{"_id":"5a888c3d4f1c1b3c718b5615","slug":"131518898237-mohali-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब के स्थनीय निकाय विभाग में हुए भरती घोटाले में चालान पेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब के स्थनीय निकाय विभाग में हुए भरती घोटाले में चालान पेश
Updated Sun, 18 Feb 2018 01:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी और दिल्ली के ध्यानार्थ
स्थानीय निकाय में हुए भर्ती घोटाले में चालान पेश
विजिलेंस की ओर से पेश चालान में हैं 27 आरोपी
केस की मजबूती के लिए काफी रिकॉर्ड और दस्तावेज लगाए हैं विजिलेंस ने
2015 में सामने आया था यह केस, 682 पदों के लिए हुई थी भर्ती
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली।
पूर्व अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के कार्यकाल में साल 2015 में स्थानीय निकाय में हुए भर्ती घोटाले मामले में शनिवार को विजिलेंस की ओर से चालान पेश किया। विजिलेंस ने 27 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया। विजिलेंस के डीएसपी धर्मपाल ने चालान पेश करने की पुष्टि की है। आरोपियों में संदीप, खुशवंत, साहिल बंसल, गौरव जैदका, गौरव शर्मा, अजय कुमार, हरविंदर सिह मान समेत कई लोगों के नाम शामिल हैं। चालान आईपीसी की धारा -420, 120 बी और 201 के तहत पेश किया गया है। इसके अलावा केस की मजबूती के लिए काफी रिकॉर्ड और पकड़े गए आरोपियों से बरामद सामान, कॉल डिटेल समेत कई चीजों को शामिल किया गया है।
स्थानीय निकाय विभाग में यह भर्ती प्रक्रिया 2015 में शुरू हुई थी। विभाग की ओर से एसडीओ और जेई की 682 पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। पूरे पंजाब से करीब 76 हजार अभ्यर्थियों ने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया था। परीक्षा दो चरणों में आयोजित की गई थी, जो पंजाब यूनिवर्सिटी में हुई थी। हालांकि इस मामले का खुलासा उस समय हुआ था, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल संगत दर्शन कर रहे थे। इस दौरान एक व्यक्ति की तरफ से शिकायत दी गई थी कि वह परीक्षा में शामिल हुआ था। उसने कहा कि उसे फोन आया था, इस दौरान उससे कहा गया था कि तीस लाख रुपये भरो। उसे परीक्षा में आने वाले सभी पेपर की तैयारी कराई जाएगी। इसके लिए उन्हें लखनऊ ले जाया जाएगा। वहां पर तैयारी कराई जाएगी। इसके बाद जब जांच हुई तो गिरोह की पोल खुल गई। इसके बाद विजिलेंस ने केस दर्ज कर एक के बाद एक आरोपियों को गिरफ्तार करना शुरू किया था। साथ हीं पंजाब सरकार ने इसके बाद सारी भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। जिसका खामियाजा कई लोगों को भुगतना पड़ा। क्योंकि इस चक्कर में कई लोग तो ओवरएज होंगे। वहीं, जानकारों की माने तो इस केस के तार पंजाब से होते हुए यूपी और बिहार तक जुड़े थे। आरोपी लखनऊ और नजफगढ़ (दिल्ली) में पेपरों की तैयारी करवाते थे। पता चला है कि इस मामले के दो आरोपियों कमलेश और रावत की मौत हो चुकी है।
विज्ञापन
स्थानीय निकाय में हुए भर्ती घोटाले में चालान पेश
विजिलेंस की ओर से पेश चालान में हैं 27 आरोपी
केस की मजबूती के लिए काफी रिकॉर्ड और दस्तावेज लगाए हैं विजिलेंस ने
2015 में सामने आया था यह केस, 682 पदों के लिए हुई थी भर्ती
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली।
पूर्व अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के कार्यकाल में साल 2015 में स्थानीय निकाय में हुए भर्ती घोटाले मामले में शनिवार को विजिलेंस की ओर से चालान पेश किया। विजिलेंस ने 27 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया। विजिलेंस के डीएसपी धर्मपाल ने चालान पेश करने की पुष्टि की है। आरोपियों में संदीप, खुशवंत, साहिल बंसल, गौरव जैदका, गौरव शर्मा, अजय कुमार, हरविंदर सिह मान समेत कई लोगों के नाम शामिल हैं। चालान आईपीसी की धारा -420, 120 बी और 201 के तहत पेश किया गया है। इसके अलावा केस की मजबूती के लिए काफी रिकॉर्ड और पकड़े गए आरोपियों से बरामद सामान, कॉल डिटेल समेत कई चीजों को शामिल किया गया है।
स्थानीय निकाय विभाग में यह भर्ती प्रक्रिया 2015 में शुरू हुई थी। विभाग की ओर से एसडीओ और जेई की 682 पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। पूरे पंजाब से करीब 76 हजार अभ्यर्थियों ने इस परीक्षा के लिए आवेदन किया था। परीक्षा दो चरणों में आयोजित की गई थी, जो पंजाब यूनिवर्सिटी में हुई थी। हालांकि इस मामले का खुलासा उस समय हुआ था, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल संगत दर्शन कर रहे थे। इस दौरान एक व्यक्ति की तरफ से शिकायत दी गई थी कि वह परीक्षा में शामिल हुआ था। उसने कहा कि उसे फोन आया था, इस दौरान उससे कहा गया था कि तीस लाख रुपये भरो। उसे परीक्षा में आने वाले सभी पेपर की तैयारी कराई जाएगी। इसके लिए उन्हें लखनऊ ले जाया जाएगा। वहां पर तैयारी कराई जाएगी। इसके बाद जब जांच हुई तो गिरोह की पोल खुल गई। इसके बाद विजिलेंस ने केस दर्ज कर एक के बाद एक आरोपियों को गिरफ्तार करना शुरू किया था। साथ हीं पंजाब सरकार ने इसके बाद सारी भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। जिसका खामियाजा कई लोगों को भुगतना पड़ा। क्योंकि इस चक्कर में कई लोग तो ओवरएज होंगे। वहीं, जानकारों की माने तो इस केस के तार पंजाब से होते हुए यूपी और बिहार तक जुड़े थे। आरोपी लखनऊ और नजफगढ़ (दिल्ली) में पेपरों की तैयारी करवाते थे। पता चला है कि इस मामले के दो आरोपियों कमलेश और रावत की मौत हो चुकी है।
विज्ञापन