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मुबारिकपुर घग्गर नदी पर काजवे का बैरीकेड फिर से टुटा
Updated Mon, 26 Feb 2018 02:24 AM IST
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मुबारिकपुर घग्गर पर काजवे का बैरिकेड फिर टूटा
कैंटर की भेंट चढ़ा, गांव निवासियों ने माइनिंग माफिया पर लगाया आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
डेराबस्सी।
मुबारिकपुर घग्गर नदी पर बनाए गए काजवे का बैरिकेड फिर से टूट गया है। इस बार यह एक कैंटर की भेंट चढ़ा है। फिलहाल एक तरफ का बैरिकेड सुरक्षित है, इस कारण भारी वाहनों की आवाजाही पर पाबंदी लगी हुई है। मुबारिकपुर निवासियों ने आरोप लगाया कि काजवे पर भारी वाहनों को रोकने के लिए लगाए गए बैरिकेड को माइनिंग माफिया द्वारा बार-बार तोड़ा जाता है।
उन्होंने शक जताया कि आने वाले दिनों में दूसरा बैरिकेड भी तोड़ दिया जाएगा। माइनिंग माफिया द्वारा बार-बार बैरिकेड तोड़े जाने के बावजूद भी प्रशासनिक अधिकारी खामोश बैठे हैं। जीरकपुर और डेराबस्सी को जोड़ने के लिए इलाका निवासियों की लंबी मांग पर विधानसभा चुनाव से पहले मुबारिकपुर घग्गर नदी पर काजवे बनवाया गया था। इसके चालू होने से डेराबस्सी और जीरकपुर के दर्जनों गांवों को बड़ी राहत मिली थी। इसके अलावा पंचकूला और ढकोली की तरफ से मुबारिकपुर क्षेत्र आने वाले लोगों को इस काजवे के बनने से राहत मिली है। चार करोड़ की लागत से बनाए गए इस काजवे को छोटे वाहनों के लिए ही डिजाइन किया गया था। भारी वाहनों को रोकने के लिए इसके दोनों ओर लोहे के बैरिकेड लगाए गए।
अवैध खनन का गढ़
डेराबस्सी के मुबारिकपुर क्षेत्र में पड़ते गांव ककराली, दफरपुर, मीरपुर, सुंडरा, पंडवाला से घग्गर नदी निकलने वाला क्षेत्र अवैध माइनिंग का गढ़ है। माफियाओं को रेत और बजरी चोरी करने के बाद मुबारिकपुर से होकर जाना पड़ता था। बीते दिनों अंबाला-कालका रेलवे लाइन पर मुबारिकपुर फाटक से निजात दिलाने के लिए रेलवे अंडरपाथ का निर्माण शुरू किया गया है। इस दौरान मुबारिकपुर-भांखरपुर लिंक रोड को बंद कर दिया गया है। अब माइनिंग करने वाले वाहनों को डेराबस्सी से घूमकर जाना पड़ रहा है। इस कारण अवैध माइनिंग में जुटे वाहन लोगों को दिख रहे थे। इससे बचने के लिए माइनिंग माफिया द्वारा काजवे के दोनों तरफ लगाए गए बैरिकेड तोड़ दिए जाते हैं। इस बार एक कैंटर द्वारा एक तरफ का बैरिकेड तोड़ा गया है जबकि दूसरा सुरक्षित है। मुबारिकपुर निवासियों ने आरोप लगाया कि कुछ दिनों में माइनिंग माफिया की तरफ से दूसरी तरफ का बैरिकेड भी तोड़ दिया जाएगा जिसके बाद इस काजवे से भारी वाहन गुजरेंगे। भारी वाहनों के आने-जाने से काजवे को नुकसान पहुंचने की संभावना है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
संपर्क करने पर पीडब्ल्यूडी के एसडीओ जसविंदर सिंह सिद्धू ने कहा कि उन्होंने एक दिन पहले ही कार्यभार संभाला है। वह इस मामले की जांच कराएंगे, यदि बैरिकेड को तोड़ने में माइनिंग माफिया का रोल पाया गया तो पुलिस को कार्रवाई के लिए लिखेंगे।
