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लॉकडाउन से छतबीड़ जू की आमदनी जीरो, खर्चा हर महीने 30 लाख रुपये, रेवेन्यू में छूट की मांग

Thu, 28 May 2020 12:44 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, जीरकपुर
अमर उजाला, जीरकपुर Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Thu, 28 May 2020 12:44 PM IST
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Lockdown, Chhatbir Zoo's income is zero, spending Rs. 30 lakhs every month
छतबीड़ जू - फोटो : amar ujala
लॉकडाउन ने जहां एक ओर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था खराब कर डाली है, वहीं जानवरों के कुनबे पर भी इसका सीधा असर हुआ है। जिला मोहाली में जीरकपुर के अंर्तगत आते छत गांव में स्थित छतबीड़-जू का हाल भी अब बेहाल होने लगा है।
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एक ओर छतबीड़-जू की प्रतिदिन की 1.80 लाख रुपये की आमदनी बंद हो गई है, वहीं दूसरी ओर प्रतिमाह का 30 लाख रुपये का खर्च बरकरार है। अब जू अथारिटी ने पंजाब सरकार से रेवेन्यू में छूट की मांग की है कि छतबीड़-जू सोसायटी के पास अभी पर्याप्त फंड नहीं है और उनको सरकार के रेवेन्यू में योगदान से छूट दी जाए, जिससे जू को चलाया जा सके।
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पिछले साल की बात करें तो छतबीड़-जू का कलेक्शन करीब 7 करोड़ रुपये था। दो माह से जू बंद होने से छतबीड़ में रेवेन्यू आना तो बंद हो ही गया। लेकिन जानवरों के लिए आहार तो रोजाना आता ही है। हालांकि जानवरों की फीडिंग में कोई कमी नहीं आई। प्रतिमाह छतबीड़ जू में 30 लाख रुपये का आहार आता था। इसमें मीट, अनाज, चारा, फल और सब्जियां शामिल हैं। यदि छतबीड़ के रेवेन्यू की बात करें तो सालाना 7 करोड़ का रेवेन्यू छतबीड़-जू से ही पंजाब सरकार को आ जाता है।
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इसके साथ ही पंजाब सरकार ग्रांट भी देती है। इसके साथ ही जू की कैंटीन, फेरी के माध्यम से भी रेवेन्यू अर्जित होता है। छतबीड़ जू के एक अधिकारी ने बताया कि लॉकडाउन के पहले जू आत्मनिर्भर था। लॉकडाउन के बाद अब जू का पूरा बजट बिगड़ गया है। जू की सेविंग भी बहुत कम बची हैं। ऐसे में जू सोसायटी फंड से रेवेन्यू दिया गया तो जू के लिए बढ़ जाएगी।

तीन हजार विजिटर्स प्रतिदिन छतबीड़-जू में प्रतिदिन तीन हजार विजिटर्स आते थे। ऐसी स्थिति में विजिटर की इंट्री औसतन यदि 60 रुपये (बड़ों का टिकट 80 रुपये और बच्चों का 40 रुपये) मानें तो प्रतिदिन का कलेक्शन करीब 1.80 लाख रुपये का था। इन विजिटर्स के माध्यम से ही कैंटीन और फेरी का कलेक्शन भी आता था।

सरकार भी देती है ग्रांट
जू में बच्चों के लिए टिकट 40 रुपये का है जबकि बड़ों के लिए 80 रुपये का। लायन सफारी की विजिट कीमत 75 रुपये थी। जू के एक अधिकारी ने बताया कि जू का वार्षिक खर्च 18 करोड़ रुपये का है। इसमें 7 करोड़ रुपये का रेवेन्यू खुद जू द्वारा अर्जित किया जाता है और खर्च सरकार द्वारा दिया जाता है।


लॉकडाउन के कारण हमारी परेशानी बढ़ गई है। हम जू सोसायटी फंड के माध्यम से इस जू को इंटरनेशनल लेवल का बनाने का प्रयास कर रहे थे लेकिन अब तो फंड खत्म होते जा रहे हैं। हमने सरकार से यही अनुरोध किया है कि सोसायटी की ओर से सरकार को रेवेन्यू देने के मामले में छूट दी जाए। हमको छूट मिलेगी तो हम जू का खर्च आसानी से चला सकेंगे।
-एम सुधागर, फील्ड डायरेक्टर
 
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