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लक्ष्मी अपार्टमेंट के आसपास बने अपार्टमेंट के लोगों ने फायरिंग सुन अपने आप को किया नजर बंद
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- लक्ष्मी अपार्टमेंट के आसपास लोगों ने फायरिंग सुन अपने आप को किया नजर बंद
- पुलिस ने ऑपरेशन के दौरान रास्ता ब्लॉक नहीं किया
दीपक शाही
जीरकपुर। वीरवार की शाम 6 बजे जीरकपुर के पीरमुछल्ला का लक्ष्मी अपार्टमेंट। पुलिस और गैंगस्टरों के बीच जबरदस्त फायरिंग के बीच फंसे सैकड़ों लोग। तभी एक छह साल की बच्ची चीखने लगी और पुलिस के रोंगटे खड़े हो गए। क्योंकि गैंगस्टर अंकित भादू ने बच्ची को गन प्वाइंट पर ले रखा था। पुलिस ने किसी तरह दूसरी बिल्डिंग ग्लैक्सी अपार्टमेंट से उसके पैरों में गोली मारी और वह ढेर हो गया। लेकिन इस पैंतीस मिनट के पुलिस के ऑपरेशन में एक मां विनीता अपनी छह साल की बच्ची अक्षिता के लिए कैसे तड़पती रही, उसका दिल जानता है। वहीं इस वारदात से पूरा एरिया दहशत में था। पुलिस ने इस ऑपरेशन के दौरान लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान बिल्कुल नहीं रखा। न तो उस रास्ते को ब्लॉक किया गया और न ही पुलिस ने किसी को रोका। इस दौरान फायरिंग होती रही और राहगीर आते जाते रहे। करीब 35 मिनट के इस ऑपरेशन में पुलिस करीब 25 से ज्यादा बार पुलिस और गैंगस्टरों के बीच फायरिंग हुई।
करीब साढ़े तीन माह से रह रहे लक्ष्मी अपार्टमेंट थे गैंगस्टर
लक्ष्मी अपार्टमेंट के अपार्टमेंट में गैंगस्टर अंकित भादू, जर्मनजीत उर्फ जर्मन व गुरमिंदर सिंह उर्फ गिंदा काना करीब साढ़े तीन माह से इस अपार्टमेंट में रह रहे थे, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। यहां सैकड़ों लोगों की जिंदगी खतरे में थी। ये हाल है, जीरकपुर पुलिस का। पीरमुछल्ला में इतने अपार्टमेंट बने हैं, लेकिन पुलिस वेरीफिकेशन किन किन लोगों का है। क्या ये आंकड़ा पुलिस के पास नहीं था। जिस गैंगस्टर पर राजस्थान पुलिस ने एक लाख का इनाम रखा है, वह जीरकपुर के पीरमुछल्ला में बैठा था। इसकी भनक तीन माह तक पुलिस को क्यों नहीं लगी। अगर ऐसे ही रहा तो आने वाले समय में पीरमुछल्ला गैंगस्टरों के लिए रैन बसेरा बन जाएगा।
फायरिंग चलती रही, राहगीर गुजरते रहे
पुलिस और गैंगस्टरों के बीच फायरिंग चलती रही, लेकिन उस रास्ते को जबतक ऑपरेशन चलता रहा ब्लॉक नहीं किया। नतीजा उस रास्ते से गोली की आवाज सुन कोचिंग से लौट रहे बच्चे डर गए। एक लड़की ने तो जोर से चीखा पुलिस वालों ने उसे चुप कराया। अगर इस बीच कोई मिस हैपनिंग हो जाती तो जिम्मेदार कौन होता। इसके अलावा ऑरेशन के बाद ग्लैक्सी अपार्टमेंट टू में रहने वाले लोग इतने डरे हुए थे, अपने आपको अपने अपने फ्लैटों में नजर बंद कर रखा था, कई फ्लैटों की लाइटें भी बंद पड़ी थी। लोगों में इतना खौफ था कि लोग ऑपरेशन समाप्त होने के एक घंटे बाद भी लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकले।
