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शहीदी दिवस आज : जिस ट्रैक को उखाड़ ले गई थी पाकिस्तानी सेना... उस पर आज शहीदों को सलाम करने दौड़ेगी ट्रेन

Sun, 23 Mar 2025 03:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा अनिल कुमार, फिरोजपुर
अनिल कुमार, फिरोजपुर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 23 Mar 2025 03:58 AM IST
सार

अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए हर वर्ष 23 मार्च को हुसैनीवाला में शहीदों के स्मारक पर मेला लगता है। इस समाधि स्थल से भारत से पाकिस्तान की ओर एक रेलवे ट्रैक गुजरता था। 

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Martyrdom Day : train will run on track which was uprooted by the Pakistani army to salute the martyrs today
भगत सिंह - फोटो : Adobe

विस्तार

आज जब फिरोजपुर छावनी से हुसैनीवाला के लिए विशेष ट्रेन शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए रवाना होगी, तो 10 इस किलोमीटर के इस सफर में लोगों की भावनाओं का ज्वार आसमान पर होगा। हो भी क्यों न... यह वही पवित्र स्थल है, जहां शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव हमेशा के लिए भारत मां की गाेद में समा गए थे। 

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23 मार्च, 1931 को लाहौर की सेंट्रल जेल में फांसी दिए जाने के बाद तीनों शहीदों का यहीं पर अंतिम संस्कार किया गया था। इन अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए हर वर्ष 23 मार्च को हुसैनीवाला में शहीदों के स्मारक पर मेला लगता है। इस समाधि स्थल से भारत से पाकिस्तान की ओर एक रेलवे ट्रैक गुजरता था। 
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1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना ट्रैक का आधा हिस्सा उखाड़ कर ले गई थी, लेकिन आधा हिस्सा अब भी हुसैनीवाला बॉर्डर तक मौजूद है, जिसे रेलवे ने संरक्षित किया है। इस ट्रैक पर साल में सिर्फ दो बार ही ट्रेन चलाई जाती है। एक बार 23 मार्च को शहीदी मेले और दूसरी बार 13 अप्रैल बैसाखी मेले पर।  

शहीदों की समाधि के लिए भारत ने पाकिस्तान को दिए थे 12 गांव
इस समाधि स्थल की कहानी भी बहुत रोचक है। बंटवारे के दौरान यह हिस्सा पाकिस्तान में चला गया था। इसे हासिल करने के लिए भारत ने पाकिस्तान को फाजिल्का के 12 गांव दिए थे। उनके बदले में हुसैनीवाला भारत की सीमा में आ पाया था। यहां रोज रिट्रीट सेरेमनी भी होती है। सैकड़ों की संख्या मेें लोग पहुंचते हैं और जवानों का उत्साह  बढ़ाते हैं।

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