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Ludhiana News: लुधियाना में 50 हजार एमएसएमई पर स्थानांतरण की तलवार

Mon, 24 Aug 2026 06:25 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना Updated Mon, 24 Aug 2026 06:25 PM IST
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Sword of transfer hangs over 50,000 MSMEs in Ludhiana
सीआईसीयू बोला- जमीनी हकीकत के आधार पर बने औद्योगिक नीति
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संवाद न्यूज एजेंसी
लुधियाना। शहर के पुराने औद्योगिक इलाकों में हजारों छोटी इकाइयों के स्थानांतरण का मुद्दा फिर गरमा गया है। चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल अंडरटेकिंग्स (सीआईसीयू) ने पंजाब सरकार से इसका स्थायी और व्यावहारिक समाधान मांगा है। चैंबर ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को लुधियाना के मास्टर प्लान की समीक्षा का प्रस्ताव दिया है।

सीआईसीयू ने उन इलाकों को औद्योगिक जोन घोषित करने की मांग की है जहां 80 फीसदी या अधिक हिस्सा पहले से ही औद्योगिक इकाइयों के कब्जे में है। जनता नगर, शिमलापुरी और न्यू शिमलापुरी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 50 हजार से अधिक छोटी औद्योगिक इकाइयां दशकों से चल रही हैं। इन इकाइयों में उद्यमियों ने भारी पूंजी निवेश किया है। बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी मिला हुआ है। चैंबर प्रधान उपकार सिंह आहूजा ने कहा कि उद्योग अस्थायी मोहलत के भरोसे भविष्य तय नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि यदि कोई क्षेत्र जमीनी स्तर पर औद्योगिक है, तो मास्टर प्लान में भी इसे मान्यता मिलनी चाहिए। स्थायी नीति से उद्यमियों को निवेश, आधुनिकीकरण और कारोबार विस्तार का भरोसा मिलेगा।
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महासचिव हनी सेठी ने कहा कि हजारों एमएसएमई इकाइयों ने इन इलाकों में दशकों से कारोबार स्थापित किए हैं। उन्हें बार-बार दूसरी जगह स्थानांतरित होने के लिए कहना व्यावहारिक समाधान नहीं है। सरकार को जमीनी हकीकत के आधार पर इस औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित करना चाहिए। सीआईसीयू ने सरकार से दशकों पुरानी अनिश्चितता को जमीनी हकीकत पर आधारित स्थायी नीति में बदलने की अपील की है।
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क्षेत्रों के सर्वेक्षण की मांग
सितंबर 2023 में उद्योगों के स्थानांतरण के लिए दी गई मोहलत सितंबर 2026 में समाप्त हो रही है। सीआईसीयू ने मांग की है कि व्यापक नीति समीक्षा पूरी होने तक उद्योगों के खिलाफ कोई कार्रवाई न हो। मौजूदा समयसीमा को उचित रूप से आगे बढ़ाया जाए। चैंबर ने करीब 72 ऐसे क्षेत्रों का सर्वेक्षण और मूल्यांकन कराने का सुझाव दिया है। पात्र क्षेत्रों को मास्टर प्लान में औद्योगिक जोन के तौर पर शामिल करने से हजारों एमएसएमई इकाइयों को नीतिगत स्थिरता मिलेगी, रोजगार सुरक्षित होगा और नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
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