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685 केसों में बरी हुए लोगों की मुसीबत बढ़ी
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- एसटीएफ अब उक्त केसों की करवाएगी स्टडी
- जरूरत पड़ने पर हाईकोर्ट में दायर की जाएगी अपील
अमित शर्मा
मोहाली। स्पेशल टास्क फोर्स ने 685 के करीब उन एनडीपीएस केसों की पहचान की है, जिसमें लोग कॉमर्शियल कैटेगरी में पकड़े गए थे, लेकिन अदालत में जाकर बरी हो गए थे। अब इन केसों की कानूनी तौर पर जांच होगी। अगर पुलिस के स्तर पर कोई खामी नजर आती है तो ऐसे केसों में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में अपील दायर की जाएगी। यह जानकारी एसटीएफ के प्रमुख डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा ने दी। वह मंगलवार को सिटी में पहुंचे हुए थे। इस मौके पर उन्होंने बताया कि 277 व्यापारिक मात्रा के एनडीपीएस केसों व 2180 गैर व्यापारिक मात्रा के केसों की पहचान की गई। इनमें एफएसएल की रिपोर्ट भी तय समय से मिली, लेकिन समय से अदालत में चालान नहीं पेश किए गए। एसएसपी ने बताया कि सभी जिलों के एसएसपी को ऐसे केसों की जांच पूरी करने व चालान पेश करने की हिदायत दी है।
जेलों के अंदर भी तस्करों पर नजर
एसटीएफ ने जेलों के अंदर चल रहे नशे के कारोबार को रोकने के लिए भी पूरी प्लानिंग की है। इसके तहत अब जेलों में बंद कैदियों पर भी नजर रखी जाएगी। इसके लिए सारी प्लानिंग कर ली गई। अधिकारियों से इस संबंध में मीटिंग तक हो चुकी है।
पेशी के दौरान भागने वाले आरोपियों को किया जाएगा काबू
अदालतों में पेशी के दौरान आरोपियों के भागने की घटना भी अब आम हो गई है। इस मामले को भी एसटीएफ द्वारा गंभीरता से लिया जा रहा है। सभी जिलों के एसएसपी को हिदायत दी गई है कि उनकी सुरक्षा को यकीनी बनाया जाए। ताकि लोगों को किसी भी प्रकार की दिक्कत न उठानी पड़े। वहीं, जहां तक हो सके ऐसे केसों में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई की जाए।
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अब नशा तस्करों को नहीं मिल पाएगी जमानत
डीजीपी ने बताया कि एनडीपीएस के केसों में यह बात भी देखने में आ रही है कि पुलिस फोर्स 180 दिन में चालान पेश नहीं कर पाती है, जिसका फायदा आरोपी लेते हैं। वह आसानी से 181वें दिन जमानत ले लेते हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी स्थिति बनती है तो पुलिस वाले 180वें दिन एक एप्लीकेशन अदालत में दायर कर चालान पेश करने के लिए छह माह की समय अवधि और ले पाएंगे।
50 पुलिस मुलाजिम एसटीफ से वापस भेजे
डीजीपी ने बताया कि एसटीएफ ने हाल ही में जिन मुलाजिमों का रिकॉर्ड बढ़िया नहीं था। उन्हें वापस भेज दिया है। करीब पचास मुलाजिमों को फोर्स को भेज दिया है। फोर्स में केवल उन्हीं लोगों को रखा गया है, जिनका रिकॉर्ड काफी बढ़िया है।
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- जरूरत पड़ने पर हाईकोर्ट में दायर की जाएगी अपील
अमित शर्मा
मोहाली। स्पेशल टास्क फोर्स ने 685 के करीब उन एनडीपीएस केसों की पहचान की है, जिसमें लोग कॉमर्शियल कैटेगरी में पकड़े गए थे, लेकिन अदालत में जाकर बरी हो गए थे। अब इन केसों की कानूनी तौर पर जांच होगी। अगर पुलिस के स्तर पर कोई खामी नजर आती है तो ऐसे केसों में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में अपील दायर की जाएगी। यह जानकारी एसटीएफ के प्रमुख डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा ने दी। वह मंगलवार को सिटी में पहुंचे हुए थे। इस मौके पर उन्होंने बताया कि 277 व्यापारिक मात्रा के एनडीपीएस केसों व 2180 गैर व्यापारिक मात्रा के केसों की पहचान की गई। इनमें एफएसएल की रिपोर्ट भी तय समय से मिली, लेकिन समय से अदालत में चालान नहीं पेश किए गए। एसएसपी ने बताया कि सभी जिलों के एसएसपी को ऐसे केसों की जांच पूरी करने व चालान पेश करने की हिदायत दी है।
जेलों के अंदर भी तस्करों पर नजर
एसटीएफ ने जेलों के अंदर चल रहे नशे के कारोबार को रोकने के लिए भी पूरी प्लानिंग की है। इसके तहत अब जेलों में बंद कैदियों पर भी नजर रखी जाएगी। इसके लिए सारी प्लानिंग कर ली गई। अधिकारियों से इस संबंध में मीटिंग तक हो चुकी है।
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पेशी के दौरान भागने वाले आरोपियों को किया जाएगा काबू
अदालतों में पेशी के दौरान आरोपियों के भागने की घटना भी अब आम हो गई है। इस मामले को भी एसटीएफ द्वारा गंभीरता से लिया जा रहा है। सभी जिलों के एसएसपी को हिदायत दी गई है कि उनकी सुरक्षा को यकीनी बनाया जाए। ताकि लोगों को किसी भी प्रकार की दिक्कत न उठानी पड़े। वहीं, जहां तक हो सके ऐसे केसों में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई की जाए।
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अब नशा तस्करों को नहीं मिल पाएगी जमानत
डीजीपी ने बताया कि एनडीपीएस के केसों में यह बात भी देखने में आ रही है कि पुलिस फोर्स 180 दिन में चालान पेश नहीं कर पाती है, जिसका फायदा आरोपी लेते हैं। वह आसानी से 181वें दिन जमानत ले लेते हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी स्थिति बनती है तो पुलिस वाले 180वें दिन एक एप्लीकेशन अदालत में दायर कर चालान पेश करने के लिए छह माह की समय अवधि और ले पाएंगे।
50 पुलिस मुलाजिम एसटीफ से वापस भेजे
डीजीपी ने बताया कि एसटीएफ ने हाल ही में जिन मुलाजिमों का रिकॉर्ड बढ़िया नहीं था। उन्हें वापस भेज दिया है। करीब पचास मुलाजिमों को फोर्स को भेज दिया है। फोर्स में केवल उन्हीं लोगों को रखा गया है, जिनका रिकॉर्ड काफी बढ़िया है।