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Mohali News: पार्षदों ने प्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भेजा, अदालत ने लगाई रोक
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जीरकपुर। बीती 28 जून को नगर परिषद के प्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का मत पास पेश किया गया था। जिसे लेकर अभी मामला गर्माता ही जा रहा है। इसे लेकर शहर के 21 पार्षदों की ओर से सोमवार को बैठक करके विधायक की मौजूदगी में प्रधान के खिलाफ अविश्वास मत पास कर सरकार को भेज दिया है। इस बैठक में अकाली दल के 8 पार्षद भी मौजूद थे। जिसमें उदयवीर ढिल्लों और उनके ग्रुप का कोई भी पार्षद मौजूद नहीं था। इस दौरान मीडिया को अंदर नहीं जाने दिया गया। इस बैठक के खिलाफ प्रधान उदयवीर सिंह ढिल्लों की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की तो अदालत ने रोक लगाकर सभी प्रोसीडिंग व वीडियो रिकार्डिंग सोमवार को अदालत में तलब करने के आदेश दिए हैं। प्रधान उदयवीर ढिल्लों ने कहा कि नियमों के अनुसार अविश्वास मत पेश करने के 14 दिनों के अंदर दोबारा बैठक करनी जरूरी होती है। जो कि पांच जुलाई को रखी थी, जिसमें विपक्ष का कोई भी पार्षद शामिल नहीं हुआ था। इसके चलते उनका अविश्वास का प्रस्ताव फेल हो गया था। इसके बाद छह महीने तक दोबारा अविश्वास मत पेश नहीं किया जा सकता। लेकिन सभी विपक्षी पार्षदों ने सोमवार को जो बैठक रखी है वह गैर संवैधानिक है, जिसके खिलाफ उन्होंने सोमवार को अदालत का दरवाजा खटखटाया है। डबल बैंच ने सुनवाई के दौरान अदालत ने पूरा रिकॉर्ड और बैठक की वीडियोग्राफी सोमवार शाम 7 बजे तक रजिस्ट्रार के पास जमा करवाने के आदेश दिए हैं और इसके साथ डीसी मोहाली आशिका जैन को अगली सुनवाई 22 जुलाई तक प्रशासनिक अधिकारी लगाया गया है।
विधायक रंधावा बोले-
वहीं, दूसरी ओर विधायक कुलजीत सिंह रंधावा ने कहा कि बीती 28 जून को प्रधान के खिलाफ अविश्वास मत पेश किया था। लेकिन उसके बाद उदयवीर ढिल्लों की ओर से रखी मीटिंग गैर कानूनी थी, जिसे ड्यूटी मैजिस्ट्रेट द्वारा पुख्ता प्रबंध न होने के चलते रद्द कर दिया था। विधायक ने कहा कि आज की मीटिंग में 21 पार्षद व 22 वें वह खुद थे और प्रधान के खिलाफ अविश्वास मत पास कर सरकार को भेज दिया गया है, ताकि शहर के विकास के लिए खुलकर काम किया जा सके। यह तो बहुत पहले हो जाना चाहिए था। खैर कोई बात नही अब भी वह अपनी टीम के साथ शहर के विकास के लिए वचनबद्ध है। बाकी अदालत के फैसले का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह मीटिंग वार्ड नंबर 6 के पार्षद अजित पाल की देखरेख में की गई। जिन्हें अगली मीटिंग तक चेयरमैन नियुक्त किया गया है।
यह रहा माहौल
डेढ़ घंटे चली परिषद की बैठक में किसी भी मीडिया कर्मी या किसी भी अन्य भी व्यक्ति को नगर परिषद दफ्तर में दाखिल नहीं होने दिया। इस दौरान अपने काम करवाने आए लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। जिस पर रोष जाहिर करते हुए लोगों ने कहा कि उन्हें बिना वजह परेशान किया जा रहा है। पहले ही उनके काम नहीं हो रहे हैं। वहीं लोगों ने कहा कि जिन पार्षदों की ओर से सोमवार को शक्ति प्रदर्शन किया गया, उन लोगों को कैदियों की तरह एक बस में भरकर लाया गया और बस में ही वापस ले जाया गया ताकि वह किसी से मिल न सकें और किसी से बात न कर सके। बताया जा रहा है कि बागी पार्षदों को किसी होटल में नजरबंद रखा गया है ताकि वह किसी भी तरह उदयवीर ढिल्लों या उसके किसी साथी के संपर्क में न आए। बता दें कि अदालत के अगले सुनवाई तक प्रशासनिक अधिकारी की देखरेख में नगर परिषद जीरकपुर के सभी काम होंगे।
