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पंजाब: मालवा तय करेगा किसके सिर सजेगा सत्ता का ताज, 117 में से 69 विस सीट अकेले इस क्षेत्र में

Wed, 29 Dec 2021 05:17 PM IST
भूपेंद्र सिंह वरिन्दर राणा, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)
वरिन्दर राणा, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Wed, 29 Dec 2021 05:17 PM IST
सार

साल 2017 के चुनाव में कांग्रेस को मालवा से 40 सीट मिली थी। 2022 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों की नजर मालवा क्षेत्र पर है। 

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Role of Malwa region is important in the Punjab assembly elections
पंजाब विधानसभा चुनाव। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब की सत्ता का ताज किस पार्टी के सिर पर सजेगा, इसका फैसला हमेशा पंजाब के मालवा ने तय किया है। क्योंकि पंजाब में विधानसभा की कुल 117 सीट हैं, अकेले मालवा में 69 सीट हैं। आज तक मालवा क्षेत्र से जिस पार्टी ने सबसे ज्यादा सीटों पर विजय हासिल की है। उसे पंजाब की सत्ता में राज करने का मौका मिला है। साल 2017 के चुनाव में मालवा में कांग्रेस ने 40 सीट जीती थी। इसी के दम पर कांग्रेस ने सत्ता का सुख लिया था।

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साल 2022 में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में भी राजनीतिक पार्टियों की नजर मालवा पर है। इसलिए सभी दल मालवा में सबसे ज्यादा जोर अजमाइश कर रहे है। आने वाले दिनों में राजनीतिक पार्टी सबसे ज्यादा फोकस मालवा पर करेंगी।  पंजाब में विधानसभा की कुल 117 सीट है। इसमें मालवा में 69, माझा में 25 और दोआबा में 23 विधानसभा सीट आती है। साल 2017 के चुनाव में दस साल बाद कांग्रेस को सत्ता का सुख मिला था।
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यह सुख पाने में मालवा ने सबसे अहम रोल अदा किया था। कांग्रेस ने मालवा से 40, माझा से 22 और दोआबा से 15 सीटों  पर जीत हासिल की थी। साल 2012 के चुनाव में अकाली दल ने मालवा क्षेत्र से 33 सीटें जीती थी। इसलिए उनकी सरकार सत्ता में आई थी। लेकिन साल 2017 के चुनाव में अकाली दल के खाते में महज आठ सीट ही मिली थी और वह दस साल बाद सत्ता से बाहर हो गए थे।
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वहीं अगर पंजाब में लोकसभा सीट की बात करे तो यह सभी सबसे ज्यादा मालवा में है। पंजाब में कुछ 13 लोकसभा सीट आती है, इसमें मालवा में सबसे ज्यादा सात लोकसभा सीट है। इसमें फिरोजपुर,फरीदकोट,बठिंडा, लुधियाना, संगरूर, फतेहगढ़ साहिब और पटियाला शामिल हैं। 

एक बार दोआबा का रहा राज

पंजाब में मुख्यमंत्री की कुर्सी 25 फरवरी 1992 को मालवा से बाहर गई थी जब जालंधर कैंटोनमेंट के विधायक बेअंत सिंह मुख्यमंत्री बने थे। बेअंत सिंह दोआबा क्षेत्र से आते थे। 31 अगस्त 1995 को बम ब्लास्ट में बेअंत सिंह की हत्या होने के बाद कांग्रेस के हरचरण सिंह बराड़ सीएम बने जो मालवा में पड़ने वाली मुक्तसर सीट से विधायक थे। उसके बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी कभी मालवा से बाहर नहीं गई। इससे पहले दरबारा सिंह छह जून 1980 को सीएम बने थे, जोकि नकोदर सीट से विधायक थे। छह अक्टूबर 1983 तक उनका कार्यकाल चला था।

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