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शहर की सफाई का ठेका खत्म, नई कंपनी चुनने को शुरू नहीं की कवायद
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मोहाली। आजकल चल रहे कोरोना कॉल के दौरान ही शहर में सफाई का ठेका खत्म हो गया है। लेकिन अभी तक भी निगम ने नया ठेका देने के लिए कवायद शुरू नहीं की है। वहीं, अब इस मामले में पूर्व पार्षद भी मैदान में उतर आए हैं।
इसके मद्देनजर पूर्व पार्षद कुलजीत सिंह बेदी ने पंजाब सरकार, स्थानीय निकाय मंत्री, स्थानीय निकाय विभाग के सेक्रेटरी और डायरेक्टर को पत्र लिखा है। इस पत्र की एक कॉपी निकाय विभाग को भी भेजी है। इसके साथ ही मांग की है कि इस मुद्दे पर सरकार तुरंत ध्यान दे और नई कंपनी को ठेका देने की कार्रवाई शुरू की जाए। वहीं, मौजूदा कंपनी को दी गई एक्सटेंशन तय समय अवधि के लिए दी जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो वह अदालत की शरण लेंगे। उन्होंने कहा कि वह लोगों की खून पसीने की कमाई को ऐसे किसी को लूटने नहीं देंगे।
मिली जानकारी के मुताबिक पार्षद कुलजीत सिंह बेदी ने अपने पत्र में कहा है कि 15 जून को मोहाली शहर की सफाई का ठेका खत्म हो गया है। लेकिन हैरानी की बात है कि अभी तक नए टेंडर्स के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में तय है कि पुरानी कंपनी को एक्सटेंशन देनी पड़ेेगी। क्योंकि अगर एकदम सफाई रुकती है तो शहर के हालात खराब हो जाएंगे।
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उन्होंने लिखे पत्र में साफ किया है कि यह एक्सटेंशन सिर्फ उतने ही समय के लिए दी जाए जब तक टेंडर्स की कार्रवाई पूरी नहीं होती है। अगर एक्सटेंशन में तीन महीने से ज्यादा का समय दिया गया तो वह अदालत में जाने से गुरेज नहीं करेंगे।
अकाली सरकार के दबाव में दिया था ठेका
बेदी ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2015 में जब नगर निगम का हाउस भी नहीं चुना गया था, तो उस समय के कमिश्नर ने यह ठेका दिया था। जिसमें कि सीधे-सीधे उस समय की अकाली सरकार ने दबाव बनाया था। उन्होंने कहा कि हाउस में समय-समय पर चुने हुए नुमाइंदे सफाई के बुरे हाल संबंधी आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके जवाब में निगम अधिकारी यह कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं कि कंपनी को जुर्माना और पनेल्टी लगा दी गई है। उन्होंने कहा कि कंपनी को हर महीने 1 करोड़ 35 लाख रुपए अदा किए जा रहे हैं, जबकि मूल ठेका 1 करोड़ 5 लाख रुपए का था।
पैसे बर्बाद नहीं होने दिए जाएंगे
पूर्व पार्षद बेदी ने कहा कि अगर निगम अधिकारी खुद यह मानते हैं कि कंपनी का काम तसल्लीबख्श नहीं है तो फिर भी ठेके का एरिया क्यों बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि असल में यह पैसा मोहाली के लोग ही टैक्सेज के रूप में देते हैं। एक जिम्मेदार शहरी के तौर पर वह इस पैसे का दुरुपयोग नहीं होने देंगे। अगर इस मामले में देरी की और एक्सटेंशन बढ़ाई तो वह नगर निगम के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
कंपनी के खिलाफ हुई थी विजिलेंस जांच
मिली जानकारी के मुुताबिक मोहाली शहर में 50 वार्डों का ठेेका एक प्राइवेट कंपनी को दिया गया था। यह कंपनी मशीनों से शहर में सफाई करती थी। लेकिन शुरू से ही इस पर सवाल उठना शुरू हो गए थे। कंपनी के खिलाफ विजिलेंस जांच तक हुई थी। जब कंपनी को ठेका दिया गया तो उसके बाद से स्वच्छ भारत रैंकिंग सिस्टम शुरू हो गया था। लेकिन मोहाली शहर देश में तो दूर, पंजाब में भी नंबर-1 नहीं बन पाया है।
