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खेलों से बंटा रहे नशेड़ियों का ध्यान
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Mon, 16 Jun 2014 10:29 PM IST
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पंजाब में नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं और अन्य लोगों को नशे के चंगुल से बाहर निकालने के लिए खेलों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। खेलों के जरिए नशेड़ियों का ध्यान बांटा जा रहा है। लुधियाना में चल रहे 11 नशा केंद्रों में करीब 1500 नशे के आदी लोग अपना इलाज करा रहे है। इनमें युवा वर्ग से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। नशा छुड़ाओ केंद्र में इन लोगों के लिए बाकायदा टाइम टेबल फिक्स किया गया है। समय के हिसाब से उन्हें हर सुविधा दी जाती है।
दिन में कैरम, शाम को बैडमिंटन
रेडक्रास के नशा छुड़ाओ केंद्र में दाखिल मरीजों का पूरे दिन का प्लान बना हुआ है। सुबह खाना खाने के बाद उन्हें कैरम, लूडो और टेबल टेनिस जैसे गेम्स खिलाए जाते हैं। दोपहर के खाने के बाद कुछ समय के लिए टीवी देखने दिया जाता है। शाम के समय बैडमिंटन समेत अन्य गेम्स खिलाई जाती है। देर रात को खाना खाने के बाद उन्हें कुछ समय के लिए दोबारा टीवी देखने के लिए समय दिया जाता है। दस बजे के बाद टीवी बंद कर उन्हें सुलाया जाता है। इन सबकी निगरानी के लिए वहां पर पूरा स्टाफ तैनात किया हुआ है।
नशा छुड़ाओ केंद्र में कई तरह के मरीज नशा छुड़ाने के लिए आ रहे हैं। इनमें कई अच्छे परिवारों के युवा भी शामिल हैं जो गलत संगत में पड़ कर नशे के दलदल में फंस तो गए, लेकिन निकल नहीं पा रहे। इनके अलावा नशे के आदी हो चुके पंजाब पुलिस के कई मुलाजिम भी इन केंद्रों में अपना इलाज करवा रहे हैं। वह केंद्र में दाखिल तो नहीं हो रहे, लेकिन नशा छुड़ाने की दवाई समय पर ले रहे है। जिससे वह नशे के दल दल से बाहर निकल सके।
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खेलों से बांटा जाता है ध्यान : काउंसिलर
नशा छुड़ाओ केंद्र में मौजूद काउंसिलर अनामिका का कहना है कि नशा छुड़ाओ केंद्र में दाखिल मरीजों का ध्यान बांटने के लिए मरीजों को गेम्स खिलाई जाती है। ताकि वह जल्द से जल्द नशे से दूर हो सके।
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दिन में कैरम, शाम को बैडमिंटन
रेडक्रास के नशा छुड़ाओ केंद्र में दाखिल मरीजों का पूरे दिन का प्लान बना हुआ है। सुबह खाना खाने के बाद उन्हें कैरम, लूडो और टेबल टेनिस जैसे गेम्स खिलाए जाते हैं। दोपहर के खाने के बाद कुछ समय के लिए टीवी देखने दिया जाता है। शाम के समय बैडमिंटन समेत अन्य गेम्स खिलाई जाती है। देर रात को खाना खाने के बाद उन्हें कुछ समय के लिए दोबारा टीवी देखने के लिए समय दिया जाता है। दस बजे के बाद टीवी बंद कर उन्हें सुलाया जाता है। इन सबकी निगरानी के लिए वहां पर पूरा स्टाफ तैनात किया हुआ है।
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नशा छुड़ाओ केंद्र में कई तरह के मरीज नशा छुड़ाने के लिए आ रहे हैं। इनमें कई अच्छे परिवारों के युवा भी शामिल हैं जो गलत संगत में पड़ कर नशे के दलदल में फंस तो गए, लेकिन निकल नहीं पा रहे। इनके अलावा नशे के आदी हो चुके पंजाब पुलिस के कई मुलाजिम भी इन केंद्रों में अपना इलाज करवा रहे हैं। वह केंद्र में दाखिल तो नहीं हो रहे, लेकिन नशा छुड़ाने की दवाई समय पर ले रहे है। जिससे वह नशे के दल दल से बाहर निकल सके।
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खेलों से बांटा जाता है ध्यान : काउंसिलर
नशा छुड़ाओ केंद्र में मौजूद काउंसिलर अनामिका का कहना है कि नशा छुड़ाओ केंद्र में दाखिल मरीजों का ध्यान बांटने के लिए मरीजों को गेम्स खिलाई जाती है। ताकि वह जल्द से जल्द नशे से दूर हो सके।