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- पुलिस ने ऑपरेशन के दौरान रास्ता ब्लॉक नहीं किया
दीपक शाही
जीरकपुर। वीरवार की शाम 6 बजे जीरकपुर के पीरमुछल्ला का लक्ष्मी अपार्टमेंट। पुलिस और गैंगस्टरों के बीच जबरदस्त फायरिंग के बीच फंसे सैकड़ों लोग। तभी एक छह साल की बच्ची चीखने लगी और पुलिस के रोंगटे खड़े हो गए। क्योंकि गैंगस्टर अंकित भादू ने बच्ची को गन प्वाइंट पर ले रखा था। पुलिस ने किसी तरह दूसरी बिल्डिंग ग्लैक्सी अपार्टमेंट से उसके पैरों में गोली मारी और वह ढेर हो गया। लेकिन इस पैंतीस मिनट के पुलिस के ऑपरेशन में एक मां विनीता अपनी छह साल की बच्ची अक्षिता के लिए कैसे तड़पती रही, उसका दिल जानता है। वहीं इस वारदात से पूरा एरिया दहशत में था। पुलिस ने इस ऑपरेशन के दौरान लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान बिल्कुल नहीं रखा। न तो उस रास्ते को ब्लॉक किया गया और न ही पुलिस ने किसी को रोका। इस दौरान फायरिंग होती रही और राहगीर आते जाते रहे। करीब 35 मिनट के इस ऑपरेशन में पुलिस करीब 25 से ज्यादा बार पुलिस और गैंगस्टरों के बीच फायरिंग हुई।
करीब साढ़े तीन माह से रह रहे लक्ष्मी अपार्टमेंट थे गैंगस्टर
लक्ष्मी अपार्टमेंट के अपार्टमेंट में गैंगस्टर अंकित भादू, जर्मनजीत उर्फ जर्मन व गुरमिंदर सिंह उर्फ गिंदा काना करीब साढ़े तीन माह से इस अपार्टमेंट में रह रहे थे, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। यहां सैकड़ों लोगों की जिंदगी खतरे में थी। ये हाल है, जीरकपुर पुलिस का। पीरमुछल्ला में इतने अपार्टमेंट बने हैं, लेकिन पुलिस वेरीफिकेशन किन किन लोगों का है। क्या ये आंकड़ा पुलिस के पास नहीं था। जिस गैंगस्टर पर राजस्थान पुलिस ने एक लाख का इनाम रखा है, वह जीरकपुर के पीरमुछल्ला में बैठा था। इसकी भनक तीन माह तक पुलिस को क्यों नहीं लगी। अगर ऐसे ही रहा तो आने वाले समय में पीरमुछल्ला गैंगस्टरों के लिए रैन बसेरा बन जाएगा।
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फायरिंग चलती रही, राहगीर गुजरते रहे
पुलिस और गैंगस्टरों के बीच फायरिंग चलती रही, लेकिन उस रास्ते को जबतक ऑपरेशन चलता रहा ब्लॉक नहीं किया। नतीजा उस रास्ते से गोली की आवाज सुन कोचिंग से लौट रहे बच्चे डर गए। एक लड़की ने तो जोर से चीखा पुलिस वालों ने उसे चुप कराया। अगर इस बीच कोई मिस हैपनिंग हो जाती तो जिम्मेदार कौन होता। इसके अलावा ऑरेशन के बाद ग्लैक्सी अपार्टमेंट टू में रहने वाले लोग इतने डरे हुए थे, अपने आपको अपने अपने फ्लैटों में नजर बंद कर रखा था, कई फ्लैटों की लाइटें भी बंद पड़ी थी। लोगों में इतना खौफ था कि लोग ऑपरेशन समाप्त होने के एक घंटे बाद भी लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकले।
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