी राहत मिली है। मेरे छोटे बच्चे को अभी स्कूल के माहौल में थोड़ी दिक्कत आ रही है। धीरे-धीरे उसे स्कूल जाने की आदत पड़ेगी।

-वंदना शर्मा, अभिभावक नयागांव

बच्चे सुबह जल्दी तैयार नहीं हो पाते हैं क्योंकि उनकी स्कूल जाने की आदत खत्म हो गई है। इस कारण वे अब पढ़ाई ऑफलाइन हो चुकी है और अब तो उन्हें स्कूल जाने की आदत डालनी ही पड़ेगी। स्कूल खुलने से बच्चों का सर्वांगीण विकास होगा।
-पारुल, अभिभावक नयागांव
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