वादे सिंगापुर के पर आईटी शो विंडो पर ही बदबू और गंदगी का साम्राज्य

Mohali Bureauमोहाली ब्‍यूरो Updated Sat, 01 Aug 2020 02:30 AM IST
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मोहाली। कहने को वीआइपी सिटी, वादे सिंगापुर बनाने के, हालात बद से बदतर। युवाओं की युवा इंडस्ट्री मूलभूत समस्याओं का शिकार है। आईटी हब बनाने की बात करने वाली सरकार नाम की वीआईपी सिटी को बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर तक मुहैया नहीं करवा पा रही। इंडस्ट्रियल एरिया के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने के लिए एसपीवी बनाने का प्रस्ताव सरकार ने दिया। जिसे नगर निगम हाउस ने रिजेक्ट कर दिया। इंडस्ट्रियल एरिया टूटी सड़कों, ओवरफ्लो सीवरेज, गारबेज डंप, झाड़-झंकाड़ और नाम मात्र के पार्कों से जूझ रहा है।
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मोहाली निवासियों को वीआईपी सिटी के सपने दिखाने वाली सरकारों ने इसे आईटी हब बनाने के वादे कर खूब वोटें बटोरीं। फेज-8ए और 8बी जिसे आईटी का शो विंडो कहा जाता है। इस एरिया में सड़कें तो टूटी ही हैं सीवरेज भी ओवरफ्लो है, साथ ही गारबेज की डंपिंग है। यह सब उस आईटी शो विंडो एरिया में है, जहां तमाम विदेशी डेलिगेशन, व्यापारी और कारोबारी पहुंचते हैं। इन विदेशियों के सामने बदबू भरी आईटी शो विंडो कैसी छवि पेश करती है, यह समझना हर उस मोहाली वासी के आसान है जो इस एरिया से गुजरता है। आरटीआई से हासिल सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन साल में मोहाली के इंडस्ट्रियल एरिया की डेवलपमेंट और मेंटेनेंस पर महज एक करोड़ खर्च किया गया है। गमाडा और पीएसआईसी की विफलता के बाद अब इंडस्ट्रियल एरिया की डेवलपमेंट और मेंटेनेंस का काम नगर निगम को सौंपा गया है। आईटी हब के तौर पर डेवलप फेज-8ए और 8बी अभी भी पीएसआईसी के पास हैं। जिसे निगम को हैंडओवर करने का काम पाइपलाइन में है। माना जा रहा है कि एक सप्ताह के भीतर इस एरिया को पीएसआईसी निगम को हैंडओवर कर देगी।
सरकार ने एसपीवी यानि स्पेशल पर्पज व्हाइक्ल नाम की एक कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया था। जिसमें मोहाली के इंडस्ट्रियलिस्ट, प्रशासनिक और निगम अधिकारियों को शामिल करने की योजना बनाई गई थी। सरकार की योजना के मुताबिक इंडस्ट्री की ओर से नगर निगम को दिए जाने वाले टैक्स का 10 से 15 प्रतिशत निगम रखे और बाकी टैक्स की राशि को इंडस्ट्रियल एरिया की डेवलपमेंट और मेंटेनेंस के लिए एसपीवी को सौंप दे। सरकारी स्तर पर इस योजना को मंजूरी मिलने के बाद नगर निगम में यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई।
- योगेश सागर, प्रेसिडेंट, मोहाली इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन
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मोहाली की इंडस्ट्री अनदेखी का शिकार आरटीआई से हासिल जानकारी के मुताबिक पिछले तीन साल के दौरान इंडस्ट्रियल एरिया के डेवलपमेंट पर महज एक करोड़ खर्च किया गया। इससे ही साफ हो जाता है कि इंडस्ट्री को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार कितनी गंभीर है। फेज-7 और 8 की रोड पर गारबेज डंपिंग के कारण लावारिस पशुओं की भरमार है। जिससे ट्रैफिक बाधित रहता है। आईटी एरिया में गारबेज डंप को हटाने का प्रस्ताव लंबे समय से पेंडिंग है। जिस पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
- इकबाल सिंह, प्रोपराइटर, कॉमेंट्स इंडस्ट्री
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किसी सरकार ने नहीं दिखाई गंभीरता
इंडस्ट्रियल एरिया की समस्याओं को लेकर सरकार और लोकल बॉडीज ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई। फेज-1 से 3 में सीवरेज ओवरफ्लो की समस्या लंबे समय से चली आ रही है। मानसून के मौसम में यह स्थिति इतनी विकट हो गई है कि वहां से गुजरना तक दूभर है। इंडस्ट्रियल एरिया में खड़े झाड़-झंकाड़ और पार्कों की दुर्दशा असामाजिक तत्वों के लिए वरदान बनती जा रही है। हमने निगम को प्रस्ताव दिया था कि पार्कों को एक बार मेंटेन कर इंडस्ट्री को सौंप दें। इसे भी गंभीरता से नहीं लिया गया। पूरे इंडस्ट्रियल एरिया में सड़कों और सीवरेज का बुरा हाल है।
- आईएस छाबड़ा, मैनेजिंग पार्टनर, कान्टिनेंटल इंजीनियरिंग वर्क्स
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मूलभूत सुविधाओं पर फोकस
एसपीवी का प्रस्ताव आया था, जिसे निगम हाउस ने रिजेक्ट कर दिया। एसपीवी के प्रावधानों पर हाउस को एतराज था। ज्यादा टैक्स देने वाली इंडस्ट्री पर ज्यादा खर्च का प्रावधान था। जिसे हाउस ने समान विकास के आधार पर नामंजूर कर दिया। इंडस्ट्रियल एरिया के विकास के लिए कई योजनाएं तैयार की गई हैं, जो पाइपलाइन में हैं। इंडस्ट्र्रियल एरिया की मूलभूत सुविधाओं के सुधार पर हमारा फोकस है।
- कमल गर्ग, कमिश्नर, नगर निगम मोहाली
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