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कैंटर की भेंट चढ़ा, गांव निवासियों ने माइनिंग माफिया पर लगाया आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
डेराबस्सी।
मुबारिकपुर घग्गर नदी पर बनाए गए काजवे का बैरिकेड फिर से टूट गया है। इस बार यह एक कैंटर की भेंट चढ़ा है। फिलहाल एक तरफ का बैरिकेड सुरक्षित है, इस कारण भारी वाहनों की आवाजाही पर पाबंदी लगी हुई है। मुबारिकपुर निवासियों ने आरोप लगाया कि काजवे पर भारी वाहनों को रोकने के लिए लगाए गए बैरिकेड को माइनिंग माफिया द्वारा बार-बार तोड़ा जाता है।
उन्होंने शक जताया कि आने वाले दिनों में दूसरा बैरिकेड भी तोड़ दिया जाएगा। माइनिंग माफिया द्वारा बार-बार बैरिकेड तोड़े जाने के बावजूद भी प्रशासनिक अधिकारी खामोश बैठे हैं। जीरकपुर और डेराबस्सी को जोड़ने के लिए इलाका निवासियों की लंबी मांग पर विधानसभा चुनाव से पहले मुबारिकपुर घग्गर नदी पर काजवे बनवाया गया था। इसके चालू होने से डेराबस्सी और जीरकपुर के दर्जनों गांवों को बड़ी राहत मिली थी। इसके अलावा पंचकूला और ढकोली की तरफ से मुबारिकपुर क्षेत्र आने वाले लोगों को इस काजवे के बनने से राहत मिली है। चार करोड़ की लागत से बनाए गए इस काजवे को छोटे वाहनों के लिए ही डिजाइन किया गया था। भारी वाहनों को रोकने के लिए इसके दोनों ओर लोहे के बैरिकेड लगाए गए।
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अवैध खनन का गढ़
डेराबस्सी के मुबारिकपुर क्षेत्र में पड़ते गांव ककराली, दफरपुर, मीरपुर, सुंडरा, पंडवाला से घग्गर नदी निकलने वाला क्षेत्र अवैध माइनिंग का गढ़ है। माफियाओं को रेत और बजरी चोरी करने के बाद मुबारिकपुर से होकर जाना पड़ता था। बीते दिनों अंबाला-कालका रेलवे लाइन पर मुबारिकपुर फाटक से निजात दिलाने के लिए रेलवे अंडरपाथ का निर्माण शुरू किया गया है। इस दौरान मुबारिकपुर-भांखरपुर लिंक रोड को बंद कर दिया गया है। अब माइनिंग करने वाले वाहनों को डेराबस्सी से घूमकर जाना पड़ रहा है। इस कारण अवैध माइनिंग में जुटे वाहन लोगों को दिख रहे थे। इससे बचने के लिए माइनिंग माफिया द्वारा काजवे के दोनों तरफ लगाए गए बैरिकेड तोड़ दिए जाते हैं। इस बार एक कैंटर द्वारा एक तरफ का बैरिकेड तोड़ा गया है जबकि दूसरा सुरक्षित है। मुबारिकपुर निवासियों ने आरोप लगाया कि कुछ दिनों में माइनिंग माफिया की तरफ से दूसरी तरफ का बैरिकेड भी तोड़ दिया जाएगा जिसके बाद इस काजवे से भारी वाहन गुजरेंगे। भारी वाहनों के आने-जाने से काजवे को नुकसान पहुंचने की संभावना है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
संपर्क करने पर पीडब्ल्यूडी के एसडीओ जसविंदर सिंह सिद्धू ने कहा कि उन्होंने एक दिन पहले ही कार्यभार संभाला है। वह इस मामले की जांच कराएंगे, यदि बैरिकेड को तोड़ने में माइनिंग माफिया का रोल पाया गया तो पुलिस को कार्रवाई के लिए लिखेंगे।