Amritsar: गुरु गोबिंद सिंह के प्रकाश पर्व पर नहीं होगी आतिशबाजी, दीपमाला भी सीमित; शहीदी दिवस के कारण फैसला
आमतौर पर प्रकाश पर्व पर अमृतसर का श्री हरिमंदिर साहिब भव्य रूप से सजाया जाता है। रात के समय होने वाली आतिशबाजी और लाखों दीपों की दीपमाला देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहती है। लेकिन इस बार साहिबजादों की शहादत के शोकपूर्ण अवसर को देखते हुए उत्सव से परहेज किया गया है।
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इस वर्ष 27 दिसंबर को श्री हरमंदिर साहिब में होने वाले धार्मिक आयोजनों में महत्वपूर्ण बदलाव होगा। सिखों के दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह का प्रकाश पर्व और उनके साहिबजादों का शहादत दिवस एक ही दिन आने के कारण इस बार पारंपरिक आतिशबाजी नहीं होगी और दीपमाला भी सीमित रखी जाएगी।
सादगीपूर्ण होंगे धार्मिक कार्यक्रम
एसजीपीसी की ओर से संकेत दिए गए हैं कि इस वर्ष मुख्य रूप से गुरबाणी कीर्तन, अरदास और साहिबजादों की शहादत को समर्पित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आतिशबाजी और भव्य सजावट के बजाय श्रद्धा, त्याग और बलिदान की भावना को केंद्र में रखा जाएगा। धार्मिक जानकारों के अनुसार साहिबजादों की शहादत सिख इतिहास का अत्यंत मार्मिक अध्याय है और ऐसे दिन उल्लासपूर्ण आयोजनों से दूरी बनाना परंपरा का हिस्सा रहा है।
सरकार एसजीपीसी के अनुसार करेगी आयोजन: सीएम
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि एसजीपीसी जो भी दिशा-निर्देश जारी करेगी, सरकार उसी के अनुसार आयोजन करेगी। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे इस दिन की गंभीरता को समझते हुए गुरु साहिब और साहिबजादों की कुर्बानी को श्रद्धा और संयम के साथ याद करें। इस निर्णय से श्रद्धालु आतिशबाजी और भव्य दीपमाला के दृश्य से वंचित रहेंगे, लेकिन गुरु गोबिंद सिंह जी और साहिबजादों के अद्वितीय बलिदान का गहन आध्यात्मिक अनुभव अवश्य प्राप्त करेंगे।