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मोहाली में टीडीआई सिटी पर ईडी की रेड: सेक्टर-119 स्थित आफिस में तीन गाड़ियों से पहुंची टीम, खंगाले दस्तावेज
Tue, 29 Sep 2026 10:17 AM IST
Nivedita
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली
Published by: Nivedita
Updated Tue, 29 Sep 2026 10:17 AM IST
सार
ईडी की यह कार्रवाई टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के बीच हुई है। ईडी सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने वर्ष 2005 से 2014 के बीच सोनीपत में 23 आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाएं शुरू की थीं।
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टीडीआई सिटी आफिस में ईडी की रेड
- फोटो : संवाद
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने मोहाली सेक्टर-119 स्थित टीडीआई सिटी के कार्यालय में दबिश दी। कार्रवाई के दौरान ईडी अधिकारियों ने कार्यालय में मौजूद लोगों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए और विभिन्न रिकॉर्ड व दस्तावेजों की जांच की। हालांकि, ईडी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ईडी की टीम तीन वाहनों में टीडीआई सिटी कार्यालय पहुंची। टीम के कार्यालय में प्रवेश करने के बाद वहां मौजूद लोगों के मोबाइल फोन ले लिए गए। शुरुआती दौर में कार्यालय में मौजूद लोगों को बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। अधिकारियों ने कार्यालय के अलग-अलग हिस्सों में रिकॉर्ड और अन्य सामग्री की जांच की। इस दौरान कुछ लोगों से पूछताछ भी की गई।
सूत्रों के मुताबिक, ईडी की कार्रवाई का संबंध पीआर-6 सड़क के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे में कथित करीब छह करोड़ रुपये की अनियमितता से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि मास्टर प्लान के तहत आने वाली जमीन के लिए सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) मंजूर होने के बाद कंपनी की ओर से जमीन कुछ रिश्तेदारों के नाम पर पंजीकृत करवाई गई, ताकि अधिक मुआवजा हासिल किया जा सके। बाद में कंपनी की ओर से जीएमएडीए के समक्ष इन रजिस्ट्रियों को रद्द करने के लिए आवेदन किए जाने की बात भी सामने आई है।
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टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच
ईडी की यह कार्रवाई टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के बीच हुई है। ईडी सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने वर्ष 2005 से 2014 के बीच सोनीपत में 23 आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाएं शुरू की थीं। इन परियोजनाओं के लिए 14 हजार से अधिक खरीदारों से 4,619 करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्र किए जाने का दावा है। इनमें से कई परियोजनाएं अब भी अधूरी हैं और कुछ परियोजनाओं में 16 से 18 वर्ष तक की देरी होने की बात सामने आई है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि कंपनी के प्रमोटरों ने परियोजनाओं को पूरा करने के बजाय खरीदारों से प्राप्त राशि को अपनी सहायक कंपनियों और जमीन मालिक संस्थाओं की ओर अग्रिम भुगतान के रूप में स्थानांतरित किया। ईडी इसी मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों की जांच कर रही है।
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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ईडी की टीम तीन वाहनों में टीडीआई सिटी कार्यालय पहुंची। टीम के कार्यालय में प्रवेश करने के बाद वहां मौजूद लोगों के मोबाइल फोन ले लिए गए। शुरुआती दौर में कार्यालय में मौजूद लोगों को बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। अधिकारियों ने कार्यालय के अलग-अलग हिस्सों में रिकॉर्ड और अन्य सामग्री की जांच की। इस दौरान कुछ लोगों से पूछताछ भी की गई।
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सूत्रों के मुताबिक, ईडी की कार्रवाई का संबंध पीआर-6 सड़क के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे में कथित करीब छह करोड़ रुपये की अनियमितता से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि मास्टर प्लान के तहत आने वाली जमीन के लिए सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) मंजूर होने के बाद कंपनी की ओर से जमीन कुछ रिश्तेदारों के नाम पर पंजीकृत करवाई गई, ताकि अधिक मुआवजा हासिल किया जा सके। बाद में कंपनी की ओर से जीएमएडीए के समक्ष इन रजिस्ट्रियों को रद्द करने के लिए आवेदन किए जाने की बात भी सामने आई है।
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टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच
ईडी की यह कार्रवाई टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के बीच हुई है। ईडी सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने वर्ष 2005 से 2014 के बीच सोनीपत में 23 आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाएं शुरू की थीं। इन परियोजनाओं के लिए 14 हजार से अधिक खरीदारों से 4,619 करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्र किए जाने का दावा है। इनमें से कई परियोजनाएं अब भी अधूरी हैं और कुछ परियोजनाओं में 16 से 18 वर्ष तक की देरी होने की बात सामने आई है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि कंपनी के प्रमोटरों ने परियोजनाओं को पूरा करने के बजाय खरीदारों से प्राप्त राशि को अपनी सहायक कंपनियों और जमीन मालिक संस्थाओं की ओर अग्रिम भुगतान के रूप में स्थानांतरित किया। ईडी इसी मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों की जांच कर रही है।