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को-ऑपरेटिव सोसायटी बनाने के नाम पर करोड़ों की ठगी, एक गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो, मोहाली
Updated Tue, 28 Jun 2016 10:39 AM IST
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को-ऑपरेटिव सोसायटी बनाने के नाम पर करोड़ों की ठगी, एक गिर
- फोटो : अमर उजाला
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मोहाली के सेक्टर-71 में बैंवले को-ऑपरेटिव सोसायटी बनाने के नाम पर 12 करोड 81 लाख की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। सोहाना पुलिस ने मामले में बलकार सिंह नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। सोमवार को पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया। वहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
सोहाना थाना पुलिस के मुताबिक, गुप्त सूचना मिली थी कि आरोपी सेक्टर-69 में रहता है। इसके बाद पुलिस ने रेड कर आरोपी ठेकेदार बलकार सिंह को गिरफ्तार कर लिया। ठेकेदार के अलावा पुलिस को अभी पूर्व एक्सईएन जसविद्र सिंह, उसके बेटे जबजीत सिंह, विक्टर, रविद्र कौर, सुखदेव सिंह, भूपिंदर सिंह, रमला गोयल व कवंरदीप सिंह की तलाश है।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी से अभी तक कोई रिकवरी नहीं हुई है। अन्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है। उम्मीद है कि जल्द ही अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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ऐसे रची थी ठगी की साजिश
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने 2005 में बैंबले को-अॅापरेटिव सोसायटी नाम से सेक्टर-91 में अपना प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसमें सभी आरोपी मेंबर थे। कई लोगों ने फ्लैट लेने के लिए इनके पास पैसे जमा करवाए थे। कमेटी के पास 12 करोड़ 81 लाख रुपये इकट्ठा हो चुके थे। 2009 में अलाटियों को कब्जे देने थे। इसी बीच कमेटी मेंबरों की नियत बदल गई और उन्होंने करोड़ों रुपये का गबन कर दिया।
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सोहाना थाना पुलिस के मुताबिक, गुप्त सूचना मिली थी कि आरोपी सेक्टर-69 में रहता है। इसके बाद पुलिस ने रेड कर आरोपी ठेकेदार बलकार सिंह को गिरफ्तार कर लिया। ठेकेदार के अलावा पुलिस को अभी पूर्व एक्सईएन जसविद्र सिंह, उसके बेटे जबजीत सिंह, विक्टर, रविद्र कौर, सुखदेव सिंह, भूपिंदर सिंह, रमला गोयल व कवंरदीप सिंह की तलाश है।
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पुलिस के मुताबिक, आरोपी से अभी तक कोई रिकवरी नहीं हुई है। अन्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी की जा रही है। उम्मीद है कि जल्द ही अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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ऐसे रची थी ठगी की साजिश
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने 2005 में बैंबले को-अॅापरेटिव सोसायटी नाम से सेक्टर-91 में अपना प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसमें सभी आरोपी मेंबर थे। कई लोगों ने फ्लैट लेने के लिए इनके पास पैसे जमा करवाए थे। कमेटी के पास 12 करोड़ 81 लाख रुपये इकट्ठा हो चुके थे। 2009 में अलाटियों को कब्जे देने थे। इसी बीच कमेटी मेंबरों की नियत बदल गई और उन्होंने करोड़ों रुपये का गबन कर दिया।