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कोट्स
अदालत के आदेशों पर दोनों मीटिंगों का रिकाॅर्ड सोमवार को अदालत में जमा करवा दिया गया है। अगली सुनवाई तक शहर के किसी भी विकास कार्य को रुकने नहीं दिया जाएगा और अदालत के अगले आदेशों तक सारा काम प्रशासनिक अधिकारी की देखरेख में सभी विकास कार्य संपन्न होंगे। -अशोक पथरिया, कार्यकारी अधिकारी जीरकपुर
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विधायक रंधावा बोले-
वहीं, दूसरी ओर विधायक कुलजीत सिंह रंधावा ने कहा कि बीती 28 जून को प्रधान के खिलाफ अविश्वास मत पेश किया था। लेकिन उसके बाद उदयवीर ढिल्लों की ओर से रखी मीटिंग गैर कानूनी थी, जिसे ड्यूटी मैजिस्ट्रेट द्वारा पुख्ता प्रबंध न होने के चलते रद्द कर दिया था। विधायक ने कहा कि आज की मीटिंग में 21 पार्षद व 22 वें वह खुद थे और प्रधान के खिलाफ अविश्वास मत पास कर सरकार को भेज दिया गया है, ताकि शहर के विकास के लिए खुलकर काम किया जा सके। यह तो बहुत पहले हो जाना चाहिए था। खैर कोई बात नही अब भी वह अपनी टीम के साथ शहर के विकास के लिए वचनबद्ध है। बाकी अदालत के फैसले का सम्मान किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह मीटिंग वार्ड नंबर 6 के पार्षद अजित पाल की देखरेख में की गई। जिन्हें अगली मीटिंग तक चेयरमैन नियुक्त किया गया है।
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यह रहा माहौल
डेढ़ घंटे चली परिषद की बैठक में किसी भी मीडिया कर्मी या किसी भी अन्य भी व्यक्ति को नगर परिषद दफ्तर में दाखिल नहीं होने दिया। इस दौरान अपने काम करवाने आए लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी। जिस पर रोष जाहिर करते हुए लोगों ने कहा कि उन्हें बिना वजह परेशान किया जा रहा है। पहले ही उनके काम नहीं हो रहे हैं। वहीं लोगों ने कहा कि जिन पार्षदों की ओर से सोमवार को शक्ति प्रदर्शन किया गया, उन लोगों को कैदियों की तरह एक बस में भरकर लाया गया और बस में ही वापस ले जाया गया ताकि वह किसी से मिल न सकें और किसी से बात न कर सके। बताया जा रहा है कि बागी पार्षदों को किसी होटल में नजरबंद रखा गया है ताकि वह किसी भी तरह उदयवीर ढिल्लों या उसके किसी साथी के संपर्क में न आए। बता दें कि अदालत के अगले सुनवाई तक प्रशासनिक अधिकारी की देखरेख में नगर परिषद जीरकपुर के सभी काम होंगे।
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अदालत के आदेशों पर दोनों मीटिंगों का रिकाॅर्ड सोमवार को अदालत में जमा करवा दिया गया है। अगली सुनवाई तक शहर के किसी भी विकास कार्य को रुकने नहीं दिया जाएगा और अदालत के अगले आदेशों तक सारा काम प्रशासनिक अधिकारी की देखरेख में सभी विकास कार्य संपन्न होंगे। -अशोक पथरिया, कार्यकारी अधिकारी जीरकपुर