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मोहालीः टीडीआई सिटी में बीएमडब्ल्यू को लगाई आग, लोगों ने की नारेबाजी, लगाए गंभीर आरोप
Mon, 11 Nov 2019 02:22 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Mon, 11 Nov 2019 02:22 PM IST
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टीडीआई सिटी में केमिकल से जली कार
- फोटो : MOHALI
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समस्याओं की सिटी बनी टीडीआई सिटी में इन दिनों लोगों को अलग ही तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दो दिन पहले रात के समय यहां एक बीएमडब्ल्यू कार को आग लगा दी गई। आग किसने लगाई, इसका पता अभी तक नहीं लग सका है। लोगों ने इस मामले को लेकर प्दमें पुलिस ने अज्ञात प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की। वहीं पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। अब सोमवार को लोग टीडीआई सिटी के दफ्तर के बाहर इस मामले को लेकर प्रदर्शन करने वाले हैं।
रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन का आरोप है कि इलाके के सुरक्षा इंतजाम महज नाम के ही हैं। इससे पहले भी लावारिस वाहनों के मिलने के साथ ही वाहन चोरी होने के कई मामले यहां सामने आ चुके हैं। भागोमाजरा में बसे सेक्टर 110 व 111 टीडीआई सिटी के नाम से जाने जाते हैं। इन इलाकों को टीडीआई के बिल्डर्स ने डेवलप किया था। यहां लोगों ने महंगे दामों पर प्लाट्स व फ्लैट्स खरीदे थे। यहां के बाशिंदों का कहना है कि बिल्डर्स ने सुरक्षा के साथ ही मूलभूत सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े वादे किए थे लेकिन अब यहां रहने वाले लोगों को वीआईपी सुविधाएं मिलना तो दूर बदहाल सड़कें, लचर जल निकासी व कूड़ा निस्तारण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले लंबे समय से यहां के लोग अपनी सुरक्षा को लेकर भी परेशान हैं। यहां की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान राजवीर सिंह व अन्य लोगों ने बताया कि इस इलाके को डेवलप करने वाले टीडीआई बिल्डर्स ने ही मैगनस नाम से एक फर्म बनाई हुई है। इस इलाके की देखरेख व सुरक्षा की जिम्मेदारी इसी मैगनस नामक कंपनी की है। यह कंपनी मेंटिनेंस चार्ज के नाम पर यहां के बाशिंदों से 2.5 रुपए प्रति स्कवेयर यार्ड के हिसाब से सालाना रकम वसूलती है। इसके बावजूद यहां न तो मूलभूत सुविधाएं हैं और न ही सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध।
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रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन का आरोप है कि इलाके के सुरक्षा इंतजाम महज नाम के ही हैं। इससे पहले भी लावारिस वाहनों के मिलने के साथ ही वाहन चोरी होने के कई मामले यहां सामने आ चुके हैं। भागोमाजरा में बसे सेक्टर 110 व 111 टीडीआई सिटी के नाम से जाने जाते हैं। इन इलाकों को टीडीआई के बिल्डर्स ने डेवलप किया था। यहां लोगों ने महंगे दामों पर प्लाट्स व फ्लैट्स खरीदे थे। यहां के बाशिंदों का कहना है कि बिल्डर्स ने सुरक्षा के साथ ही मूलभूत सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े वादे किए थे लेकिन अब यहां रहने वाले लोगों को वीआईपी सुविधाएं मिलना तो दूर बदहाल सड़कें, लचर जल निकासी व कूड़ा निस्तारण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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पिछले लंबे समय से यहां के लोग अपनी सुरक्षा को लेकर भी परेशान हैं। यहां की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान राजवीर सिंह व अन्य लोगों ने बताया कि इस इलाके को डेवलप करने वाले टीडीआई बिल्डर्स ने ही मैगनस नाम से एक फर्म बनाई हुई है। इस इलाके की देखरेख व सुरक्षा की जिम्मेदारी इसी मैगनस नामक कंपनी की है। यह कंपनी मेंटिनेंस चार्ज के नाम पर यहां के बाशिंदों से 2.5 रुपए प्रति स्कवेयर यार्ड के हिसाब से सालाना रकम वसूलती है। इसके बावजूद यहां न तो मूलभूत सुविधाएं हैं और न ही सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध।
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दो दिन पहले बीएमडब्ल्यू को किसी ने केमिकल डालकर जलाया