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इसके मद्देनजर पूर्व पार्षद कुलजीत सिंह बेदी ने पंजाब सरकार, स्थानीय निकाय मंत्री, स्थानीय निकाय विभाग के सेक्रेटरी और डायरेक्टर को पत्र लिखा है। इस पत्र की एक कॉपी निकाय विभाग को भी भेजी है। इसके साथ ही मांग की है कि इस मुद्दे पर सरकार तुरंत ध्यान दे और नई कंपनी को ठेका देने की कार्रवाई शुरू की जाए। वहीं, मौजूदा कंपनी को दी गई एक्सटेंशन तय समय अवधि के लिए दी जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो वह अदालत की शरण लेंगे। उन्होंने कहा कि वह लोगों की खून पसीने की कमाई को ऐसे किसी को लूटने नहीं देंगे।
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मिली जानकारी के मुताबिक पार्षद कुलजीत सिंह बेदी ने अपने पत्र में कहा है कि 15 जून को मोहाली शहर की सफाई का ठेका खत्म हो गया है। लेकिन हैरानी की बात है कि अभी तक नए टेंडर्स के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में तय है कि पुरानी कंपनी को एक्सटेंशन देनी पड़ेेगी। क्योंकि अगर एकदम सफाई रुकती है तो शहर के हालात खराब हो जाएंगे।
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उन्होंने लिखे पत्र में साफ किया है कि यह एक्सटेंशन सिर्फ उतने ही समय के लिए दी जाए जब तक टेंडर्स की कार्रवाई पूरी नहीं होती है। अगर एक्सटेंशन में तीन महीने से ज्यादा का समय दिया गया तो वह अदालत में जाने से गुरेज नहीं करेंगे।
अकाली सरकार के दबाव में दिया था ठेका
बेदी ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2015 में जब नगर निगम का हाउस भी नहीं चुना गया था, तो उस समय के कमिश्नर ने यह ठेका दिया था। जिसमें कि सीधे-सीधे उस समय की अकाली सरकार ने दबाव बनाया था। उन्होंने कहा कि हाउस में समय-समय पर चुने हुए नुमाइंदे सफाई के बुरे हाल संबंधी आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके जवाब में निगम अधिकारी यह कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं कि कंपनी को जुर्माना और पनेल्टी लगा दी गई है। उन्होंने कहा कि कंपनी को हर महीने 1 करोड़ 35 लाख रुपए अदा किए जा रहे हैं, जबकि मूल ठेका 1 करोड़ 5 लाख रुपए का था।
पैसे बर्बाद नहीं होने दिए जाएंगे
पूर्व पार्षद बेदी ने कहा कि अगर निगम अधिकारी खुद यह मानते हैं कि कंपनी का काम तसल्लीबख्श नहीं है तो फिर भी ठेके का एरिया क्यों बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि असल में यह पैसा मोहाली के लोग ही टैक्सेज के रूप में देते हैं। एक जिम्मेदार शहरी के तौर पर वह इस पैसे का दुरुपयोग नहीं होने देंगे। अगर इस मामले में देरी की और एक्सटेंशन बढ़ाई तो वह नगर निगम के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
कंपनी के खिलाफ हुई थी विजिलेंस जांच
मिली जानकारी के मुुताबिक मोहाली शहर में 50 वार्डों का ठेेका एक प्राइवेट कंपनी को दिया गया था। यह कंपनी मशीनों से शहर में सफाई करती थी। लेकिन शुरू से ही इस पर सवाल उठना शुरू हो गए थे। कंपनी के खिलाफ विजिलेंस जांच तक हुई थी। जब कंपनी को ठेका दिया गया तो उसके बाद से स्वच्छ भारत रैंकिंग सिस्टम शुरू हो गया था। लेकिन मोहाली शहर देश में तो दूर, पंजाब में भी नंबर-1 नहीं बन पाया है।