दो दिन पहले ही यहां की एलीट होम बिल्डिंग के सेकेंड फ्लोर पर रहने वाले बलजीत सिंह की बीएमडब्ल्यू को किसी ने केमिकल डालकर जला दिया। घटना की सूचना सोहाना थाने को दी गई। थाना पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। उधर, यहां के बाशिंदों का कहना है कि टीडीआई सिटी से पिछले कुछ समय के दौरान तीन मोटरसाइकिल चोरी हो चुके हैं। इसके साथ ही यहां अक्सर लावारिस वाहन खड़े मिलते हैं। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि पिछले तीन महीनों के दौरान पांच लावारिस वाहन पुलिस को सौंपे जा चुके हैं।
18 से 20 सुरक्षा कर्मी, फिर भी हालात खराब
लोगों ने कहा कि यह हालात तब हैं जब टीडीआई सिटी में सुरक्षा के नाम पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और रिकार्ड के मुताबिक रात के समय करीब 18 से 20 सुरक्षा कर्मी मौजूद रहते हैं। लोगों का आरोप है कि यहां पर तैनात सुरक्षा कर्मी आसपास के गांवों के हैं। वे अपनी हाजिरी लगाने के कुछ समय बाद ही अपने घर चले जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक यहां भले ही सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन सही ढंग से काम नहीं कर रहे। इसके साथ ही यहां एंट्री गेट पर रजिस्टर में सही ढंग से विवरण तक दर्ज नहीं किया जाता। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन भी इसकी पुष्टि करती है।
स्कूटी लावारिस हालत में मिली
15 दिन में यहां से दो पुलिस मुलाजिमों के चोरी हुए मोटरसाइकिल भी लावारिस हालत में खड़े मिले हैं। सुखबीर सिंह नामक एक पुलिस मुलाजिम का स्पलैंडर मोटरसाइकिल करीब 15 दिन पहले रात 2 बजे चोरी हुआ था जो अगले दिन टीडीआई सिटी में लावारिस हालत में खड़ा मिला। दूसरा मामला इसके तीन दिन बाद हुआ। जब जश्नदीप सिंह नामक पुलिस मुलाजिम का बुलेट मोटरसाइकिल लापता हो गया। जब तलाश की गई तो यह भी टीडीआई सिटी से लावारिस हालत में खड़ा मिला।
इसी दिन ही टीडीआई सिटी से चोरी हुई एक स्कूटी भी खड़ी मिली। इस स्कूटी मालिक ने अपनी स्कूटी में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाया हुआ था। जब वह जीपीएस सिस्टम के जरिए अपने वाहन को ढूंढता हुआ यहां पहुंचा तो उसकी स्कूटी फ्लैट नंबर 1168 के सामने खड़ी मिली। आरडब्ल्यूए के प्रधान राजवीर सिंह ने बताया कि यहां की लचर व्यवस्थाओं को लेकर इलाके की मेंटिनेंस कर रही मैगनस कंपनी को कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई सुधार नहीं हुआ।
18 से 20 सुरक्षा कर्मी, फिर भी हालात खराब
लोगों ने कहा कि यह हालात तब हैं जब टीडीआई सिटी में सुरक्षा के नाम पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और रिकार्ड के मुताबिक रात के समय करीब 18 से 20 सुरक्षा कर्मी मौजूद रहते हैं। लोगों का आरोप है कि यहां पर तैनात सुरक्षा कर्मी आसपास के गांवों के हैं। वे अपनी हाजिरी लगाने के कुछ समय बाद ही अपने घर चले जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक यहां भले ही सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन सही ढंग से काम नहीं कर रहे। इसके साथ ही यहां एंट्री गेट पर रजिस्टर में सही ढंग से विवरण तक दर्ज नहीं किया जाता। रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन भी इसकी पुष्टि करती है।
स्कूटी लावारिस हालत में मिली
15 दिन में यहां से दो पुलिस मुलाजिमों के चोरी हुए मोटरसाइकिल भी लावारिस हालत में खड़े मिले हैं। सुखबीर सिंह नामक एक पुलिस मुलाजिम का स्पलैंडर मोटरसाइकिल करीब 15 दिन पहले रात 2 बजे चोरी हुआ था जो अगले दिन टीडीआई सिटी में लावारिस हालत में खड़ा मिला। दूसरा मामला इसके तीन दिन बाद हुआ। जब जश्नदीप सिंह नामक पुलिस मुलाजिम का बुलेट मोटरसाइकिल लापता हो गया। जब तलाश की गई तो यह भी टीडीआई सिटी से लावारिस हालत में खड़ा मिला।
इसी दिन ही टीडीआई सिटी से चोरी हुई एक स्कूटी भी खड़ी मिली। इस स्कूटी मालिक ने अपनी स्कूटी में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाया हुआ था। जब वह जीपीएस सिस्टम के जरिए अपने वाहन को ढूंढता हुआ यहां पहुंचा तो उसकी स्कूटी फ्लैट नंबर 1168 के सामने खड़ी मिली। आरडब्ल्यूए के प्रधान राजवीर सिंह ने बताया कि यहां की लचर व्यवस्थाओं को लेकर इलाके की मेंटिनेंस कर रही मैगनस कंपनी को कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई सुधार नहीं हुआ।